गेमीफाइड नॉवेल्स का ट्रेंड:  युवा-महिलाओं को पसंद आ रहीं ये किताबें, परेशानियां भूलने में मददगार; पढ़ते वक्त वीडियो गेम खेलने का एहसास
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गेमीफाइड नॉवेल्स का ट्रेंड: युवा-महिलाओं को पसंद आ रहीं ये किताबें, परेशानियां भूलने में मददगार; पढ़ते वक्त वीडियो गेम खेलने का एहसास

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सोचिए, घर की बालकनी में चाय की चुस्कियां ले रहे हैं। तभी आपकी सबसे अच्छी दोस्त की बिल्ली भाग जाती है। आप बुझे मन से उसे पकड़ने निकलते ही हैं कि अचानक ‘धड़ाम!’ एक जोरदार धमाका होता है। आपकी पूरी बिल्डिंग और पूरा शहर ऐसे पिचक जाता है जैसे किसी विशालकाय पैर ने कोल्ड-ड्रिंक के कैन को कुचल दिया हो…। यह किसी वीडियो गेम की शुरुआत नहीं, बल्कि मैट डिनिमैन की मशहूर किताब ‘डंजियन क्रॉलर कार्ल’ की कहानी है। किताब का हीरो ‘कार्ल’ बिल्ली ‘प्रिंसेस डोनट’ के साथ इस तबाही में बच जाता है। पर, अब उन्हें अजीब सी जेल (डंजियन) में खूंखार राक्षसों से लड़ना है और इस लड़ाई का पूरे ब्रह्मांड में लाइव प्रसारण हो रहा है। किताबों के इस नए दौर को LitRPG (लिटरेरी रोल-प्लेइंग गेम्स) यानी ‘गेमीफाइड नॉवेल्स’ कहा जा रहा है। इन्हें पढ़ते समय लगता है कि जैसे आप कोई वीडियो गेम खेल रहे हैं या किसी को खेलते हुए देख रहे हैं। पढ़ते-पढ़ते पाठक को पता चलता रहता है कि हीरो की लाइफ कितनी बची है, उसके पास कौन सी जादुई ताकतें हैं और उसने कितने पॉइंट कमाए।यह ट्रेंड 30-40 साल के उन लोगों के बीच सुपरहिट हो रहा है जो बचपन में वीडियो गेम खेलते थे। इसे पढ़ने से ज्यादा ‘ऑडियोबुक’ के रूप में सुना जा रहा है। छात्रों से लेकर महिलाओं तक, हर कोई इयरफोन लगाकर इन कहानियों का मजा उठा रहा है। पारंपरिक उपन्यासों में किरदार की ताकत दिखाने के लिए लेखकों को लंबे पैराग्राफ लिखने पड़ते थे, वहीं गेमीफाइड किताबों के लेखक सिर्फ एक लाइन लिख देते हैं- ‘लेवल अप हो गया।’ पाठक तुरंत समझ जाते हैं कि किरदार पहले से ज्यादा शक्तिशाली हो चुका है। ये प्रिंटेड (हार्ड कॉपी) और ऑनलाइन दोनों फॉर्मेट में उपलब्ध हैं। मोटी व उबाऊ किताबों के बीच ये विधा ताजी हवा के झोंके जैसी है। चैप्टर छोटे व रोमांच से भरपूर होते हैं। हर चैप्टर के अंत में सस्पेंस आता है कि पाठक अगली कड़ी पढ़े बिना रह नहीं पाता। रिंग कहते हैं,‘आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग कुछ देर के लिए परेशानियां भूलकर बस मजेदार सफर पर निकलना चाहते हैं, जो ये किताबें बखूबी करवा रही हैं।’ हर माह 75 लाख रु. तक कमाई, दिग्गज लेखकों को पीछे छोड़ा इस नई विधा ने लेखकों की किस्मत बदल दी है। वे पब्लिशिंग कंपनियों का इंतजार नहीं करते, बल्कि इंटरनेट पर रोज चैप्टर लिखकर सीधे पाठकों से जुड़ते हैं। पाठक के सुझावों के अनुसार कहानी आगे बढ़ाते हैं। कमाई के मामले में इन लेखकों ने दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। लेखक ‘जोगार्थ’ इंटरनेट पर अपनी कहानियों से हर महीने लगभग 75 लाख रु. कमाते हैं। वहीं डिनिमैन की किताब की 27 लाख कॉपियां बिक चुकी हैं और उस पर सीरियल भी बन रहा है। इस तरह के 50 उपन्यास लिख चुके सेथ रिंग कहते हैं,‘हम कोई महान अमेरिकी उपन्यास नहीं लिख रहे हैं, बस लोगों को बेहद मजेदार और रोमांचक कहानी देना चाहते हैं।’



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