इलॉन मस्क की AI कंपनी चांद पर फैक्ट्री लगाएगी:  इससे सूर्य की ऊर्जा कैप्चर होगी; मस्क बोले- ये शायद इंसानों को एलियन से मिला सके
ऑटो-ट्रांसपोर्ट

इलॉन मस्क की AI कंपनी चांद पर फैक्ट्री लगाएगी: इससे सूर्य की ऊर्जा कैप्चर होगी; मस्क बोले- ये शायद इंसानों को एलियन से मिला सके

Spread the love




दुनिया के सबसे अमीर इंसान इलॉन मस्क चांद पर AI सैटेलाइट फैक्ट्री लगाएंगे। मस्क ने बताया कि वे इसके जरिए सूरज की ऊर्जा कैप्चर करना चाहते हैं। मस्क ने अपनी AI कंपनी XAI की इंटरनल मीटिंग का 45 मिनट का वीडियो पोस्ट किया, जिसमें ये जानकारी सामने आई है। इलॉन मस्क की मीटिंग से जुड़ी 8 बड़ी बातें… 1. सूरज की ऊर्जा का इस्तेमाल मस्क ने कहा अगर हम आज की मानव सभ्यता की ऊर्जा खपत को देखें, तो हम पृथ्वी की संभावित ऊर्जा का केवल 1% हिस्सा ही इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर हम सूरज की कुल ऊर्जा का 10 लाखवां हिस्सा भी हासिल कर लें, तो वह आज की सभ्यता द्वारा उपयोग की जाने वाली ऊर्जा से करीब 10 लाख गुना ज्यादा होगी। सूरज हमारे सौर मंडल के कुल द्रव्यमान का 99.8% है। अगर हमें सूरज की ऊर्जा का सही इस्तेमाल करना है, तो हमें पृथ्वी की सीमा से बाहर निकलना ही होगा। ‘मास ड्राइवर’ से डीप स्पेस में चांद से लॉन्च होंगे सैटेलाइट्स हमारा अगला कदम ‘अर्थ ऑर्बिटल डेटा सेंटर्स’ है। हम स्पेसएक्स की मदद से हर साल 100 से 200 गीगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर्स अंतरिक्ष में लॉन्च करेंगे। उन्होंने कहा अगर हमें 1 टेरावॉट से भी आगे जाना है, तो चांद पर जाना होगा। मस्क ने बताया वे चांद पर ऐसी फैक्ट्रियां बनाएंगे जो एआई सैटेलाइट्स तैयार करेंगी। वहां एक ‘मास ड्राइवर’ भी लगाया जाएगा। यह चांद से एआई सैटेलाइट्स को सीधे डीप स्पेस में लॉन्च करेगा। इससे हम सूरज की ऊर्जा के कुछ प्रतिशत हिस्से तक पहुंच पाएंगे। पूरे सौर मंडल में कहीं भी इंसानी बस्तियां बसा सकेंगे मस्क का विजन असल में ‘डाइसन स्फीयर’ के कॉन्सेप्ट पर आधारित है। यह एक ऐसा विशाल ढांचा होता है जो ऊर्जा को कैप्चर करने के लिए पूरे सूरज को चारों तरफ से ढक लेता है। मस्क चांद पर ‘मास ड्राइवर’ के जरिए जो एआई सैटेलाइट्स भेजेंगे, वे धीरे-धीरे सूरज के चारों ओर ऐसा ही एक जाल या घेरा बनाएंगे। इससे हमारे पास इतनी बिजली होगी कि हम पूरे सौर मंडल में कहीं भी इंसानी बस्तियां बसा सकेंगे और बड़े से बड़े स्पेसशिप चला सकेंगे। 2. फाउंडिंग टीम के 12 मेंबर्स में से 6 को निकाला मीटिंग में मस्क ने बताया कि कंपनी से कई पुराने कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया है। इसमें कंपनी की शुरुआत करने वाली फाउंडिंग टीम के सदस्य भी शामिल हैं। xAI की शुरुआत करने वाले 12 मुख्य सदस्यों में से अब केवल आधे ही मस्क के साथ बचे हैं। मस्क ने इसे कंपनी के ‘ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर’ में बदलाव का नाम दिया है। 3. चार टीमों में बंटी xAI, ‘मैक्रोहार्ड’ प्रोजेक्ट सबसे खास यह प्रोजेक्ट सिर्फ साधारण सॉफ्टवेयर नहीं बनाएगा, बल्कि पूरी की पूरी कंपनियों का ‘डिजिटल सिमुलेशन’ तैयार करेगा। इसका मतलब है कि एआई एक कंपनी के हर विभाग, सप्लाई चेन और बिजनेस फैसलों का एक कंप्यूटर मॉडल बना देगा। इससे किसी भी बड़े फैसले को असल में लागू करने से पहले एआई पर टेस्ट किया जा सकेगा कि उसका नतीजा क्या होगा। मैक्रोहार्ड का एक बड़ा लक्ष्य एआई के जरिए जटिल मशीनों को डिजाइन करना है। यह एआई इतना एडवांस होगा कि खुद ही रॉकेट के इंजन और उनके पार्ट्स के डिजाइन तैयार करेगा, जिससे इंसानी गलती की गुंजाइश खत्म हो जाएगी और काम की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी। 4. इंसानों की जगह सॉफ्टवेयर खुद लिखेगा पूरा प्रोग्राम अब AI मॉडल्स किसी भी समस्या को एक अनुभवी इंजीनियर की तरह समझते हैं। अगर प्रोग्राम में कोई गलती आती है, तो वे उसे ढूंढकर खुद ही ठीक भी कर सकते हैं। मस्क ने कहा कि इस साल के अंत तक शायद कोडिंग लिखने की जरूरत ही न पड़े। AI सीधे ‘बाइनरी’ (कंप्यूटर की अपनी भाषा यानी 0 और 1) में फाइलें बना देगा। यह काम किसी भी इंसानी प्रोग्रामर या मौजूदा सॉफ्टवेयर (कंपाइलर) से कहीं ज्यादा बेहतर और तेज होगा। मस्क का दावा है कि अगले 2-3 महीनों में उनका ‘ग्रोक कोड’ दुनिया का सबसे बेहतरीन कोडिंग मॉडल बन जाएगा, जो चुटकियों में जटिल से जटिल सॉफ्टवेयर तैयार कर देगा। 5. AI बना पाएगा 20 मिनट तक लंबे वीडियो XAI की इमेजिन टीम साल के अंत तक ऐसे मॉडल्स लाएगी जो एक बार में 10 से 20 मिनट के लंबे वीडियो बना सकेंगे। इसमें किसी मानवीय दखल की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। 6. ‘मेम्फिस क्लस्टर’ धरती का सबसे बड़ा सुपरकंप्यूटर मस्क के पास दुनिया का सबसे बड़ा GPU क्लस्टर है। ये 24 घंटे बिना रुके काम करता है। इसका मुख्य काम AI चैटबॉट ‘ग्रोक’ के अगले और एडवांस वर्जन को ट्रेनिंग देना है। यहां हजारों ऑपरेटिंग सिस्टम एक साथ मिलकर विशाल दिमाग की तरह काम कर रहे हैं। मस्क की टीम ने इस प्रोजेक्ट के बारे में बताया कि डेटा सेंटर का एक बड़ा हिस्सा मात्र 6 हफ्ते में तैयार किया गया है। हॉल के अंदर 1363 किलोमीटर लंबी फाइबर केबल बिछाई गई है। पूरा क्लस्टर तैयार होने पर यह 1 गीगावाट से ज्यादा बिजली खर्च करेगा। 7. छत पर लिखवाया ‘मैक्रो हार्ड’ मस्क ने अपनी सफलता का मंत्र ‘कंप्यूट एडवांटेज’ (ज्यादा से ज्यादा मशीनी ताकत) को बताया। एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग ने भी माना कि मस्क जितनी तेजी से एआई इंफ्रास्ट्रक्चर दुनिया में कोई नहीं बना सकता। मस्क ने डेटा सेंटर की छत पर ‘Macro Hard’ (माइक्रोसॉफ्ट के नाम पर तंज) लिखवाया है। 8. ग्रोक वॉइस और ‘एवरीथिंग एप’ का विजन वॉइस टीम ने बताया कि सितंबर 2024 तक उनके पास कोई वॉइस मॉडल नहीं था, लेकिन सिर्फ 6 महीने में उन्होंने स्क्रैच से ऐसा मॉडल बनाया जो ओपन एआई को टक्कर दे रहा है। उनका लक्ष्य इसे सिर्फ सवाल-जवाब तक सीमित न रखकर एक ‘एवरीथिंग एप’ बनाना है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *