अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर को:  गणेश जी के साथ ही शनि देव की भी करें पूजा, पूजा के बाद घर पर ही करें भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन
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अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर को: गणेश जी के साथ ही शनि देव की भी करें पूजा, पूजा के बाद घर पर ही करें भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन

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4 घंटे पहले

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अनंत चतुर्दशी, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि, इस वर्ष 6 सितंबर, शनिवार को आ रही है। ये दिन गणेश उत्सव के समापन का प्रतीक है। गणपति बाप्पा के स्वागत, सेवा और पूजा के बाद, अनंत चतुर्दशी पर उनकी प्रतिमा का विसर्जन कर विदाई दी जाती है। हालांकि, पर्यावरण संरक्षण के बढ़ते महत्व को देखते हुए घर में ही भगवान की प्रतिमा का प्रतीकात्मक विसर्जन करना श्रेष्ठ है।

अनंत चतुर्दशी शनिवार को है, इसलिए इस तिथि पर भगवान गणेश और शनि देव की विशेष पूजा करनी चाहिए। इनके साथ ही भगवान शिव, मां पार्वती, भगवान विष्णु और हनुमान जी की भी पूजा करेंगे तो बहुत शुभ रहेगा।

गणेश प्रतिमा का विसर्जन: घर में ही करें प्रतीकात्मक विदाई

उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, गणेश प्रतिमा का विसर्जन घर में ही करना अधिक श्रेष्ठ है। इसके लिए एक साफ बर्तन में पानी भर लें और उसी में गणेश प्रतिमा का विसर्जन करें। जब प्रतिमा पूरी तरह गल जाए, तो उस मिट्टी और पानी को घर के किसी गमले में डाल दें। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए लाभदायक है, बल्कि ये धार्मिक रूप से भी उचित माना गया है। इस तरह भगवान गणेश की प्रतीकात्मक विदाई होती हैं, लेकिन भगवान सदैव अपने भक्तों के साथ उनके घरों में वास करते हैं।

शास्त्रों में उल्लेख है कि पवित्र नदियों और तालाबों को गंदा नहीं करना चाहिए। इसलिए घर पर विसर्जन करना श्रेष्ठ है।

गणेश पूजा में ध्यान रखें ये बातें

  • गणेश जी को दूर्वा की 21 गांठें चढ़ानी चाहिए।
  • पूजा के अंत में भगवान से पूरे गणेश उत्सव के दौरान हुई जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना अवश्य करें।
  • गणेश जी के 6 खास मंत्रों का जप कम से कम 108 बार करें:
  • ऊँ मोदाय नमः, ऊँ प्रमोदाय नमः, ऊँ सुमुखाय नमः, ऊँ दुर्मुखाय नमः, ऊँ अविध्यनाय नमः, ऊँ विघ्नकरत्ते नमः,
  • अनंत चतुर्दशी पर गणपति पूजा में इस मंत्र का भी जप करें- वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
  • ये मंत्र सभी कार्यों में सफलता और विघ्नों को दूर करने वाला माना जाता है।

शनिवार को शनि देव की पूजा क्यों करते हैं?

  • इस बार अनंत चतुर्दशी शनिवार को पड़ रही है, इसलिए इस दिन शनि देव की भी पूजा करना अत्यंत शुभ फलदायक रहेगा। शनि देव न्याय के देवता माने जाते हैं और उनका आशीर्वाद मिलने से जीवन में संतुलन और न्याय बना रहता है। ज्योतिष में शनिवार का कारक ग्रह शनि को माना जाता है। इसलिए हर शनिवार शनि देव की पूजा की जाती है।
  • शनि देव की पूजा काले तिल, सरसों का तेल, नीले फूल और काले वस्त्र अर्पित कर की जाती है। ऊँ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जप करें। इस दिन गरीबों को दान देना विशेष पुण्यदायक होता है।
  • शनिवार को हनुमान जी की भी पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने से कुंडली के शनि दोषों का असर शांत होता है। हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। बिल्व पत्र, आंकड़े के फूल, काले तिल, चंदन आदि चीजें चढ़ाएं और धूप-दीप जलाकर आरती करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। आप चाहें तो राम नाम का जप भी कर सकते हैं।
  • अनंत चतुर्दशी पर दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। इस दिन आप भोजन, वस्त्र, कंबल, जूते-चप्पल, किताबें, स्टेशनरी, अनाज और धन का कर सकते हैं।

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