Fashion

मदद का कारगर तरीका: शारजाह का एक रेस्टोरेंट जरूरतमंदों को रोज दे रहा है मुफ्त खाना, बचा खाना फेंकने के बजाय गरीबों को देना मानते हैं खाने का सही इस्तेमाल करना


  • Hindi News
  • Women
  • Lifestyle
  • A Restaurant In Sharjah Gives Free Food To The Needy Daily, Instead Of Throwing Away The Leftovers, Giving It To The Poor Instead Of Using Food

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

2 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
  • अली ने अपने इस नेक काम के शुरुआती दिनों में शारजाह के भीड़ वाले इलाकों में खुद ही पैकेट देना शुरू किए
  • यहां काम करने वाला स्टाफ रात में कस्टमर के जाने के बाद किचन में बचा बाकी खाना पैक करके गरीबों में बांट देते हैं

दुबई के एक रेस्टोरेंट में काम करने वाले स्टाफ को रोजाना रात के समय जरूरतमंदों के लिए फूड पैकेट पैक करते हुए देखा जा सकता है। वे इन पैकेट्स में दाल, बिरयानी और चिकन करी पैक करते हैं। ये इंडियन रेस्टोरेंट शारजाह में स्थित है। जब रात में यहां स्थित आसपास के अन्य रेस्टोरेंट बंद हो जाते हैं तो भी यह बिरयानी स्पॉट गरीबों को खाना देने के लिए खुला रहता है।

यहां काम करने वाला स्टाफ रात में कस्टमर के जाने के बाद किचन में बचा बाकी खाना पैक करके गरीबों में बांट देते हैं। रात को दस बजे से पहले यहा आकर कोई भी जरूरतमंद इनसे ये खाना मुफ्त में ले सकता है। इस रेस्टोरेंट के मालिक मोहम्मद शुजात अली ने बताया कि कोरोना काल की वजह से ऐसे कई लोग हैं जो इस वक्त बेरोजगार हैं या कम सैलेरी में अपना घर चला रहे हैं। इन लोगों के पास खाने के लिए भी कुछ नहीं होता। ऐसे वक्त रेस्टोरेंट में बचा हुआ खाना फेंकने से अच्छा है कि उसे गरीबों में बांट दिया जाए।

इन दिनों शारजाह में कई लोगों के छोटे-मोटे काम बंद पड़े हैं। ऐसे में अली और उनकी बीवी ने जरूरतमंदों की मदद के लिए ये तरीका खोजा। ये रेस्टोरेंट खोलने से पहले अली मैकेनिकल इंजीनियर थे। वे दिनभर अपने रेस्टोरेंट के जरिये कम कीमत में अप्रवासी मजदूरों को भारतीय, बंगाली और पाकिस्तानी खाना मुहैया कराते हैं।

अली ने अपने इस नेक काम के शुरुआती दिनों में शारजाह के भीड़ वाले इलाकों में खुद ही पैकेट देना शुरू किए। वे टैक्सी स्टैंड से लेकर नाइट शिफ्ट में काम करने वाले गरीबों को ये पैकेट खुद ही जाकर बांटते थे। वे अपने इस काम को जरूरतमंदों के लिए किया गया एक छोटा सा योगदान मानते हैं। वे कहते हैं जिस तरह ये काम मैं कर रहा हूं, उस तरह से हर इंसान चाहे तो जरूरतमंदों की मदद अपने हिसाब से कर सकता है।

.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *