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माघ मेला प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच 10 दिन से विवाद चल रहा है। कम या खत्म होने की बजाय मामला बढ़ता जा रहा। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा-आज की लड़ाई हिंदू-मुसलमान या अंग्रेज-भारतीय की नहीं, नकली हिंदू और असली हिंदू के बीच है। उन्होंने पीसीएस अफसर के इस्तीफे के बाद फोन पर बात की। शंकराचार्य ने कहा- आपने जिस तरह सनातन धर्म के प्रति, सनातन प्रतीकों के प्रति अपनी निष्ठा का प्रदर्शन किया, उससे पूरा सनातनी समाज आह्लादित है। हम चाहते हैं कि आप जैसे निष्ठावान लोग आगे आएं।
वहीं जबलपुर के नर्मदा जन्मोत्सव में द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा- 3 शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं। प्रशासन उनका सर्टिफिकेट मांगने वाला कौन होता है? उसे कोई अधिकार नहीं। प्रशासन ने निर्दोष ब्राह्मणों के साथ जो निर्दयता से मारपीट की, वह बेहद निंदनीय है। अब तक क्या हुआ, जानिए- 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने को कहा। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। मारपीट की गई। पुलिस उनकी पालकी खींचकर दूर ले गई। इसके बाद वे शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने दो नोटिस दिए। पहले में शंकराचार्य की पदवी लिखने पर और दूसरे में मौनी अमावस्या के दिन हंगामा करने पर सवाल पूछे। चेतावनी दी गई कि माघ मेले से बैन किया जा सकता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिसों का जवाब दिया। 24 जनवरी की रात उनके शिविर में कट्टर सनातनी सेना के 8-10 युवक नारे लगाते पहुंचे और घुसने की कोशिश की। ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ और ‘योगी जिंदाबाद’ के नारे लगाए। शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इस पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- जितना जुल्म होगा, उतनी मजबूती से कदम उठाऊंगा। शंकराचार्य विवाद और माघ मेले से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
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