इंस्पायरिंग:  सीखना कभी रुकता नहीं, न ही थकाता है, बस उसका तरीका बदलता जाता है – दीपिका पादुकोण
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इंस्पायरिंग: सीखना कभी रुकता नहीं, न ही थकाता है, बस उसका तरीका बदलता जाता है – दीपिका पादुकोण

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प्रोड्यूसर-एक्टर दीपिका पादुकोण इन दिनों अपने नए इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स के कारण चर्चा में हैं। सफलता से साथ उनकी सोच का बदलना, उन्हीं की जुबानी… मैं जब पीछे मुड़कर देखती हूं, तो लगता है काफी अनजान थी। मुझे यह तो पता था कि कहां पहुंचना है, क्या करना है, लेकिन यह नहीं पता था कि वहां तक पहुंचूंगी कैसे? चाहे पहली बार रैंप पर चलना हो या किसी फिल्म सेट पर खड़े होना… हर दिन मैं सीख रही थी। तब सीखना बिल्कुल अलग था। तब यह जानना जरूरी था कि इंडस्ट्री कैसे काम करती है, क्राफ्ट क्या है, मीडियम क्या है। आज भी मैं सीख रही हूं, लेकिन सीखने का मतलब बदल गया है। अब सीखना है कि और बेहतर कैसे बनूं, चीजों को अलग ढंग से कैसे करूं। सीखना कभी रुकता नहीं, बस उसका रूप बदल जाता है।
आज मैं खुद को कहीं ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस करती हूं। उस उम्र में अपने आप पर बहुत शक होता है कि क्या मैं सही कर रही हूं, लोग क्या सोचेंगे, मैं यहां फिट हूं या नहीं। आज वह शोर कम हो गया है। अब यह साफ है कि मैं कौन हूं और क्या करना चाहती हूं। यह साफ समझ मेरे लिए बहुत बड़ी ताकत है। सब कुछ तेजी से हुआ। तकनीकी रूप से मैंने केवल दो साल मॉडलिंग की और उसी दौरान फिल्म इंडस्ट्री से ऑफर आने लगे थे। लेकिन उन दो सालों में मैंने बहुत कुछ किया… रनवे, प्रिंट, टेलीविजन, कमर्शियल। शायद इसीलिए आज भी लोग मुझे एक मॉडल के तौर पर याद करते हैं। मुझे खुद यह समझने का वक्त नहीं मिला कि कब मैं एक फिल्म सेट पर पहुंच गई। सब कुछ सही समय पर हुआ। मैंने उस दौर को ठीक से संभाला। उन दो सालों में भी कई प्रोड्यूसर और डायरेक्टर फिल्मों के लिए मेरे पीछे थे। लेकिन मैं तैयार नहीं थी। मैं ग्लैमर और शो बिजनेस की दुनिया में नई थी और मुझे लगा कि पहले थोड़ा ठहरना जरूरी है। फिल्में तुरंत हो सकती थीं, लेकिन मैं विनम्रता से कहती कि मैं अभी तैयार नहीं हूं। अगर मेरी जिंदगी में कोई एक चीज नॉन-नेगोशिएबल है, तो वह है सच्चाई। जो चीज मुझे सच्ची नहीं लगती, वह मेरे लिए नहीं है। कई बार लोग बहुत पैसा ऑफर करते हैं और सोचते हैं कि बस वही काफी है। ऐसा नहीं है। कुछ प्रोजेक्ट्स शायद कमर्शियल तौर पर बड़े न हों, लेकिन अगर मुझे भरोसा है, तो मैं साथ खड़ी रहती हूं। आज मैं उस स्पष्टता तक पहुंच चुकी हूं। मैं पीछे देखकर सोचती हूं कि मैं क्या सोच रही थी? यह भी सीखने का हिस्सा है। हो सकता है दस साल बाद मैं आज के कुछ फैसलों पर सवाल उठाऊं। हम जो हैं, उस पर गर्व करना जरूरी है। अपनी जड़ें, अपनी संस्कृति, अपनी विरासत को अपनाना… बेहद अहम है। उम्र के साथ सफलता के मायने भी बदल जाते हैं
जब हम बहुत युवा होते हैं, तो सफलता का मतलब सिर्फ नाम और पैसा होता है। हम दूसरों की लाइफस्टाइल देखते हैं और सोचते हैं, यही सफलता है। लेकिन उम्र के साथ यह परिभाषा बदल जाती है। आज मेरे लिए सफलता शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य है। समय हमारी सबसे बड़ी पूंजी है कि मैं अपना समय कैसे बिताती हूं, किसके साथ बिताती हूं और यह आजादी कि मैं खुद तय कर सकूं। मेरे लिए यही असली सफलता है।
(तमाम इंटरव्यू में)



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