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महामारी में पैरेंटींग एक बड़ी चुनौती: अमेरिका में 10 लाख नौकरियां आईं, लेकिन मांओं के सामने चुनौती- काम पर जाएं या बच्चों की देखभाल करें


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वॉशिंगटन20 मिनट पहले

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बच्चों की देखभाल पर सालाना 15 लाख रुपए खर्च कर देते हैं अमेरिकी। - Dainik Bhaskar

बच्चों की देखभाल पर सालाना 15 लाख रुपए खर्च कर देते हैं अमेरिकी।

अमेरिका के पोर्टलैंड में रहने वाली 39 वर्षीय निकुलेस्कु करीब डेढ़ साल बाद काम पर जाने के लिए तैयार हैं। लेकिन एक बड़ा मुद्दा उनके काम में वापसी को जटिल बना रहा है। वह है, बच्चों की देखभाल करने वाले चाइल्ड केयर सेंटर जो उनके दो बच्चों की देखरेख कर सके। दरअसल, महामारी के दौर में अमेरिका के कई चाइल्ड केयर बंद हो गए।

कुछ चालू हैं, लेकिन वहां सीमित बच्चों को ही रखा जा रहा है। इस बीच मार्च-अप्रैल में 10 लाख नौकरियां भी गईं। लेकिन मांओं के सामने चुनौती सामने आई कि वे नौैकरी पर जाएं या बच्चों की देखभाल करें। क्योंकि कोरोना काल में नौकरी गंवा चुकी मांएं खुद ही बच्चों की देखभाल कर रही हैं।

इसे लेकर कुछ मांएं नौकरी पर ही नहीं जाना चाहतीं। कुछ मांएं ऐसी भी हैं, जो काम पर तो जाना चाहती हैं, लेकिन चाइल्ड केयर में जगह न मिल पाने के कारण वह बच्चों की देखभाल को ही प्राथमिकता दे रही हैं। ऐसे में अमेरिकी महिलाओं के सामने काम पर वापसी का संकट बढ़ गया है।

एक रिपोर्ट में बताया गया कि यदि महिलाएं काम पर नहीं लौटती हैं तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सालाना 60 बिलियन डॉलर (करीब 4.40 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान हो सकता है। हालांकि, इससे निपटने के लिए, चाइल्ड केयर और एजुकेशन को लेकर राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक योजना बनाई है, जो जल्द लागू हो सकती है।

मालूम हो, करीब 33 करोड़ की आबादी वाले अमेरिका में 66% पुरुष और 54.6% महिलाएं काम करती हैं। हर परिवार अपनी आय का एक तिहाई हिस्सा यानी औसत 21 हजार डॉलर तक (करीब 15 लाख रु.) बच्चों की देखभाल पर खर्च कर देता है।

20 लाख पैरेंट्स ने छोड़ दी थी जॉब
चाइल्ड केयर संगठन के अनुसार बच्चों की देखभाल का राष्ट्रीय औसत खर्च करीब 7 लाख रुपए है। जो कई देशों की तुलना में काफी महंगा है। वहीं, अमेरिकन प्रोग्रेस सेंटर के मुताबिक 2016 में 20 लाख पैरेंट्स ने बच्चों की जिम्मेदारी के चलते नौकरी ही छोड़ दी थी।

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