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25 years of Rangeela, Know some interesting facts of the movie | टपोरी के किरदार के लिए आमिर ने ली थी टपोरियों से ट्रेनिंग, बेस्ट हीरो का अवॉर्ड ना मिलने पर अवॉर्ड फंक्शंस में हमेशा के लिए जाना बंद कर दिया


10 मिनट पहले

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उर्मिला मातोंडकर और आमिर खान स्टारर रंगीला की रिलीज को 25 साल पूरे हो गए हैं। इसके डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा थे। यह फिल्म बॉलीवुड के लिए कई मायनों में बेहद खास साबित हुई थी। रिलीज के वक्त यूथ के बीच इसकी पॉपुलैरिटी चरम पर थी। फिल्म के गाने, स्टाइल, डायलॉग दर्शकों को बेहद पसंद आए थे।

क्या थी कहानी:

रंगीला एक ऐसी मध्यमवर्गीय लड़की मिली (उर्मिला) की कहानी है, जो अपने सपनों को साकार करना चाहती है और एक कामयाब एक्ट्रेस बनना चाहती है। वो चाहती है कि दुनिया के करोड़ों चेहरों में उसके चेहरे की एक अलग पहचान हो और फिल्म में उसका ख्वाब सुपरस्टार राज कमल (जैकी श्रॉफ) के जरिए पूरा होता है। इन सपनों को पूरा करने में उसका अपने दोस्त मुन्ना (आमिर खान) और पिछले जीवन से पीछा छूटता जाता है।

फिल्म से जुड़ी कुछ खास बातें…

  • फिल्म में आमिर खान टपोरी मुन्ना के किरदार में दिखे थे। इस किरदार में ढलने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की थी। कुछ कपड़े उन्होंने खुद के पहने थे तो कुछ दोस्तों से उधार लिए थे।
यह फिल्म हॉलीवुड मूवी विन ए डेट विद टैड हैमिल्टन से प्रेरित थी।

यह फिल्म हॉलीवुड मूवी विन ए डेट विद टैड हैमिल्टन से प्रेरित थी।

  • मुंबइया टपोरी के रोल के लिए आमिर ने स्लम्स में रहने वाले असली टपोरियों के साथ वक्त बिताया था और ट्रेनिंग ली थी ताकि उनकी डायलॉग डिलिवरी, बॉडी लैंग्वेज सही हो।
  • रंगीला ही वो फिल्म है जिसके बाद आमिर ने बॉलीवुड के अवॉर्ड फंक्शंस से दूरी बना ली थी। रंगीला के लिए उन्हें 1995 में फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन मिला था। इससे पहले उन्हें जो जीता वही सिकंदर(1992) और हम हैं राही प्यार के (1993) के लिए भी नॉमिनेट किया था लेकिन आमिर अवॉर्ड नहीं जीत पाए थे। रंगीला के लिए अवॉर्ड ना मिलने पर आमिर के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने अवॉर्ड समारोह में जाना बंद कर दिया।
रंगीला उर्मिला के लिए ब्रेकथ्रू फिल्म साबित हुई थी। इसके बाद ही वह बॉलीवुड में स्थापित हो गई थीं।

रंगीला उर्मिला के लिए ब्रेकथ्रू फिल्म साबित हुई थी। इसके बाद ही वह बॉलीवुड में स्थापित हो गई थीं।

  • इस फिल्म को 7 फिल्मफ़ेयर अवॉर्ड मिले थे। जैकी श्रॉफ को बेस्ट सपोर्टिंग रोल, अहमद खान को बेस्ट कोरियोग्राफी, मनीष मल्होत्रा को कॉस्टयूम डिजाइनिंग, राम गोपाल को बेस्ट स्टोरी और ए.आर. रहमान व आर. डी. बर्मन को बेस्ट म्यूजिक के लिए ये अवॉर्ड मिले। आशा भोसले को गाने तन्हा-तन्हा के लिए स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड मिला था।
  • फिल्म का टाइटल रंगीला मूल रूप से कैरेक्टर मुन्ना ‘आमिर खान’ पर बेस्ड था लेकिन सफलता का पूरा श्रेय उर्मिला की झोली में गया।
  • रामगोपाल वर्मा पहले श्रीदेवी को फिल्म में लेना चाहते थे और मनीषा कोइराला को भी लेने का विचार बना था लेकिन आखिरकार उर्मिला फिल्म के लिए फाइनल हुईं।
अहमद खान को तन्हा-तन्हा गाने के लिए बेस्ट कोरियोग्राफी का अवॉर्ड मिला था।

अहमद खान को तन्हा-तन्हा गाने के लिए बेस्ट कोरियोग्राफी का अवॉर्ड मिला था।

  • रामगोपाल वर्मा फिल्म में तन्हा-तन्हा गाने की कोरियोग्राफी के लिए सरोज खान से खुश नहीं थे, बाद में उन्होंने अहमद खान से गाने को कोरियोग्राफ करवाया।
  • फिल्म का गाना यारों सुन लो जरा मूल रूप से एक तेलुगू फिल्म सुपर के लिए कंपोज किया गया था, जिसके बोल दे बाबू लव चेयारा। यही गाना फिल्म के तमिल वर्जन में भी रिलीज हुआ था।
  • यह फिल्म ए.आर रहमान द्वारा कंपोज की गई पहली हिंदी फिल्म थी।
  • फिल्म के टाइटल ट्रैक रंगीला रे में उदित नारायण के बेटे आदित्य नारायण भी नजर आए थे। उस वक्त वह 8 साल के थे। इसके अलावा फिल्म में मधुर भंडारकर ने भी कैमियो किया था।

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