17 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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आजकल ग्रीन टी पीने का चलन काफी बढ़ गया है। चाहे फैटी लिवर का इलाज हो, स्किन पर ग्लो बढ़ाना हो या वजन कम करना हो, ग्रीन टी बहुत से लोगों की पसंदीदा बन गई है। स्वास्थ्य के लिहाज से ग्रीन टी के फायदों को नकारा नहीं जा सकता। लेकिन सही तरीके से इसका सेवन न करने से सेहत को कई तरह के नुकसान भी हो सकते हैं।
तो चलिए, आज जरूरत की खबर में बात ग्रीन टी की। साथ ही जानेंगे कि-
- ग्रीन टी सेहत के लिए कितनी फायदेमंद है?
- किन लोगों को ग्रीन टी नहीं पीनी चाहिए?
एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ
सवाल- ग्रीन टी में कौन-कौन से न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं?
जवाब- ग्रीन टी में कई सारे पोषक तत्व होते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं। इसमें मैंगनीज, पोटेशियम, कॉपर, आयरन, सोडियम, जिंक, कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम। इसके अलावा ग्रीन टी में कैटेचिन और पॉलीफेनॉल्स समेत कई एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं, जो हमारी सेहत को हेल्दी रखने में मददगार हैं।
सवाल- ग्रीन टी सेहत के लिए कितनी फायदेमंद है?
जवाब- लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की सीनियर डाइटीशियन डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि कभी-कभार एक-दो कप ग्रीन टी पीने से शायद कोई खास हेल्थ बेनिफिट नहीं मिलता। लेकिन रोजाना ग्रीन टी पीने से निश्चित ही हैरान करने वाले फायदे देखने को मिलते हैं। ग्रीन टी कई सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम्स के खतरे को कम करती है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या ग्रीन टी पीने से वजन कम होता है?
जवाब- डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि वजन कम करने के लिए ग्रीन टी पीना बेहद फायदेमंद है। इसमें मौजूद कैटेचिन नामक एंटीऑक्सिडेंट शरीर में फैट बर्निंग प्रोसेस को तेज करता है। इसके अलावा ग्रीन टी में कार्ब्स, फैट और शुगर की मात्रा न के बराबर होती है, इसलिए इससे वजन बढ़ने का खतरा नहीं रहता है।
वहीं ग्रीन टी में मौजूद कैफीन भी वेट लॉस में मददगार है। लेकिन अगर आप ये सोच रहे हों कि सिर्फ ग्रीन टी पीने मात्र से वजन कम हो जाएगा तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसके लिए संतुलित डाइट लेना और नियमित एक्सरसाइज करना भी जरूरी है।
सवाल- ग्रीन टी में कौन-कौन सी चीजें मिला सकते हैं?
जवाब- वैसे तो ग्रीन टी को अकेले ही पिया जाता है, लेकिन इसमें स्वाद के लिए कुछ चीजें मिला सकते हैं। इसमें शहद, अदरक, नींबू, तुलसी, लौंग, इलाइची, दालचीली, हल्दी या पुदीना मिला सकते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि सारी चीजें एक साथ न मिलाएं। कोई एक-दो चीजें ही उसमें मिलाएं, नहीं तो ग्रीन टी काढ़ा बन जाएगी।
सवाल- ग्रीन टी बनाने का सही तरीका क्या है?
जवाब- ग्रीन टी बनाने के लिए सबसे पहले 1 कप पानी अच्छी तरह से उबाल लें। फिर गैस बंद करके उबले पानी में लगभग 2 चम्मच ग्रीन टी डालें। इन पत्तियों को 5 मिनट के लिए पानी में ढंककर रख दें। 5 मिनट बाद इसे अच्छी तरह से छान लें। अगर आप टी बैग का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे 5 मिनट बाद अच्छी तरह से निचोड़कर बाहर निकाल लें।
इसके बाद इस ग्रीन टी में नींबू का रस या शहद डालें। अच्छी तरह से मिक्स करने के बाद इसे पी सकते हैं। ग्रीन टी में शुगर का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। ग्रीन टी का स्वाद कड़वा होता है। इसलिए कुछ लोग इसमें चीनी डालकर पीते हैं। लेकिन इससे ग्रीन टी पीने का कोई फायदा नहीं मिलता।

सवाल- ग्रीन टी किस समय पीनी चाहिए?
जवाब- हर कोई अपनी लाइफस्टाइल के हिसाब से अलग-अलग समय पर ग्रीन टी पी सकता है। सुबह खाली पेट ग्रीन टी पीना ज्यादा फायदेमंद है। हालांकि कुछ लोगों को सुबह खाली पेट ग्रीन टी डाइजेस्ट नहीं होती है। ऐसे लोग सुबह खाली पेट ग्रीन टी न पिएं।
ग्रीन टी सुबह एक्सरसाइज से आधे घंटे पहले, लंच के 1 घंटे बाद या फिर शाम के नाश्ते के 1-2 घंटे बाद पी सकते हैं। हालांकि रात को सोने से पहले ग्रीन टी न बिल्कुल पिएं। इससे नींद प्रभावित हो सकती है।
सवाल- ग्रीन टी कितनी बार पी सकते हैं?
जवाब- डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि अच्छी सेहत के लिए रोजाना एक या दो कप ग्रीन टी पीना पर्याप्त है। कुछ लोग ज्यादा फायदे की उम्मीद में कई कप ग्रीन टी पीते हैं, लेकिन इससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। कई लोग दिन भर ग्रीन टी के साथ चाय या कॉफी दोनों पीते हैं। यह आदत आपके शरीर को फायदा पहुंचाने की बजाय नुकसान पहुंचा सकती है।
सवाल- क्या ज्यादा ग्रीन टी पीने का कोई नुकसान भी है?
जवाब- जरूरत से ज्यादा ग्रीन टी पीने से कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। इसे नीचे ग्राफिक से समझिए-

सवाल- किन लोगों को ग्रीन टी नहीं पीनी चाहिए?
जवाब- जाे लोग हार्ट, किडनी व लिवर डिजीज से पीड़ित हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना ग्रीन टी नहीं पीनी चाहिए। इसके अलावा कुछ लोगों को ग्रीन टी बिल्कुल नहीं पीनी चाहिए। जैसेकि-
- प्रेग्नेंट या ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं को।
- जिन्हें पहले से ही पाचन संबंधी समस्याएं हैं।
- मोतियाबिंद की समस्या से जूझ रहे लोगों को।
- एनीमिया की समस्या से ग्रसित लोगों को।
- जिन्हें माइग्रेन या एंग्जाइटी की समस्या है।
- पांच साल से छोटे बच्चों को।
- जिन्हें अनिद्रा की समस्या है।
- जिन लोगों को कैफीन से एलर्जी है।
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