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पेरेंटिंग: मैथ्स के डर से कहीं आपके बच्चे को भी तो नहीं हो रही ये बीमारी, जानिए कैसे पाएं काबू


4 मिनट पहले

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  • कक्षा 7वीं से10वीं के बीच के करीब 82% छात्र मैथ्स से डरते हैं।
  • पेरेंट्स और स्कूल टीचर्स भी बच्चों के तनाव की वजह।

दो और दो चार तो सबको आसान लगता है, लेकिन जब बात कैलकुलस, ज्योमेट्री की हो तो क्या आपके बच्चे को भी मैथमेटिक्स से डर लगता है? इसी घबराहट के चलते गणित के सवालों को हल करने से बचना चाहते हैं? जैसे-तैसे इसमें पास हो पाते हैं? जाहिर है, बहुत से पेरेंट्स का उत्तर हां में ही होगा। ये एक ऐसा सब्जेक्ट है, जिसे कई बच्चे तो बेहद पसंद करते हैं। वहीं, कुछ इससे बेहद खौफ में रहते हैं। हाल ही में क्यूमैथ की रिपोर्ट में सामने आया है कि कक्षा 7वीं से10वीं के बीच के करीब 82% छात्र मैथ्स से डरते हैं। ये आंकड़ा बेहद खतरनाक है क्योंकि मैथ्स न सिर्फ एग्जाम के लिए बेस्ट स्कोरिंग का सब्जेक्ट है, बल्कि करियर संवारने के लिए भी मैथमेटिकल स्किल्स का होना जरूरी है। वहीं, सेंटर फॉर न्यूरोसाइंस इन एजुकेशन की स्टडी के मुताबिक ज्यादातर बच्चे मैथ्स की वजह से तनाव का शिकार हो रहे हैं। इसमें बताया गया कि पेरेंट्स और स्कूल टीचर्स उनके तनाव की वजह है। ये भी खुलासा हुआ कि बच्चे पहले से ही इस सब्जेक्ट को मुश्किल समझ लेते हैं। कम नंबर आने का डर उन्हें तनाव से उबरने नहीं देता। ऐसे में बच्चे मैथ्स एंग्जाइटी का शिकार हो रहे हैं।

क्या है मैथेफोबिया?
साल 1953 में “मैथेफोबिया” शब्द को मैथमेटिशियन मैरी डि लेलिस गफ ने बनाया। उनके स्टूडेंट्स मैथ्स से घबराते थे। उनकी मानें तो ये एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में पता लगने से पहले ही घातक हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार ये डर उसी समय से शुरू हो सकता है जब बच्चे की स्कूली शिक्षा की शुरुआत होती है। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में की गई एक स्टडी के अनुसार मैथ्स एंग्जाइटी लड़कियों में लड़कों से ज्यादा होती है। वहीं, इंग्लैंड के करीब 17 हजार स्टूडेंट्स पर की गई रिसर्च में बच्चों ने मैथ्स को दूसरे सब्जेक्ट्स से ज्यादा कठिन माना। खराब मार्क्स, दूसरों से तुलना से भी बच्चों का कॉन्फिडेंस कम होता है। अलग-अलग क्लास के बच्चों में एंग्जाइटी लेवल अलग पाया गया।
मैथ्स से डर की वजह

बच्चों के लिए मैथ्स रटना मुश्किल- जिन सब्जेक्ट को बच्चा समझ नहीं पाता है तो आसानी से रट लेता है। लेकिन मैथ्स में ऐसा नहीं कर सकते। वजह ये है कि किसी भी सवाल के हर स्टेप पर मैथ्स के सूत्रों को समझना जरूरी है। तभी आगे बढ़ सकते है। इसी वजह से हर स्टेप में उलझन होती है।

सिलेबस का बोझ- मैथ्स में कई नई ब्रांच शामिल होने से स्टूडेंट पर बोझ बढ़ता है। कई ऐसे टॉपिक भी होते है, जो बारहवीं क्लास में जाकर ही पढ़ाए जाते हैं।

ये टिप्स दूर कर देंगे मैथ्स का डर
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च बताती है कि टीनएज में गणित की पढ़ाई छोड़ना या दूरी बनाने का असर बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ सकता है। मैथ्स लड़कों को आसानी से आते हैं…मैथ्स सिर्फ इंटेलीजेंट के लिए है या मैथ्स हर किसी के लिए नहीं है… इस तरह की बातों से बच्चे के सेल्फ कॉन्फिडेंस पर काफी असर पड़ता है। इसी घबराहट के चलते ज्यादातर स्टूडेंट्स इस सब्जेक्ट को ठीक से नहीं पढ़ पाते है। दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान मैथ्स एक्सपर्ट मुकेश कुमार ने बताया कि बायोलॉजी, साइकोलॉजी, स्पोर्ट्स साइंस, इकोनॉमिक्स के अलावा तमाम क्षेत्रों में इंडस्ट्री की जरूरत को समझने और औद्योगिक रणनीति बनाने के लिए मैथ्स बेहद जरूरी है। अगर आपका बच्चा भी मैथ्स में दिलचस्पी नहीं ले रहा है तो इस दिमागी रूकावट से छुटकारा पाने के लिए चतुराई से काम लेना होगा। मैथ्स में रुचि पैदा करने के लिए कुछ जरूरी टिप्स फॉलो करें। इससे न सिर्फ आपके बच्चे का डर खत्म होगा, साथ ही वे इसमें एक्सपर्ट भी बन जाएंगे।

  • बच्चों को ये बात समझाना जरुरी है कि मैथ्स सबसे आसान सब्जेक्ट है। सबसे ज्यादा नबंर इसी सब्जेक्ट में मिल सकते है।
  • जब भी पढ़ने बैठे तो ध्यान रखें कि एकांत स्थान हों, जहां आसपास डिस्टरबेंस न हो।
  • शुरुआत में आसान सवालों को हल करें। स्टेप दर स्टेप आप कठिन सवालों को भी हल करने लगेंगे।
  • मैथ्स में बेसिक कॉन्सेप्ट्स क्लियर होना जरूरी है। स्टूडे्ंटस मैथ्स की बुनियादी बातों को समझने में ज्यादा ध्यान और समय दें।
  • इस सब्जेक्ट में रटने से काम नहीं बनने वाला। इसलिए जितनी ज्यादा प्रैक्टिस होगी, मैथ्स में पकड़ मजबूत बनेगी। सवाल हल करने की स्पीड भी बढ़ेगी।
  • अगर किसी चैप्टर को समझने में समस्या हो, तो उसे स्किप कर आगे न बढ़े। बल्कि उसी पर फोकस करें।
  • मैथ्स में फॉर्मूलों को सही से समझ कर ही सवालों को हल किया जा सकता है। इसलिए फॉर्मूले के आधार पर स्टडी करें।

मैथ्स में करियर बनाने के कई ऑप्शन

  • इकोनॉमिस्‍ट
  • सॉफ्टवेयर इंजीनियर
  • स्टैटिस्टिक्स
  • कम्प्यूटर सिस्टम एनालिस्ट
  • चार्टर्ड अकाउंटेंट
  • ऑपरेशन रिसर्च एनालिस्ट
  • बैंकिंग
  • मैथमेटिशियन

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