जरूरत की खबर- नेशनल हेल्थ सर्विस की चेतावनी:  अपने मन से ओमेप्राजोल न खाएं, एसिडिटी की दवा ज्यादा खाने से हो सकता है गट इन्फेक्शन
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जरूरत की खबर- नेशनल हेल्थ सर्विस की चेतावनी: अपने मन से ओमेप्राजोल न खाएं, एसिडिटी की दवा ज्यादा खाने से हो सकता है गट इन्फेक्शन

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5 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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अगर आपको कभी हार्टबर्न या एसिडिटी की समस्या हो तो क्या आप भी ओमेप्राजोल (Omeprazole) जैसी दवाएं लेते हैं? अगर हां तो सतर्क हो जाइए। हाल ही में ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) ने इस दवा के लंबे इस्तेमाल पर चेतावनी जारी की है।

यह दवा प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर्स (PPI) क्लास की है, जो पेट के एसिड को कम करके राहत देती है। लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के इसे दो हफ्ते से ज्यादा न लें, वरना आंतों में बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।

साल 2022-23 में इंग्लैंड में 7.3 करोड़ PPI प्रिस्क्रिप्शन्स जारी हुए। यानी करीब 15% आबादी इस दवा का इस्तेमाल कर रही है। NHS की वेबसाइट पर साफ चेतावनी दी गई है–

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बिना प्रिस्क्रिप्शन के ओमेप्राजोल 2 हफ्ते से ज्यादा न लें। अगर कोई परेशानी हो तो डॉक्टर से मिलें।

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बता दें कि यह दवा हार्टबर्न, अल्सर और गैस्ट्रो-एसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज जैसी समस्याओं के लिए दी जाती है। कई लोग इसे मामूली दवा समझकर सालों लेते रहते हैं। लेकिन लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से पेट का एसिड कम होने पर बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं, जो डायरिया, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याएं पैदा करते हैं। हालांकि सही जानकारी और कुछ सावधानियों के साथ इस खतरे से बचा जा सकता है।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम NHS की इस वॉर्निंग के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • ओमेप्राजोल क्या है और यह कैसे काम करता है?
  • ओमेप्राजोल के साइड इफेक्ट्स क्या हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. मोनिका जैन, डायरेक्टर, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- ओमेप्राजोल क्या है और यह कैसे काम करता है?

जवाब- ओमेप्राजोल इंडिया और ब्रिटेन सहित कई देशों में सबसे ज्यादा प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाओं में से एक है। यह PPI क्लास की दवा है, जो पेट में एसिड प्रोडक्शन को रोकती है। पेट की लाइनिंग में मौजूद प्रोटॉन पंप्स को ब्लॉक करके यह एसिड की मात्रा को कम कर देती है। इससे हार्टबर्न, अल्सर और रिफ्लक्स जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।

यह दवा पेट के एसिड को न्यूट्रलाइज नहीं करती है, बल्कि उसके प्रोडक्शन को ही रोकती है। इसलिए यह अल्सर के घाव को भरने में मदद करती है और रिफ्लक्स से फूड पाइप को बचाती है। लेकिन यह लक्षणों को दबाती है, समस्या की जड़ को नहीं सुलझाती है। अगर डाइट या लाइफस्टाइल की वजह से एसिडिटी है तो दवा के साथ बदलाव जरूरी हैं। इसलिए इसे बिना प्रिस्क्रिप्शन के लेना नुकसानदायक हो सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से ओमेप्राजोल के मुख्य इस्तेमाल को समझिए-

सवाल- भारत में ओमेप्राजोल दवा किन नामों से मिलती है?

जवाब- भारत में यह दवा कई ब्रांड नामों से उपलब्ध है, जिनमें डॉ. रेड्डीज का ‘ओमेज’, जाइडस लाइफसाइंसेज का ‘ल्यूसिड’, एल्केम लैबोरेटरीज का ‘ओमी’ और सिप्ला का ‘लोमैक’ शामिल हैं। यह ओमेप्राजोल कैप्सूल आईपी जैसे जेनेरिक फॉर्म में भी उपलब्ध है।

सवाल- ओमेप्राजोल के लंबे इस्तेमाल के क्या खतरे हैं?

जवाब- NHS की मुख्य वॉर्निंग लंबे इस्तेमाल पर केंद्रित है। PPI दवाएं पेट के एसिड को कम करती हैं, जिससे गुड बैक्टीरिया कम हो जाते हैं और C. difficile जैसे खतरनाक बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं। यह इन्फेक्शन आंतों को प्रभावित करता है, जिससे डायरिया, पेट दर्द, बुखार और डिहाइड्रेशन होता है। गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होने तक की नौबत आ सकती है। अन्य खतरों में विटामिन B12 की कमी, हड्डियों का कमजोर होना (ऑस्टियोपोरोसिस) और किडनी प्रॉब्लम्स शामिल हैं। नीचे दिए ग्राफिक से मुख्य खतरे समझिए-

सवाल- ओमेप्राजोल के सामान्य साइड इफेक्ट्स क्या हैं?

जवाब- इसके कुछ सामान्य साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जिन्हें लोग अक्सर इग्नोर कर देते हैं। जैसेकि-

  • सिरदर्द।
  • पेट दर्द।
  • जी मिचलाना या उल्टी।
  • कब्ज या डायरिया।
  • गैस, ब्लोटिंग या फार्टिंग बढ़ना।

NHS कहता है कि यह ड्राइविंग या मशीनरी यूज पर असर नहीं डालता है। लेकिन अगर चक्कर, विजन प्रॉब्लम या गंभीर साइड इफेक्ट्स जैसे एलर्जी रैश, सूजन दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

सवाल- किन लोगों को ओमेप्राजोल के साइड इफेक्ट्स का रिस्क ज्यादा है?

जवाब- कुछ लोगों में इसके साइड इफेक्ट्स का खतरा ज्यादा रहता है। जैसेकि-

  • कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को।
  • लंबे समय से दवा ले रहे लोगों को।
  • बुजुर्गों को।
  • किडनी या लिवर डिजीज से पीड़ित लोगों को।
  • अन्य दवाएं लेने वाले लोगों को।

सवाल- क्या अन्य PPI दवाएं भी नुकसानदायक हैं?

जवाब- ओमेप्राजोल के अलावा अन्य PPI दवाएं भी हैं, जो ऐसे ही काम करती हैं। इनके भी लंबे यूज पर वही वार्निंग लागू होती है। इनमें एसोमेप्राजोल, लैंसोप्राजोल, पैंटोप्राजोल, राबेप्राजोल शामिल हैं। डॉक्टर इनका चुनाव समस्या के आधार पर करते हैं। ये सभी दवाएं एसिड प्रोडक्शन रोकती हैं, लेकिन ब्रांड के अनुसार डोज अलग होती है। NHS कहता है कि कोई भी PPI दवा बिना सलाह के 2 हफ्ते से ज्यादा न लें।

सवाल- NHS की वॉर्निंग के अनुसार किस स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है?

जवाब- NHS ने अपनी वेबसाइट पर साफ लिखा है कि अगर आपने बिना प्रिस्क्रिप्शन के ओमेप्राजोल खरीदी है तो इसे 2 हफ्ते से ज्यादा लगातार न लें। अगर लक्षण बने रहें या बढ़ें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सवाल- एसिडिटी और हार्टबर्न से निजात पाने के प्राकृतिक उपाय क्या हैं?

जवाब- दवा के अलावा लाइफस्टाइल में कुछ सामान्य बदलाव से भी हार्टबर्न कंट्रोल किया जा सकता है। नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए-

सवाल- अगर ओमेप्राजोल दवा लेते हैं, तो इसे लेने का सही तरीका क्या है?

जवाब- NHS के मुताबिक, यह दवा टैबलेट, कैप्सूल और लिक्विड फॉर्म में उपलब्ध है। कुछ को पानी में घोलकर भी लिया जाता है। लेकिन दवा लेने के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसेकि-

  • दिन में एक बार ले रहे हैं तो हमेशा सुबह के समय लें।
  • अगर दिन में दो बार लेनी है तो सुबह और शाम को एक ही समय पर लें।
  • इसे खाने के साथ या बिना खाए लिया जा सकता है।
  • टैबलेट या कैप्सूल को पानी के साथ पूरा निगलें।
  • जिन पर ‘एंटेरिक कोटेड’ या ‘गैस्ट्रो रेसिस्टेंट’ लिखा हो, उन्हें कभी चबाएं या तोड़ें नहीं।

सवाल- NHS की सलाह भारत के लिए क्यों जरूरी है?

जवाब- NHS का यह अलर्ट केवल ब्रिटेन के लिए ही नहीं, बल्कि भारत जैसे देशों में भी लोगों के लिए जरूरी है। दरअसल भारत में भी एसिडिटी और हार्टबर्न की दवाएं बहुत आसानी से मिल जाती हैं। लोग बिना डॉक्टर से पूछे महीनों तक इन्हें खाते रहते हैं। इससे एक ओर जहां असली बीमारी का पता नहीं चलता है। वहीं दवा का खतरा भी बढ़ जाता है।

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