केजरीवाल के किराए के वादे पर हाईकोर्ट ने आदेश पलटा:  कहा- मीडिया में दिया बयान लागू करवाने लायक नहीं; अब मौजूदा सरकार तय करे
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केजरीवाल के किराए के वादे पर हाईकोर्ट ने आदेश पलटा: कहा- मीडिया में दिया बयान लागू करवाने लायक नहीं; अब मौजूदा सरकार तय करे

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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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अरविंद केजरीवाल अपने तीसरे कार्यकाल में सितंबर 2024 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे। - Dainik Bhaskar

अरविंद केजरीवाल अपने तीसरे कार्यकाल में सितंबर 2024 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2021 के एक सिंगल जज के आदेश को पलट दिया है। उस आदेश में कहा गया था कि COVID-19 लॉकडाउन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गरीबों के किराए का भुगतान करने की घोषणा कानूनी तौर पर लागू करने लायक थी।

जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयान को कानूनी वादा नहीं माना जा सकता, जिसे अदालतें लागू करवा सकें।

दरअसल, कोरोना लॉकडाउन के समय अरविंद केजरीवाल ने 29 मार्च 2020 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने मकान मालिकों से कहा कि वे गरीब और निर्धन किराएदारों से किराए न मांगें।

इसके बाद 5 दिहाड़ी मजदूर कोर्ट पहुंचे। उन्होंने याचिका में दावा किया था कि केजरीवाल सरकार ने लॉकडाउन में किराया न दे पाने वालों का किराया भरने का वादा किया था।

जुलाई 2021 में सिंगल जज बेंच ने केजरीवाल सरकार से इसे लागू न करने का कारण पूछा। जिसके खिलाफ वे हाईकोर्ट पहुंची थी।

डिवीजन बेंच ने सितंबर 2021 को सिंगल-जज के आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसे आज खारिज कर दिया।

कोर्ट का आदेश 3 पॉइंट्स में…

  • 29 मार्च 2020 को मुख्यमंत्री की घोषणा को लागू करने की मांग कानून की नजर में सही नहीं है, और इसलिए इसे खारिज किया जाता है।
  • यह वादा किसी भी सरकारी आदेश का हिस्सा नहीं था, यहां तक कि उसी दिन जारी किए गए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के आदेश का भी नहीं। इस आदेश को कभी चुनौती भी नहीं दी गई थी।
  • हालांकि मकान मालिक प्रवासी किराएदारों से उस समय का किराया नहीं मांग सकते, जब वे COVID-19 लॉकडाउन के कारण अपने किराए के घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। यह राहत सिर्फ लॉकडाउन के लिए है, और उसके बाद लागू नहीं होगी।

हाईकोर्ट बोला- दिल्ली सरकार फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि दिल्ली सरकार इस बारे में कोई भी नीतिगत फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है। वह चाहे तो किराया देकर मजदूरों की मदद करे या न करे। लेकिन अदालत सरकार को ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि ऐसे वादे के खर्च और जनता पर असर को लेकर कुछ भी साफ नहीं है, और ऐसा लगता है कि यह बयान किसी इमरजेंसी में दिया गया था।

सिंगल जज बेंच ने क्या आदेश दिया था

मामला 22 जुलाई 2021 के सिंगल जज आदेश से जुड़ा है। इसमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री के वादे को लागू किया जा सकता है। बेंच ने सरकार को तय समय-सीमा में नीति बनाने का निर्देश दिया था।

यह आदेश 5 दिहाड़ी मजदूरों की याचिका पर दिया गया था। वे लॉकडाउन में किराया नहीं दे सके थे और चाहते थे कि सरकार मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी करे।

दिल्ली सरकार ने कोर्ट में कहा था- हमने अपील की थी, वादा नहीं

दिल्ली सरकार ने सिंगल जज बेंच के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि यह बयान मकान मालिकों से सिर्फ एक अपील थी कि वे किराएदारों पर किराया देने का दबाव न डालें, न कि कोई पक्का वादा। सरकार ने दलील दी कि उसने तो सिर्फ इतना कहा था कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह इस मामले पर विचार करेगी।

इससे पहले, 27 सितंबर 2021 को डिवीजन बेंच ने सिंगल-जज के आदेश पर रोक लगा दी थी, यह कहते हुए कि इसे लागू करने से सरकार के लिए गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। अब हाईकोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर अपील का निपटारा कर दिया, और खर्चों पर कोई आदेश नहीं दिया।

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