जरूरत की खबर- न्यूबॉर्न बेबी को चेहरे पर न चूमें:  बढ़ता RSV इन्फेक्शन का रिस्क, RSV के 8 संकेत, शिशु के साथ न करें ये 11 गलतियां
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जरूरत की खबर- न्यूबॉर्न बेबी को चेहरे पर न चूमें: बढ़ता RSV इन्फेक्शन का रिस्क, RSV के 8 संकेत, शिशु के साथ न करें ये 11 गलतियां

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5 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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नवजात शिशुओं को देखकर हर कोई उन्हें प्यार से चूमना चाहता है। यह प्यार दिखाने का एक आसान और सहज तरीका है, जो खुशी और स्नेह व्यक्त करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं यह क्यूट जेस्चर बच्चे की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।

एक नई स्टडी बताती है कि शिशुओं को चूमने से रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है। दरअसल नवजात शिशुओं की इम्यूनिटी कमजोर होती है। ऐसे में ये बीमारी उनको जल्दी चपेट में ले लेती है। इससे बच्चे को सांस लेने में परेशानी, डिहाइड्रेशन और कई बार लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती करने तक की जरूरत पड़ सकती है।

‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ यूरोप’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, स्वीडन में 2001 से 2022 तक जन्मे 23 लाख से ज्यादा बच्चों काे एनालाइज किया गया। रिसर्चर्स ने पाया कि स्वस्थ दिखने वाले फुल-टर्म शिशु भी RSV से गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं, जिन्हें इंटेंसिव केयर की जरूरत पड़ सकती है। स्टडी में पाया गया कि गंभीर रूप से बीमार शिशुओं की औसत उम्र लगभग दो महीने से कम थी, जो दर्शाता है कि न्यूबॉर्न बेबी RSV के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया में हर साल पांच साल से कम उम्र के लगभग 36 लाख बच्चों को RSV के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, जिनमें से करीब 1 लाख की मौत हो जाती है। इनमें से लगभग आधी मौतें 6 महीने से कम उम्र के शिशुओं की होती हैं।

भारत में भी मानसून और शुरुआती सर्दियों में RSV से ICU में भर्ती होने वाले नवजातों की संख्या बढ़ जाती है। हालांकि कुछ सावधानियों और सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखते हुए इससे काफी हद तक बचा जा सकता है।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम न्यूबॉर्न को चूमने के खतरे और RSV इन्फेक्शन के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • RSV इन्फेक्शन क्या है और शिशुओं में क्यों खतरनाक है?
  • शिशुओं के साथ कौन सी गलतियां कभी नहीं करनी चाहिए?
  • प्यार दिखाने के सुरक्षित तरीके क्या हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. बेजी जैसन, पीडियाट्रिशियन, MD, MRCPCH (मेंबरशिप ऑफ द रॉयल कॉलेज ऑफ पीडयाट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ)

सवाल- RSV इन्फेक्शन क्या है और ये न्यूबॉर्न बेबी के लिए क्यों ज्यादा खतरनाक है?

जवाब- RSV यानी रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस बच्चों के फेफड़ों और रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को प्रभावित करता है। यह संक्रमण आमतौर पर सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों से शुरू होता है, लेकिन नवजात या छोटे शिशुओं में यह तेजी से ब्रोंकियोलाइटिस (फेफड़ों की सूजन) या निमोनिया में बदल सकता है।

नवजात शिशुओं के लिए यह ज्यादा खतरनाक इसलिए है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता, फेफड़े छोटे और नाजुक होते हैं और वे अपनी सांस की परेशानी ठीक से व्यक्त नहीं कर पाते हैं। ये आमतौर पर सितंबर से मार्च महीने के बीच में ज्यादा फैलता है। नीचे दिए ग्राफिक से शिशुओं में RSV इन्फेक्शन के मुख्य लक्षणों को समझिए-

सवाल- किन बच्चों में RSV संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है?

जवाब- RSV किसी भी बच्चे को हो सकता है, लेकिन कुछ मेडिकल और एनवायर्नमेंटल कारणों से कुछ शिशुओं में इसका खतरा बढ़ जाता है। जैसेकि-

  • 6 महीने से कम (खासकर 3 महीने से कम) उम्र के बच्चे।
  • सर्दियों में जन्मे बच्चे और समय से पहले जन्मे बच्चे।
  • जन्मजात हार्ट डिजीज से ग्रस्त बच्चे।
  • लंग्स या अन्य पल्मोनरी डिजीज से पीड़ित बच्चे।
  • किडनी या लिवर डिजीज से पीड़ित बच्चे।
  • जेनेटिक या न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर वाले बच्चे।
  • जन्म के समय सामान्य से कम वजन वाले बच्चे।
  • स्मोकिंग या प्रदूषित इनडोर एयर में रहने वाले बच्चे।
  • जन्म के बाद शुरुआती हफ्तों में ज्यादा एक्सपोजर वाले बच्चे।
  • घर के बड़े बच्चे स्कूल या बाहर से वायरस लेकर आते हैं और न्यूबॉर्न को छूते हैं। इससे भी RSV का रिस्क बढ़ता है।

सवाल- चूमने और क्लोज कॉन्टैक्ट से RSV कैसे फैलता है?

जवाब- जब कोई व्यक्ति शिशु को नाक या मुंह के पास चूमता है या करीब सांस लेता है तो रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स (जिनमें RSV हो सकता है) ट्रांसफर हो सकते हैं। शिशुओं का इम्यून सिस्टम डेवलप हो रहा होता है। ऐसे में नॉर्मल जर्म्स भी खतरनाक बन जाते हैं। तीन महीने से कम उम्र के शिशुओं में रिस्क सबसे ज्यादा होता है।

सवाल- शिशुओं के साथ कौन सी गलतियां कभी नहीं करनी चाहिए?

जवाब- अक्सर लोग न्यूबॉर्न बेबी के साथ कुछ ऐसे व्यवहार करते हैं, जिनसे जाने-अनजाने में RSV और अन्य इन्फेक्शंस का खतरा बढ़ता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- RSV से बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी जरूरी हैं?

जवाब- तीन महीने से कम उम्र के शिशुओं का एक्सपोजर लिमिट कम करें। अगर थोड़ा भी बीमार महसूस हो (नाक बहना, खांसी, गला दर्द) तो चूमने या क्लोज कॉन्टैक्ट से बचें। हैंड हाइजीन का खास ख्याल रखें। शुरुआती हफ्तों में एक्सपोजर कम रखें। छींकते-खांसते समय मुंह जरूर ढकें। RSV सीजन में डॉक्टर से प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट्स की सलाह लें।

सवाल- न्यूबॉर्न को प्यार दिखाने के सुरक्षित तरीके क्या हैं?

जवाब- शिशुओं को स्नेह दिखाने के कई सुरक्षित और प्यार भरे तरीके हैं, जो बॉन्डिंग बढ़ाते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या RSV संक्रमण से पूरी तरह बचाव संभव है?

जवाब- RSV इन्फेक्शन से पूरी तरह नहीं बचा जा सकता है, लेकिन इसे कंट्रोल और प्रिवेंट जरूर किया जा सकता है। यह वायरस हर साल सर्दियों या बदलते मौसम में लौट आता है, इसलिए रोकथाम ही सबसे असरदार तरीका है।

नवजात शिशुओं को भीड़भाड़ से दूर रखें, हाथ धोने की आदत डालें और सर्दी-जुकाम वाले लोगों के संपर्क से बचाएं। कुछ मामलों में डॉक्टर RSV के खिलाफ प्रिवेंटिव इंजेक्शन (मोनोक्लोनल एंटीबॉडी) की सलाह भी दे सकते हैं।

सवाल- अगर न्यूबॉर्न बच्चे में RSV के लक्षण दिखें तो तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब- अगर नवजात बच्चे में तेज सांस लेना, सीने में घरघराहट, दूध पीने में परेशानी, सुस्ती या होंठ नीले पड़ना, जैसे RSV के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। शुरुआत में घर पर बच्चे को गर्म और साफ माहौल में रखें, नाक साफ करते रहें और पानी या दूध की पर्याप्त मात्रा देते रहें ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो।

याद रखें नवजात में RSV तेजी से गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए सेल्फ-मेडिकेशन या घरेलू उपायों से बचें और डॉक्टर की निगरानी में ही इलाज कराएं।

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