प्रदेश में नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत नए सत्र 2026-27 में निजी स्कूलों में गरीब छात्रों को प्रवेश के और ज्यादा अवसर मिलेंगे। पिछले साल की अपेक्षा आरटीई में निजी स्कूलों की संख्या 5000 और सीटों की संख्या 50 हजार तक बढ़ जाएंगी। वहीं किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए आधार अनिवार्य भी किया गया है।
प्रदेश में आरटीई के तहत नए सत्र में प्रवेश के लिए प्रक्रिया आखिरी चरण में है। इसके तहत निर्धारित पोर्टल पर सूचनाओं आदि को अपग्रेड करने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जल्द ही प्रवेश के लिए विस्तृत कार्यक्रम भी जारी करने की तैयारी है। इसके तहत पिछले साल जहां मैप स्कूलों की संख्या 62 हजार थी।
वहीं नए सत्र में इनकी संख्या पांच हजार बढ़कर 67 हजार हो गई है। इन सभी में 25 फीसदी सीटें आरटीई के तहत आरक्षित रहेंगी। इस तरह पिछले साल की अपेक्षा इस साल 50 हजार और सीटें बढ़ जाएंगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को पढ़ाई के लिए और बेहतर विकल्प मिलेंगे। विभाग ने जिलों में भी अधिकारियों को इसके लिए व्यापक प्रसार-प्रसार व आवश्यक तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि पोर्टल के अपग्रेडेशन की प्रक्रिया आखिरी चरण में है। जल्द ही प्रवेश का विस्तृत कार्यक्रम भी जारी कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि आरटीई में प्रवेश के लिए बच्चों या उनके अभिभावक का आधार अनिवार्य होगा। इसके माध्यम से ही सभी आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसलिए अभिभावक, जिनके पास आधार नहीं है, वे इसे अनिवार्य रूप से तैयार करवा लें। ताकि आगे उन्हें किसी तरह की दिक्कत न हो।








