सबसे पहले कैलासा बैंड ने शिवोहम अर्थात मैं ही शिव हूं… की प्रस्तुति दी। 12 ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति और शिव-शक्ति के मिलन की कथा की आकर्षक प्रस्तुति से श्रोता झूम उठे। एलईडी स्क्रीन पर रुद्राभिषेक और काशी विश्वनाथ धाम में पूजा का सजीव प्रसारण देखकर लोग आस्था और अध्यात्म के रंग में रंगे नजर आए।
फिर गणेश वंदना वक्रतुंड महाकाय की नृत्य प्रस्तुति के बाद मुख्य यजमानों ने रुद्राभिषेक किया। शिव एआई स्टोरी में शिव का डमरू, ओम का रहस्य, समुद्र मंथन, नंदी, अमरनाथ यात्रा, त्रिशूल, नागेश्वर की प्रस्तुतियां हुई।
कैलाश खेर ने आदियोगी के भजनों के साथ मंच पर कदम रखा तो परिसर तालियों से गूंज उठा। क्रमशः मैं तो तेरे प्यार में दीवाना हो गया, आओ जी.. आओ जी, तौबा तौबा रे तेरी सूरत, तू जाने ना, सोई सोई सेज, पिया के रंग रंगदीनी ओढ़नी, कौन है वो कौन है कहां से वो आया, क्या कभी अंबर से सूर्य बिछड़ता है, प्रीत की लत मोहे ऐसी लगी आदि भजन और फिल्मी गीत सुनाकर लोगों को थिरकने पर विवश कर दिया।
महादेव की नगरी है बरेली, सनातन संस्कृति से जुड़ने का आह्वान
दर्शकों से रूबरू कैलाश खेर ने कहा कि बरेली की पहचान दशकों पहले झुमका गिरा रे गीत से हुई, लेकिन यहां के नाथ मंदिर सदियों पुराने हैं। इसे नाथ नगरी नहीं, बल्कि महादेव नगरी के नाम से पुकारा जाना चाहिए। हजारों लोगों की मौजूदगी इसका प्रमाण है कि बरेली वाले जाग गए हैं। जो नहीं जागे हैं, उनसे सनातन संस्कृति की ओर लौटने का आह्वान किया।












