जरूरत की खबर- ठंड में बच्चों का रखें खास ख्याल:  15 विंटर केयर टिप्स, न करें ये 7 गलतियां, डॉक्टर से जानें सभी सवालों के जवाब
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जरूरत की खबर- ठंड में बच्चों का रखें खास ख्याल: 15 विंटर केयर टिप्स, न करें ये 7 गलतियां, डॉक्टर से जानें सभी सवालों के जवाब

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34 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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सर्दियों का मौसम बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इस दौरान कोल्ड, फ्लू और सांस संबंधी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। कमजोर इम्यून सिस्टम और ठंड के संपर्क में आने की वजह से बच्चे इन बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, सर्दियों में खासकर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन के मामले ज्यादा देखे जाते हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ठंड के मौसम में बच्चों की इम्यूनिटी सामान्य दिनों की तुलना में कमजोर रहती है। ऐसे में थोड़ी-सी लापरवाही भी उन्हें बीमार कर सकती है।

हालांकि सही देखभाल और थोड़ी-सी सावधानी बरतकर बच्चों को इन सीजनल बीमारियों से काफी हद तक बचाया जा सकता है।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम बच्चों के लिए जरूरी विंटर केयर टिप्स के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • सर्दियों में बच्चों में बीमारियों का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
  • इस दौरान बच्चों के साथ किस तरह की गलतियां नहीं करनी चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. विजय शंकर शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक्स, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल- सर्दियों में बच्चों को संक्रमण का रिस्क क्यों बढ़ जाता है?

जवाब- पीडियाट्रिशियन डॉ. विजय शंकर शर्मा बताते हैं कि ठंड में हवा शुष्क हो जाती है, जिससे नाक और गले की म्यूकस लेयर कमजोर पड़ जाती है। यही लेयर हमें वायरस और बैक्टीरिया से बचाती है। जब यह सूख जाती है तो संक्रमण का रिस्क बढ़ जाता है।

इसके अलावा बच्चों का इम्यून सिस्टम बड़ों की तुलना में कमजोर होता है, इसलिए वे संक्रमण के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। स्कूल या पार्क में दोस्तों के साथ खेलते हुए हाथ मिलाना, साझा खिलौनों को छूना या हाथ न धोना संक्रमण का एक बड़ा कारण है। नीचे दिए ग्राफिक से सर्दियों में बच्चों के बीमार होने के मुख्य कारणों को समझिए-

सवाल- सर्दियों में बच्चों की केयर के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?

जवाब- डॉ. विजय शंकर शर्मा बताते हैं कि सर्दियों में केवल गर्म व ऊनी कपड़े पहनाने से बच्चों की सुरक्षा नहीं होती है। उनकी इम्यूनिटी, हाइजीन और सही डाइट पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए रोजमर्रा की आदतों में कुछ छोटे-छोटे बदलावों की जरूरत है। नीचे दिए ग्राफिक से इसे ध्यान से समझिए-

सवाल- सर्दियों में पेरेंट्स को बच्चों के साथ किस तरह की गलतियां नहीं करनी चाहिए?

जवाब- बच्चों को ठंड से बचाने की कोशिश में कई बार पेरेंट्स ऐसी गलतियां कर जाते हैं, जो वास्तव में उन्हें बीमार कर सकती हैं या उनके कम्फर्ट को छीन सकती हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

जवाब- अगर बच्चे में सामान्य सर्दी के लक्षण हैं तो उचित देखभाल और आराम से वे आमतौर पर एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। हालांकि कुछ स्थितियों में मेडिकल हेल्प लेना बेहद जरूरी है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- सर्दियों में बच्चों की डाइट में क्या बदलाव करने चाहिए?

जवाब- डॉ. विजय शंकर शर्मा बताते हैं कि विटामिन C, जिंक और प्रोटीन वाली डाइट इम्यूनिटी मजबूत करती है। इसके लिए बच्चों की डाइट में संतरा, मौसमी, अमरूद और सेब जैसे फल शामिल करें। सब्जियों में पालक, गाजर, चुकंदर और ब्रॉकली दें। इसके अलावा दाल, सूप, हल्दी वाला दूध और काढ़ा देना भी फायदेमंद है। स्ट्रीट फूड, जंक फूड और ठंडी चीजें देने से बचें।

सवाल- बच्चों की सेहत में नींद और डेली रूटीन का क्या रोल है?

जवाब- देर रात तक टीवी या मोबाइल देखने की आदत बच्चों की नींद बिगाड़ती है। इससे इम्यूनिटी प्रभावित होती है। इसलिए बच्चों को रोज एक ही समय पर खाने और सुलाने की कोशिश करें। कमरे का तापमान 22–24°C रखें। उन्हें मोटा कंबल दें, ताकि नींद गहरी आए और वे रिलैक्स महसूस करें। 3-5 साल के बच्चों के लिए 10-11 घंटे और बड़े बच्चों के लिए 8-10 घंटे नींद जरूरी है।

सवाल- क्या ठंड में बच्चों को बाहर खेलने देना ठीक है?

जवाब- डॉ. विजय शंकर शर्मा बताते हैं कि बिल्कुल, लेकिन सावधानी के साथ। धूप निकलने पर सुबह 9 से 11 या शाम 4 से 5 बजे के बीच बच्चों को खेलने के लिए बाहर भेज सकते हैं। खेलने के बाद घर आने पर उनके कपड़े बदल दें और गुनगुने पानी से हाथ-पैर धुलवाएं। इससे सर्दी लगने की संभावना कम होती है।

सवाल- अगर बच्चे को बार-बार सर्दी-जुकाम हो रहा है तो क्या करें?

जवाब- इसका मतलब बच्चे की इम्यूनिटी कमजोर है या घर की हवा प्रदूषित है। डॉक्टर से सलाह लेकर बच्चे की जांच करवाएं। जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट या एलर्जी टेस्ट किया जा सकता है।

सवाल- क्या बच्चों को हर साल फ्लू वैक्सीन लगवाना जरूरी है?

जवाब- हां, हर साल फ्लू वैक्सीन लेना बच्चों को गंभीर संक्रमण से बचाने का प्रभावी तरीका है। अगर बच्चा अस्थमा, एलर्जी या अन्य रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम से पीड़ित है तो वैक्सीन और भी जरूरी है। हालांकि इसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

सवाल- बच्चों को अच्छी हाइजीन आदतें कैसे सिखाएं?

जवाब- स्वच्छता ही पहला बचाव है। इसके लिए बच्चों को सिखाएं कि खेलने के बाद, खाने से पहले और टॉयलेट से आने के बाद साबुन से हाथ जरूर धोएं। छींकते-खांसते समय कोहनी से मुंह ढकें। खिलौने, पानी की बोतल और घर की फर्श को नियमित साफ करें। इन आदतों से संक्रमण का रिस्क काफी कम हो जाता है।

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