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निजी अस्पताल की मनमानी के जांच के आदेश: मौत के पांच घंटे तक शव न देने के प्रकरण में सीएमओ ने 2 सदस्यीय कमेटी की गठित, बयान दर्ज कराने पहुंचा अस्पताल संचालक


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  • Lucknow Private Hospital Became Emotionless In The Case Of Not Giving The Dead Body For Five Hours After The Death, The CMO Constituted A 2 member Committee, The Hospital Operator Reached To Record The Statement.

लखनऊ19 मिनट पहले

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लखनऊ में निजी अस्पताल की मनमानी पर CMO हुए सख्त, दिया जांच के आदेश - प्रतीकात्मक चित्र - Dainik Bhaskar

लखनऊ में निजी अस्पताल की मनमानी पर CMO हुए सख्त, दिया जांच के आदेश – प्रतीकात्मक चित्र

लखनऊ के निजी अस्पताल मनमानी पर उतारु रहते है। सरकारी नियम कानून का खुलेआम उल्लंघन भी करते है। हद तो तब हो जाती है जब मानवीय संवेदनाओं को तार-तार करके मरीजों के शव की आड़ में भी वसूली शुरु हो जाती है। तब कही जाकर सरकारी मशीनरी हरकत में आता है और फिर एक्शन मोड़ में आकर कार्रवाई की आस जगती है। ऐसा ही एक मामला कुछ दिन पहले लखनऊ में अधिकारियों के संज्ञान में आया। गुरुवार को लखनऊ सीएमओ ने प्रकरण में 2 सदस्यीय कमेटी गठित करके जांच के आदेश दिए है। हालांकि अभी एक्शन लिया जाना बाकी है पर पीडित परिजनों को उम्मीद है कि निजी अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई जरुर होगी।

मौत के 5 घंटे बाद भी परिजनों को शव लेने से कर रहे थे मना

दरअसल मामला पूरा निराला नगर के एएस हेल्थ सिटी हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर से जुड़ा है। यहां डेंगू मरीज की मौत के बाद पांच घंटे तक शव को रोके जाने मामला सामने आने पर में अब स्वास्थ्य विभाग भी एक्शन मोड में आता दिख रहा है। इस बीच सीएमओ कार्यालय ने अस्पताल को नोटिस जारी कर दी गई है। गुरुवार को अस्पताल कर्मी अपना बयान दर्ज कराने के लिए सीएमओ कार्यालय पहुंचे। वही सीएमओ लखनऊ डॉ. मनोज अग्रवाल के मुताबिक जांच की जा रही है और मामला सही निकलने पर अस्पताल को बंद किए जाने की संस्तुति की जाएगी।

क्या था प्रकरण

डेंगू से पीड़ित प्रतापगढ़ निवासी नीरज 21 को परिजन बीते शनिवार को KGMU लाए थे। वहां पर बेड खाली न होने पर एंबुलेंस चालक ने कमीशन के फेर में मरीज को AS हेल्थ सिटी हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर पहुंचा दिया था। वहां पर मरीज की गंभीर हालत बताते हुए डॉक्टरों ने वेंटिलेटर पर रखने को कहा और परिजनों को 68 हजार रुपये का बिल थमाते हुए पैसा जमा करने को कहा। इस बीच रविवार शाम करीब चार बजे मरीज की मौत हो गई। बिल अदा न होने पर डॉक्टरों ने शव देने से इन्कार कर दिया। करीब पांच घंटे के बाद भी अस्पताल संचालक ने शव नहीं दिया। बवाल बढ़ने पर अस्पताल ने शव परिजनों को सौंप दिया था। सीएमओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। इसमें डॉ. आरबी सिंह व डॉ. केडी मिश्रा को जांच सौंपी गई है। सीएमओ कार्यालय द्वारा जारी किए गए नोटिस बाद अस्पताल संचालक आलोक बयान दर्ज कराने सीएमओ कार्यालय पहुंचे थे। अस्पताल संचालक आलोक सिंह की दलील थी कि शव को रोका नहीं गया था। तीमारदार पोस्टमार्टम के लिए अड़े थे। जिस वजह से शव रोका गया था।

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