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करोना रोकने के लिए आयुर्वेदिक दवा कितनी उपयोगी हैं,कोई निस्पछ अध्यन है या सिर्फ अपना विश्वास

जबसे कोविड-19 का प्रकोप हमारे भारत में छाया है हमारे प्रधानमंत्री टीवी और रेडियो पर आकर जनता को खुद संबोधित करते हुए बताते हैं कि किस तरह से उन्हें 2 गज दूरी बनाना है किस तरह से हर तरह से उन्हें गमछा या फिर किसी रुमाल या किसी मास्क का यूज करना है इससे यह संक्रमण में ना हम में आए और महमसे किसी दूसरे में फैले इसी संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि हमें व्यायाम करना चाहिए प्राणायाम करना चाहिए और हमें कुछ आयुर्वेद की जो हमारी दवाएं हैं या नुस्खे हैं उनका पालन करना चाहिए जैसे गर्म पानी पीना नाक और मुंह को धोना मगर उनकी यह बात बोलते ही हमारे बाजार में न जाने कितने तरह के काढ़े बाजार में आ गए और उन्होंने यह घोषित कर दिया कि उनके इस सेवन से हमारे इम्यूनिटी बहुत बढ़ जाएगी और हमें यह करो ना वायरस होगा ही नहीं जो की पूरी तरह गलत है कोई भी इम्यूनिटी बढ़ाने से करोना वायरस नहीं होगा यह कहना ठीक नहीं हमें इससे बचकर तो रहना ही पड़ेगा और जहां तक इम्यूनिटी बढ़ाने की बात है उसके लिए हमें यह महंगी महंगी दवा खाने का कोई जरूरत नहीं सिर्फ अगर हम संतुलित भोजन करें प्राणायाम करें अपने आप को साफ रखें हाथों को साफ रखें मास्क का उपयोग करें 2 गज दूरी बनाकर रखें तो देखेंगे कि हमें यह होगा ही नहीं इसके लिए महंगे कार्डो को पीने की जरूरत नहीं सिर्फ हम चाहे तो विटामिन सी या फिर नींबू संतरा मौसमी आंवला गिलोय का उपयोग कर सकते हैं पीएच को हाई रखने के लिए अनारस अदरक सोडा इत्यादि पी सकते हैं हमें महंगे महंगे यह प्रोडक्ट गिनने की जरूरत नहीं 2014 में जब मोदी जी पहली बार प्रधानमंत्री बन कर आए तो उन्होंने एक आयुष मंत्रालय का गठन किया उन पर आरोप यह भी लगा कि वह शायद यह बात इसलिए कर रहे हैं कि इससे भारत की पुरानी चिकित्सा पद्धति या फिर हिंदू संस्कृति को बल मिलेगा क्योंकि एक बात यह सत्य है कि आयुर्वेदिक औषधि है तो अच्छा परंतु इसका जो विकास हुआ वह आज के चिकित्सा मापदंडों के सामने खरा नहीं उतर पाया जिस तरह से आज की आधुनिक दवाओं का परीक्षण किया जाता है उस तरह से आयुर्वेदिक की दवाओं का परीक्षण नहीं होता बहुत सारी दवाएं सिर्फ कहने के नाम पर बेच दी जाती है हर दवा को अमेरिका का फूड और ड्रग एजेंसी या एफडीए या फिर उनका सीडीसी तब मानता है जब वह दवा पूरी तरह से कोई भी हानि मनुष्य को नहीं करती इसके लिए डबल ब्लाइंड रेंडमाइज्ड ट्रायल परीक्षण किए जाते हैं यानी जिस रोगी पर यह परीक्षण की जा रही है उस रोगी को भी पता नहीं होता कि उसको कोई दवा दी जा रही है या जो परीक्षण करता है उसको भी नहीं पता चलता वर्क इन रोगियों पर यह परीक्षण कर रहा है तीसरा ही कोई व्यक्ति इसके सही होने का पता लगाता है और काफी परीक्षण के बाद इसको मनुष्य पर लागू किया जाता है और फिर इसका जो फार्मूला होता है या जो पद्धति होती है वह सबके लिए एक होती है परंतु आयुर्वेदिक दवाओं में ऐसा नहीं यहां पर जैसे चमनप्राश है उसको अलग अलग कंपनी अलग अलग ढंग से बनाती है वह इसके अंदर डालने वाले तत्वों को भी अपने ढंग से बदल देते हैं और उसको पूरी तरह से बताते भी नहीं नहीं तो उन्हें डर है कि उनका नकल हो जाएगा और इसलिए उनकी कंपनी से कितना फायदा रोगी को मिल रहा है उतना दूसरा कंपनी से भी मिलेगा तो उनकी बिक्री कम जाएगी और वह पद्धति भी अलग-अलग बनाते हैं जो कि आज के मॉडर्न मेडिसिन को स्वीकार नहीं उसी तरह से जो परीक्षण भी किया जाता है बहुत कम लोगों पर होता है और जो परीक्षण करते हैं और जिन पर परीक्षण होता है उन्हें मालूम होता है कि हम यह दवा का परीक्षण कर रहे हैं इसलिए इससे निष्पक्ष हम ट्रायल नहीं कह सकते इसी बात को ध्यान रखते ही नहीं हमारे प्रधानमंत्री ने हमारे देश के यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के वाइस चेयरमैन श्री भूषण पटवर्धन जी को नामित किया है कि वह आयुष मंत्रालय के ड्रग मैन्युफैक्चरिंग विंग के साथ जुड़कर ऐसी प्रक्रिया बनाएं जिससे हमें निष्पक्ष अच्छी दवाओं का चयन कर सकें और वह दवा सिर्फ हमें हमारे देश में ख्याति नहीं दिलाए बल्कि विदेश में भी हमें सम्मान दिलाए क्योंकि ऐसा देखा जाता है कि आयुष मंत्रालय कि जो दवाई होती हैं वह इमरजेंसी में रोगी उसे व्यवहार नहीं करता सिर्फ उसे हम लंबे दौर के लिए व्यवहार करते हैं और विश्व के बाकी देश भी इस को नहीं मानते हैं इसलिए क्योंकि हम मानते हैं कि यह दवाई अच्छी हैं परंतु क्योंकि सारे दुनिया के लोग भी माने और सब लोग इसका अच्छी तरह से व्यवहार करें इसके लिए जरूरी है कि हम मारिए दवाएं चिकित्सा के मापदंड में सबसे खरी उतरें क्योंकि कोविड-19 के लिए ही लगभग 3000 दवाइयों को विभिन्न तरह के आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने पेटेंट पाने के लिए भारत सरकार से अनुमोदन किया परंतु यह सारी बातें हैं खोखली थी क्योंकि उन्होंने किसी कोविड-19 के पेशेंट को ठीक नहीं किया इसलिए सरकार ने कुछ दवाओं को परीक्षण करने के लिए अब कहां है और उस पर इसी तरह से लोगों पर ट्रायल लेकर निर्धारित किया जाएगा कि वह दवा वास्तव में काम कर रही हैं कि नहीं और अगर कर रही हैं तो उनके कारण कोई बुरा असर तो रोगी पर नहीं हो रहा है जब यह सिद्ध हो जाएगा और जैसे मॉडर्न मेडिसिन ओं को हम डबल ब्लाइंड रेंडम माइंड ट्रायल लेते हैं उसी तरह से इन दवाओं का भी परीक्षण करेंगे इसलिए आपको मैं यह कहना चाहता हूं कि आप इस तरह से बाजार में मिलने वाले गिलोय या फिर अदरक या हल्दी या फिर किसी दूसरे तत्व को नहीं सेवन करें बल्कि अपनी विरोधक क्षमता को खुद ही बढ़ाए

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