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इंस्टाग्राम हेल्थ चैलेंज: एल्गोरिदम ऐसा कि वीडियो और फोटो के जाल से निकल नहीं पाते बच्चे, हैशटैग्स से हो रहा फूड डिसऑर्डर


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न्यूयॉर्कएक घंटा पहले

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ऐरिजोना की एक मां ने बताया- कैसे उनकी दो बेटियों ने खाना ही बंद कर दिया। (फोटो -फेसबुक की पूर्व कर्मचारी फ्रांसिस होगेन ) - Dainik Bhaskar

ऐरिजोना की एक मां ने बताया- कैसे उनकी दो बेटियों ने खाना ही बंद कर दिया। (फोटो -फेसबुक की पूर्व कर्मचारी फ्रांसिस होगेन )

कोरोना काल के लॉकडाउन के दौरान एिरजोना में रहने वाली मिशेल ने पाया कि किशोरवय की उनकी दोनों बेटियां इंस्टाग्राम पर कुछ ज्यादा ही समय बिताने लगी हैं। शुरू में उन्होंने इसे बोरियत दूर करने का माध्यम माना था लेिकन बाद में उन्हें पता चला कि उनकी दोनों बेटियां इंस्टाग्राम के हैशटैग हेल्थ चैलेंज को खेल रही हैं। इसमें प्रो-डाइट, प्रो- एक्सरसाइज और प्रो-ईटिंग डिसॉर्डर की बातें होती हैं।

जैसे ही बच्चे इन हैशटैग्स पर जाते हैं तो वीडियो और फोटोज भरमार में आने लगते हैं। बच्चे इस जाल में फंसकर इन हैशटैग्स को फॉलो करने लगते हैं। मिशेल की बेटियों ने भी यही किया। केवल इंस्टाग्राम के इन वीडियो और फोटोज के कारण उन्होंने इसी हिसाब से अपनी डाइट को तय कर लिया। छह महीने के बाद दोनों बेटियों ने खाना बहुत कम कर दिया।

मिशेल की एक बेटी की हालत तो इतनी खराब हो गई कि उसे डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा। अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आई। उनकी बेटी को एनोरेक्सिया नामक बीमारी हो गई। इस बीमारी में मरीज अपने शरीर के प्रति बेहद सर्तक हो जाता है। मोटापे से बचने के लिए अकसर खाना बंद अथवा बहुत ही कम कर देते हैं। मिशेल की बेटियों के साथ भी ऐसा ही हुआ।

मिशेल का कहना है कि सोशल मीडिया विशेषकर इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ऐसे हैशटैग चलाए जाते हैं जिसके बारे में डॉक्टरों अथवा विशेषज्ञों की कोई राय नहीं होती है। ऐसे में बच्चे इन हैशटैग्स को अंधाधुंध तरीके से फॉलो करने लगते हैं। इन हैल्थ चैलेंज में अकसर लड़कियों को बहुत ज्यादा फिगर कॉन्शियस कर दिया जाता है।

किशोरवय की लड़कियां हेल्थ चैलेंज से फूड डिसार्डर का शिकार हो जाती हैं। इससे उनके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। मिशेल ने कहा किशोरवय के बच्चों के अिभभावकों को सलाह है कि वे सोशल मीडिया के हैल्थ चैलेंज से अपने बच्चों को दूर रखें।

फ्रांसिस ने चेताया था कि इंस्टाग्राम एल्गोरिदम पर रोक का सिस्टम नहीं
फेसबुक की पूर्व कर्मचारी फ्रांसिस होगेन ने अमेरिकी संसद में अपनी गवाही में बताया था कि फेसबुक और इंस्टाग्राम अपने एल्गोरिदम यानी यूजर्स की साइट विजिट करने के ट्रेंड से उन्हें उसी तरह के वीडियो और फोटो भेजते हैं जिन्हें वे एक या इससे अधिक बार देख चुके होते हैं।

इस्टाग्राम का बच्चों का एप भी इसी एल्गोरिदम पर काम करता है। बच्चों को किसी साइट विशेष अथवा हैशटैग का आदी बनाता है। फेसबुक ने इस एल्गोरिदम को रोकने के लिए कोई सिस्टम ही नहीं बनाया है। क्योंकि इससे फेसबुक कंपनी को मोटा मुनाफा होता है।

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