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लकवा मारने के बाद मुफलिसी में गुजरा इस अभिनेता का जीवन, आखिरी वक्त में बच्चों ने भी छोड़ दिया था साथ


एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: तान्या अरोड़ा Updated Fri, 25 Jun 2021 11:08 AM IST

बॉलीवुड में कई ऐसे सितारें हैं जिनकी जिंदगी परदे पर तो बहुत अच्छी रही है, लेकिन अपने असल जीवन में उन्हें बहुत ही कम खुशियां मिलीं। ऐसे कलाकार जिन्होंने परदे पर तो बहुत अच्छी फिल्में दीं, उन्हें प्यार देने वाले बहुत प्रशंसक थे। लेकिन असल जिंदगी में अपने परिवार के प्यार से वो बिलकुल वंचित रहे। इन्हीं कलाकारों में शामिल थे अभिनेता प्रदीप कुमार। 1952 में फिल्म ‘आनंद माथ’ से अपनी शुरुआत करने वाले प्रदीप कुमार ने हिंदी सिनेमा के अलावा बंगाली सिनेमा में भी खूब काम किया। इसके साथ ही उन्होंने अंग्रेजी भाषा वाली फिल्मों में भी काम किया।

17 साल की उम्र में अभिनय करने का लिया था निर्णय

प्रदीप कुमार का जन्म 19 जनवरी 1925 को कोलकाता में हुआ था। उन्हें बचपन से ही अभिनय का शौक था। 17 साल की कम उम्र में उन्होंने यह निर्णय ले लिया था कि वो अभिनय के क्षेत्र में अपना करियर बनाएंगे। एक बांग्ला नाटक में बांग्ला फिल्मों के निर्देशक ‘देवकी बोस’ ने उनके अभिनय को देखा और बहुत प्रभावित हुए। देवकी बोस ने अपनी फिल्म ‘अलकनंदा’ में बतौर नायक उन्हें अवसर दिया। हालांकि, वह फिल्म तो हिट नहीं हुई लेकिन उनकी भूमिका को दर्शकों ने नोटिस किया। बतौर नायक प्रदीप कुमार की दूसरी बांग्ला फिल्म “भूली नाय” ने सिल्वर जुबली मनाई। प्रदीप कुमार ने फिर हिन्दी फिल्मों की तरफ रुख किया और कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा

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