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पर्व और तीज-त्योहार: 17 सितंबर को सूर्य कन्या राशि में करेगा प्रवेश, पितरों की पूजा के लिए शुभ समय


10 मिनट पहले

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  • वेदों और उपनिषदों में कहा है सूर्य जब कन्या राशि में हो, तब श्राद्ध करने से सतुष्ट होते हैं पितर

17 सितंबर, शुक्रवार को सूर्य कन्या राशि में आ जाएगा और अगले महीने तक इसी राशि में रहेगा। फिर 17 अक्टूबर को तुला में जाएगा। इस दौरान सभी राशियों पर सूर्य का असर पड़ेगा। सूर्य के कन्या राशि में आने से इसे कन्या संक्रांति कहा जाएगा।

पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के मुताबिक सूर्य के शुभ असर के कारण मेष, कर्क और धनु राशि वाले लोगों के जॉब और बिजनेस में अच्छे बदलाव होने की संभावना है। इसके साथ ही आर्थिक स्थिति और सेहत के लिए भी अच्छा समय शुरू होगा। वहीं, वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ और मीन राशि वाले लोगों को संभलकर रहना होगा।

ज्योतिर्विज्ञान में सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। सूर्य के शुभ असर से सेहत संबंधी परेशानी दूर होती है। आत्मविश्वास बढ़ता है। सरकारी काम पूरे हो जाते हैं। जॉब और बिजनेस में तरक्की मिलती है। बड़े लोगों और अधिकारियों से मदद मिलती है और सम्मान भी बढ़ता है। वहीं सूर्य के अशुभ असर के कारण नौकरी और बिजनेस में रुकावटें आती हैं। नुकसान भी होता है। बड़े लोगों से विवाद हो सकता है। आंखों से संबंधित परेशानी होती है। सिरदर्द भी होता है। कामकाज में रुकावटें आती हैं। विवाद और तनाव भी रहता है।

सूर्य संक्रांति और विश्वकर्मा जयंती
पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार जिस दिन देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की ब्रह्माजी ने उत्पत्ति की, उस दिन कन्या संक्रांति थी। कन्या संक्रांति का योग सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश करने पर बनता है। हर साल यह दिन सूर्य की गति के अनुसार 17 सितंबर को ही पड़ता है। इसी दिन सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश होता है और देव शिल्पी की जयंती मनाई जाती है।

20 से पितृपक्ष शुरू
17 सितंबर को सूर्य के कन्या राशि में रहते हुए श्राद्ध पक्ष की शुरुआत हो जाएगी। इस बार पितरों की पूजा के लिए 16 नहीं बल्कि 17 दिन मिल रहे हैं। जो 20 सितंबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर तक रहेंगे। इनमें 6 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या रहेगी।

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