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साफ दिखने वाले टॉयलेट में भी हो सकते हैं वायरस: आपको होने वाले ज्यादातर इंफेक्शन की वजह गंदा बाथरूम हो सकता है, घर में मौजूद चीजों से टॉयलेट को करें बैक्टीरिया फ्री


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  • Dirty And Smelly Bathroom Can Be The Reason For Most Of The Infections You May Have, Make The Toilet Bacteria Free With Things Present In The House

18 मिनट पहले

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बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि अपनी बेटी का हाथ किसी के हाथ में सौंपने से पहले उसके घर का बाथरूम जरूर चेक करना चाहिए। क्योंकि जिनका बाथरूम साफ नहीं होता, ऐसे लोग व्यक्तिगत तौर पर अच्छे नहीं होते। अपने टॉयलेट या वॉशरूम को साफ-सुथरा और बैक्टीरिया फ्री रखना कोई परेशानी की बात नहीं बल्कि आपकी तहजीब का हिस्सा है।

टॉयलेट की सही तरीके से साफ-सफाई न सिर्फ आपके घर की हाइजीन बनाए रखती है बल्कि आपको कई बीमारियों से भी बचाती है। टॉयलेट को साफ करने के लिए लोग कई डिटर्जेंट, क्लीनर और एसिड का इस्तेमाल करते है और घंटों उसे चमकाने में लगा देते है, लेकिन इससे आपका टॉयलेट बैक्टीरिया फ्री नहीं होता।

टॉयलेट में हो सकते हैं ये बैक्टीरिया और वायरस
सीनियर माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. अपूर्व के. श्रीवास्तव कहते हैं कि टॉयलेट या वॉशरूम में सूक्ष्मजीव, बैक्टीरिया, वायरस ढेरों की मात्रा में होते हैं। इनमें स्टाफीलोकोकस, कैम्पिलोबैक्टर, एंटिरोकोकस, एस्केरेशिया कॉली, साल्‍मोनेला, शिगेला, स्‍ट्रीप्‍टोकोकस, येर्सिनिया जैसे बैक्टीरिया और पेपिलोमा वायरस, रोटावायरस, हेपेटाइटिस ‘ए’ और ‘ई’ जैसे वायरस शामिल हैं।

रिसर्च से पता चला है कि 25-54% तक मल आंत में मौजूद सूक्ष्म जीवों से बनता है। जेनेटिक टेस्‍ट करने वाली कई स्टडी ने मल के सैंपल में सार्स-कोव-2 (कोविड-19) वायरस पाया है। हालांकि अब तक यह पता नहीं चला है कि मल में मौजूद कोरोना वायरस कितना संक्रामक है।

टॉयलेट में बने एरोसोल किसी भी व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं
डॉ. अपूर्व के. श्रीवास्तव कहते हैं कि कुछ दूसरे वैज्ञानिकों का भी मानना है कि बाथरूम के कीटाणुओं की शुरुआत कमोड से होती है और फिर वे आसानी से पूरे बाथरूम में फैल जाते हैं, जैसे कि नल का हैंडल जिसे कमोड के बाद दूसरी सबसे गंदी जगह माना जाता है। कई रिसर्च और स्टडी में यह पाया गया है कि टॉयलेट को फ्लश करने से बनने वाली एरोसोल की बूंदें बैक्टीरिया और वायरस का ठिकाना बन जाती हैं। ये एरोसोल बाथरूम की फर्श या दिवार पर गिरती हैं। टॉयलेट में बने एरोसोल से किसी व्यक्ति का गंभीर रूप से संक्रमित हो जाना संभव है।

बाथरूम हाइजीन पर ध्यान देना जरूरी
डॉ. अपूर्व कहते हैं कि टॉयलेट या नहाने की जगह कीटाणुओं के प्रजनन का अड्डा बने, इससे पहले ही बाथरूम हाइजीन पर ध्यान देना जरूरी है। कमोड के साथ-साथ, वॉशरूम की दीवार, दरवाजे, बेसिन, बाथटब, नल और सभी हैंडल को बैक्टीरिया किलिंग सॉल्यूशन से साफ करना चाहिए।

टॉयलेट को ऐसे बनाएं बैक्टीरिया फ्री

डॉ. श्रीवास्तव कहते हैं कि टॉयलेट साफ करने वाली चीजें खरीदने में कोई हड़बड़ी नहीं करनी चाहिए। हमेशा ऐसे प्रोडक्ट चुनने चाहिए जो बदबू हटाएं, सफाई करें और साथ ही बैक्टीरिया-वायरस से भी मुक्ति दिलाएं। तो चलिए जानते हैं कुछ ऐसी चीजों के बारे में जो आसानी से टॉयलेट में कीटाणुओं की समस्या खत्म कर सकते हैं….

  • टॉयलेट की सफाई के लिए विनेगर का इस्तेमाल करना बेस्ट ऑप्शन है। इससे टॉयलेट में पैथोजन और बैक्टीरिया की संख्या इतनी कम हो जाती है कि उन्हें ढूंढ पाना भी मुश्किल हो जाता है। विनेगर टॉयलेट को दुर्गंध-मुक्त करने, टब/ग्‍लास, शॉवर और दरवाजे पर जमे पानी के दाग को हटाने में भी मदद करता है।
  • विनेगर आसानी से मिल सकता है और बैक्टीरिया, फंगस जैसे सूक्ष्मजीवों को मारने में प्रभावी है। विनेगर का इस्तेमाल ब्लीच के विकल्प के तौर पर भी किया जा सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल करते समय सावधानी भी रखनी चाहिए, क्योंकि यह सतह की चमक को हटाकर उसे फीका भी बना सकता है।
  • फफूंद के जिद्दी धब्बों को ब्लीच से धोया जा सकता है। इस सॉल्यूशन का इस्तेमाल टॉयलेट में कीटाणुओं को मारने, फर्श को सफेद करने और बदबू हटाने के लिए किया जा सकता है। लेकिन ब्लीच का इस्तेमाल करने से पहले कुछ सावधानियां रखनी जरूरी हैं। टॉयलेट को अच्छे क्लीनर और पानी से साफ करने के बाद संक्रमण-मुक्त करने के लिए ब्लीच और पानी का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
  • ब्लीच का इस्तेमाल हवादार जगह पर ही होना चाहिए, क्योंकि यह तेजी से भभकता है, जिससे आंखों में जलन हो सकती है और त्वचा को भी नुकसान हो सकता है।

ऐसे चुने टॉयलेट क्‍लीनर
टॉयलेट की सफाई के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं – दुर्गंध और वायरस/बैक्‍टीरिया। स्टडी में पता चला है कि टॉयलेट सीट पर फफूंद, यीस्ट और कीटाणु भारी मात्रा में होते हैं। जो यह बताते हैं कि लोग अपने टॉयलेट की साफ-सफाई पर ध्यान नहीं देते। इसके अलावा टॉयलेट की बदबू यह बताती है कि कीटाणुओं का पूरा सफाया नहीं हुआ है। टॉयलेट को संक्रमण-मुक्त करना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसलिए ऐसा प्रोडक्ट चुनें जो टॉयलेट के सफाई के दोनों पहलुओं से जुड़ा हो। यानी बदबू भी हटाए और वायरस/बैक्टीरिया भी। उदाहरण के लिए- फ्रेश गार्ड टेक्‍नोलॉजी वाला डोमेक्‍स। यह आम टॉयलेट क्‍लीनर से कहीं ज्‍यादा बेहतर है।

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