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उस रात आंख क्या लगी, मेरा नसीब सो गया: मुंबई हमले में घायल हुए पति का डायपर आज तक बदलती हैं बेबी चौधरी


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नई दिल्ली2 घंटे पहलेलेखक: निशा सिन्हा

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  • त्योहारों में बच्चों को कंधे पर बिठा कर घूमने वाला श्याम अब चारपाई से बिना सहारे के उठ नहीं पाता
  • इस इकलौते बेटे के सीने में बूढ़े मां-बाप काे कंधा नहीं दे पाने का दर्द आज भी दबा है

बेबी चाैधरी के पति श्याम सुंदर चौधरी 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे। एक मजबूत कदकाठी का 32 साल का जवान हमेशा के लिए दिव्यांग बन गया। वह खुद खा नहीं पाते, नहा नहीं पाते, बाथरूम नहीं जा पाते। कभी जिनके कंधे पर पूरे घर की जिम्मेदारी थी, आज वह एक छोटे बच्चे की तरह सबकी जिम्मेदारी बन गए हैं। उनकी पत्नी बेबी कहती हैं, “काश! मुझे टाइम मशीन मिल जाए, तो मैं उस भयानक रात के आने के पहले ही घड़ी की सूई को रोक दूं।”

यह पंक्ति किसी फिल्म की स्क्रिप्ट का दुखभरा डायलॉग नहीं है, बल्कि एक पत्नी के मुंह से निकला दर्द भरा सच है। श्याम वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर टैक्सी में हुए विस्फोट की चपेट में आ गए थे। उनके सिर, कंधे और हाथ में जबरदस्त चोट आई थी। कंधे की हडि्डयां दिखाई देने लगी थीं

‘हर रात खुद को कोसती हूं’
बेबी चाैधरी बताती हैं, ‘उस भयानक रात मेरे पति श्याम सुंदर चौधरी ने नाइट शिफ्ट के लिए अपने ऑफिस ‘पारले जी’ जाने की बात की, तो मैंने उनका हाथ पकड़कर कहा, ‘मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही, आज आप बच्चों का ख्याल रखो, ड्यूटी पर मत जाओ। मेरे बगल में ही मेरा 8 साल का बेटा और 4 साल की बेटी सोए थे। मेरी बात सुनने के बाद श्याम ड्यूटी जाने का इरादा छोड़ पास ही लेट गए। न जाने कब मेरी आंख लग गई।

पुरानी फोटो को श्याम से छिपा कर रखती है बेबी चौधरी ताकि यादें जख्म न कुरेद दें।

पुरानी फोटो को श्याम से छिपा कर रखती है बेबी चौधरी ताकि यादें जख्म न कुरेद दें।

पड़ोसन ने दरवाजा खटखटाया, तो आंख खुली। मैंने पूछा क्या हुआ, तो उसने कहा श्याम का पता करो, मैंने उसे ऑफिस की तरफ जाते देखा है। अभी बहुत तेज धमाके की आवाज आई है। मैंने बड़ी अचरज में कहा, वह तो अंदर लेटे हैं। मैं दौड़ कर अंदर गई। देखा श्याम बेड पर नहीं हैं। तब मेरे ससुर जी ने बताया कि श्याम का दोस्त आया था, और उसके कहने पर वह ऑफिस निकल गया। किसे पता था, उस रात श्याम के साथ घर की सभी खुशियां चली जाएंगी।’

श्याम की हालत ऐसी है कि वह पिछले दो साल से ही अपने बच्चों को पहचान पा रहे हैं।

श्याम की हालत ऐसी है कि वह पिछले दो साल से ही अपने बच्चों को पहचान पा रहे हैं।

डार्लिंग कहकर बुलाने वाला अब इशारों में बातें करता है
बेबी के पिता उनके जन्म के पहले ही मायानगरी मुंबई आ गए थे। छह भाई-बहनों में सबसे छोटी बेबी की शादी यूपी के श्याम से तय हुई, तो वह केवल 20 साल की थीं। एक आम हिंदुस्तानी शादीशुदा औरत के जीवन में जो चीजें होनी चाहिए वह सब कुछ बेबी के पास था। बेबी याद करते हुए कहती हैं, “सब एक फिल्म की कहानी जैसा था। मेरा पति अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। मेरे सास-ससुर दुनिया के सबसे अच्छे ससुराल वाले थे। भगवान ने मुझे एक बेटा और बेटी दिया। मेरे लिए एक सुखद वैवाहिक जीवन की यही परिभाषा थी।”

पापा के सामने हमेशा मुस्कुराते हैं बच्चे ताकि उनके जेहन में बुरी यादें न आएं।

पापा के सामने हमेशा मुस्कुराते हैं बच्चे ताकि उनके जेहन में बुरी यादें न आएं।

अपनी गम भरी बातें बताने के दौरान अचानक बेबी जोर से हंसते हुए कहती हैं कि एक बार मेरे बेटे ने अपने पापा को कहा था, आप मम्मी को बेबी-बेबी मत बुलाया करो, जब कभी ऑफिस जाओ मम्मी को मिट्‌ठी दो और डार्लिंग कहो। दोनों पति-पत्नी को यह सुनकर हंसी तो आई, लेकिन इसके बाद श्याम हमेशा बेबी को डार्लिंग ही बुलाया करते। लेकिन आज वही श्याम एक-एक शब्द बोलने के लिए मोहताज हैं। कहना तो बहुत कुछ चाहते हैं लेकिन बोल कुछ नहीं पाते। उनकी तसवीरों को मैं छिपा कर रखती हूं, क्योंकि उसे देखते ही उनके आंखों में आंसू भर जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे भर चुके जख्मों में एक साथ टीसें उठने लगी।

यह श्याम और बेबी के अच्छे दिनों की होली की तस्वीर है जब उनकी दुनिया आम लोगों की तरह थी।

यह श्याम और बेबी के अच्छे दिनों की होली की तस्वीर है जब उनकी दुनिया आम लोगों की तरह थी।

आखिरी बोल जो आज भी कानाें में गूंजते हैं
बेबी को याद है कि आखिरी बार उस काली रात को श्याम से बातचीत हुई थी, उनका दोस्त उन्हें हॉस्पिटल ले जा रहा था। श्याम ने फोन पर कहा था, ‘चिंता मत करना मैं जल्दी आ जाऊंगा।’ श्याम ने अपना वादा निभाया। वह लौट तो आए, लेकिन एक बेजान बुत की तरह। उस दिन के बाद उनकी दुनिया बेड तक ही सीमित रह गई। रोज डायपर बदलना, नहाना, कपड़े पहनाना, एक-एक निवाला मुंह में खिलाने जैसे काम बेबी का रूटीन बन गया। वह कहती हैं, “मैं आज तक हर रात यही सोचती हूं और खुद को कोसती हूं कि काश! उस रात मेरी आंख न लगी होती, मैं सोई न होती।”

पापा की परी आज बदलती है पापा का डायपर।

पापा की परी आज बदलती है पापा का डायपर।

लाशों के ढेर में ढूढ़ रही थी पति को
उस वक्ता का वाकया बताते हुए बेबी कहती हैं, ‘फोन पर श्याम बोल रहे थे कि बेबी जल्दी आओ मैं आखिरी बार तुम्हें देखना चाहता हूं। उन्हें लग रहा था कि वह नहीं बचेंगे। इसके बाद मैं तुरंत कूपर हॉस्पिटल की तरफ निकल पड़ी। हॉस्पिटल पहुंचने पर मैं पागलों की तरह लोगों से पूछ रही थी कि मेरे पति की उम्र 32 साल है, उनका नाम श्याम सुंदर चौधरी है। वह किस वार्ड में हैं? वहां चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। तभी किसी ने बताया कि श्याम सुंदर चौधरी की तो डेथ हो गई है।

मजबूती से परिवार के लिए खड़ा होने वाला अब सहारे को मोहताज है।

मजबूती से परिवार के लिए खड़ा होने वाला अब सहारे को मोहताज है।

किसी ने मुझे मुर्दाघर की तरफ इशारा करते हुए हुए कहा, वहां जाकर अपने पति काे ढूंढो। वहां ढेर सारी लाशें पड़ी थीं, मैं सोच ही नहीं पा रही थी कि किस-किस का चेहरा उठा कर देखूं। विस्फोट की जगह से क्षत-विक्षत अंगों को एकत्रित करके लाया गया था। मुझे उसमें अपने पति के शरीर के टुकड़े ढूंढने को कहा गया। मैं मलबे में पड़े अंगों को आंसू लिए आंखों से यह जांचने में लगी थी कि यह मेरे पति का हाथ या पैर तो नहीं। फिर मुझे पता चला मेरे पति डॉक्टर की निगरानी में हैं। एक डॉक्टर ने कहा, जाओ घटनास्थल से अपने पति की हड्‌डी ढूंढ कर लाओ। मैंने डॉक्टर से कहा, आपको समझ नहीं आता, आप एक पत्नी से किस तरह से बातें कर रहे हैं।

श्याम के लिए होली और दीवाली ही नहीं पूरी दुनिया एक बेड तक ही सिमट कर रह गई है।

श्याम के लिए होली और दीवाली ही नहीं पूरी दुनिया एक बेड तक ही सिमट कर रह गई है।

पटाखों की अवाज सुन कर डरने लगे
बेबी बताती हैं, “उस रात बहुत जोर का धमाका हुआ था। घटनास्थल से मेरा घर 10 से 15 मिनट की दूरी पर है। लेकिन वह धमाका इतना जोरदार था कि पूरा इलाका उसकी आवाज से हिल उठा था। आज भी दिवाली या दूसरे मौकों पर पटाखे छूटते हैं, तो श्याम कांप उठते हैं। इशारों से मुझे और बच्चे को बाहर जाने से मना करते हैं। उस रात कई लोग मारे गए। श्याम बच गए लेकिन तब से लेकर आज तक मैं उनको बेबस देख-देखकर हर पल मरती हूं।
बेटी ने बदला डायपर तो रो पड़े श्याम
कभी पूरे घर की जिम्मेदारी उठाने वाला आज अपनी ही हालत पर शर्मिंदा हो जाता है। कई बार मेरी बेटी ने भी अपने पापा का डायपर बदला, तो श्याम रो पड़े। मेरी बेटी ने उनके आंसू पोछते हुए कहा, आपने भी तो बचपन में मेरा डायपर बदला है पापा, आज आप मेरे बच्चे हो।” यह बातें मन को थोड़ी देर के लिए बहला देती हैं, लेकिन अपने पति की लाचारी मेरे लिए दुख का दरिया जैसा है।”

रोज रात में सोने से पहले श्याम को बेबी के साथ बैठकर बिग बॉस देखना पसंद है।

रोज रात में सोने से पहले श्याम को बेबी के साथ बैठकर बिग बॉस देखना पसंद है।

बिग बॉस देखने के बाद सोते हैं श्याम
बेबी बताती हैं, ‘मेरे बुरे दिनों में मेरी ननदों ने मेरा बहुत साथ दिया। वह आज भी मेरा साथ देती हैं। टाटा कंपनी की ओर से भी मेरे परिवार का खर्चा उठाया गया। मेरे बेटे को होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कराई गई। इलाज का खर्च भी उठाया गया। पिछले दो सालों से श्याम भी हम सबको पहचानने लगे हैं। इशारों में बहुत कुछ समझाने लगे हैं।
आजकल रोज रात को बिग बॉस देखने के बाद सोते हैं। मैं हमेशा खुश रहने की कोशिश करती हूं। पति के सामने हमेशा तैयार रहती हूं ताकि उन्हें लगे कि मैं खुश हूं, लेकिन हर दिन, हर पल मैं मरती हूं। अपने पति की बेबसी मुझे मारती हैं। मैं किसे दोष दूं, राजनेताओं को, आतंकवाद को या अपनी किस्मत को, कुछ समझ नहीं पाती।’

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