जानें अपने अधिकार- फूड सेफ्टी आपका कानूनी हक है:  नकली और मिलावटी फूड पर कैसे लें एक्शन, क्या कहता है कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट
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जानें अपने अधिकार- फूड सेफ्टी आपका कानूनी हक है: नकली और मिलावटी फूड पर कैसे लें एक्शन, क्या कहता है कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट

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11 घंटे पहलेलेखक: संदीप सिंह

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हम जो खाना खाते हैं, वह सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि हमारी सेहत पर भी असर डालता है। भारत में खाने-पीने की चीजों की निगरानी का जिम्मा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) संभालती है। इसका काम यह सुनिश्चित करना है कि हमें मिलने वाला खाना साफ, सुरक्षित और नियमों के मुताबिक हो।

फिर भी कई बार बाजार या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खराब, नकली या एक्सपायरी फूड मिल जाता है, जो सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम खाने को लेकर सजग रहें और अपने अधिकार भी जानें, ताकि कोई गलती दिखे तो सही जगह शिकायत कर सकें।

तो चलिए, जानें अपने अधिकार के कॉलम में हम जानेंगे कि फूड सेफ्टी से जुड़े कानूनी अधिकार क्या हैं? साथ ही जानेंगे कि-

  • होटल-रेस्टोरेंट में गंदा खाना मिलने पर क्या करें?
  • मिलावटी या नकली खाने पर क्या कार्रवाई होती है?

एक्सपर्ट: रवि रंजन मिश्रा, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट

सवाल- फूड सेफ्टी क्या है?

जवाब- फूड सेफ्टी यानी ऐसा खाना जो हमारी सेहत को नुकसान न पहुंचाए। इसमें साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए, खाना खराब या मिलावटी न हो और सही तरीके से रखा गया हो। अगर पैकिंग वाला सामान है तो उस पर मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट साफ लिखी हो।

सवाल- भारतीय कानून के मुताबिक खाने-पीने की चीजों को लेकर कौन-कौन से अधिकार मिलते हैं?

जवाब- अधिवक्ता रवि रंजन मिश्रा बताते हैं कि भारत में हर व्यक्ति को सुरक्षित और शुद्ध खाने का अधिकार है। इसके लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 बनाया गया है। इस एक्ट का मकसद है कि खाने-पीने की चीजें सुरक्षित और सेहतमंद हों, उनके निर्माण और बिक्री पर नियम हों और लोगों को साफ-सुथरा खाना मिले। FSSAI एक्ट साफ बताता है कि कोई भी कंपनी ऐसा खाना नहीं बेच सकती जो सेहत को नुकसान पहुंचाए। कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे खाने में मिलावट न करें और पैकिंग पर सही जानकारी लिखें। अगर किसी खाने-पीने की चीज में मिलावट पाई जाती है या उस पर झूठी जानकारी लिखी होती है तो ग्राहक कानूनन कार्रवाई करा सकता है। इसकी शिकायत FSSAI या कंज्यूमर फोरम में की जा सकती है।

सवाल- अगर मुझे खराब या मिलावटी खाना मिले तो क्या कर सकता हूं?

जवाब- अगर किसी होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा या दुकान से खराब, सड़ा-गला या मिलावटी खाना मिलता है तो आप केवल नाराज होने तक सीमित न रहें। आप इसकी आधिकारिक शिकायत कर सकते हैं।

इसके लिए सरकार ने FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) और नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन जैसी संस्थाएं बनाई हैं, जहां आप ऑनलाइन, फोन या एप के जरिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिकायत के बाद दोषी पाए जाने पर दुकानदार या मैन्युफैक्चरर पर जुर्माना या लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी हो सकती है। इसलिए उपभोक्ता होने के नाते सजग और जागरूक रहना बेहद जरूरी है।

सवाल- दुकान या रेस्टोरेंट के पास FSSAI लाइसेंस है या नहीं, यह कैसे पता करें?

जवाब- हर दुकान, रेस्टोरेंट या पैक्ड फूड पर 14 अंकों का FSSAI नंबर लिखा होता है। ये लाइसेंस नंबर होता है, जो बताता है कि दुकान या रेस्टोरेंट फूड सेफ्टी के नियमों का पालन कर रहा है या नहीं। आप इस नंबर को FSSAI की वेबसाइट या उनके मोबाइल एप ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ में डालकर चेक कर सकते हैं। अगर कोई दुकान या रेस्टोरेंट यह नंबर नहीं दिखाता तो वहां से खाना लेना सुरक्षित नहीं है।

सवाल- 100% शुद्ध का दावा करने वाल प्रोडक्ट्स पर भरोसा किया जा सकता है?

जवाब- FSSAI नियमों के मुताबिक कोई भी फूड ब्रांड ऐसा दावा नहीं कर सकता, जिससे उपभोक्ता को गुमराह किया जाए। ‘100% शुद्ध’ या ‘100% सेफ’ जैसे दावे पूरी तरह सही नहीं माने जाते हैं क्योंकि किसी भी खाने की चीज में छोटी मात्रा में भी मिलावट या खतरनाक बैक्टीरिया की संभावना होती है। ऐसे दावे केवल तभी किए जा सकते हैं, जब कंपनी के पास ठोस वैज्ञानिक प्रमाण और लैब टेस्ट हों। अगर कोई ब्रांड बिना सबूत के ऐसे दावे करता है तो उस पर कार्रवाई हो सकती है।

सवाल- क्या ग्राहक एक्सपायरी डेट न होने पर शिकायत कर सकता है?

जवाब- हां, अगर किसी खाने के पैकेट पर एक्सपायरी डेट नहीं लिखी है या जानबूझकर उसे छुपाया गया है तो ग्राहक इसकी शिकायत कर सकता है। यह लेबलिंग नॉर्म्स का उल्लंघन है। आप FSSAI या कंज्यूमर हेल्पलाइन पर इसकी रिपोर्ट कर सकते हैं।

सवाल- अगर रेस्टोरेंट में साफ-सफाई न हो तो किससे शिकायत करें?

जवाब- रेस्टोरेंट में गंदगी, किचन की खराब हालत या हाइजीन की कमी होने पर FSSAI के पोर्टल या एप पर शिकायत कर सकते हैं। साथ ही स्थानीय या राज्य के फूड सेफ्टी ऑफिसर से भी संपर्क कर सकते हैं। शिकायत के लिए फोटो या वीडियो जरूर बनाएं।

सवाल- क्या ऑनलाइन फूड डिलीवरी एप्स भी FSSAI के दायरे में आते हैं?

जवाब- हां, ऑनलाइन फूड डिलीवरी एप्स भी पूरी तरह से FSSAI के नियमों के तहत आते हैं। इन एप्स से जुड़ी हर रसोई और रेस्टोरेंट के पास FSSAI लाइसेंस होना जरूरी है। यही वजह है कि एप्स पर दिए गए रेस्टोरेंट के नाम के साथ उनका FSSAI नंबर भी दिखाया जाता है। इसका मतलब है कि आपका खाना सिर्फ डिलीवरी ही नहीं, बल्कि कानून के हिसाब से सेफ्टी चेक से होकर आता है।

सवाल- अगर खाने से किसी को फूड पॉइजनिंग हो जाए तो क्या कार्रवाई हो सकती है?

जवाब- अगर किसी को खाना खाकर फूड पॉइजनिंग हो जाती है तो वह अपनी मेडिकल रिपोर्ट के साथ तुरंत FSSAI या जिले के फूड सेफ्टी विभाग में शिकायत कर सकता है। जांच में गलत पाए जाने पर दुकानदार या रेस्टोरेंट पर जुर्माना लगाया जा सकता है, उनका लाइसेंस सस्पेंड हो सकता है। गंभीर मामलों में आपराधिक केस भी दर्ज किया जा सकता है।

सवाल- क्या सिर्फ ग्राहक ही शिकायत कर सकता है या कोई भी कर सकता है?

जवाब- शिकायत करने के लिए ग्राहक होना जरूरी नहीं है। कोई भी व्यक्ति, जैसे राह चलते इंसान, पड़ोसी या वहां काम करने वाला कर्मचारी, खराब खाना या गंदगी की शिकायत कर सकता है। शिकायत करने वाले का नाम और पहचान गुप्त रखी जाती है।

सवाल- उपभोक्ता अपनी शिकायत कितने स्तरों पर और किस राशि सीमा तक दर्ज करा सकता है? जवाब- उपभोक्ता शिकायत अलग-अलग स्तरों पर दर्ज की जा सकती है, जिसकी सीमा राशि इस प्रकार है।

जिला उपभोक्ता फोरम: 0 रुपए से 50 लाख रुपए तक की शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।

राज्य उपभोक्ता आयोग: 50 लाख रुपए से 2 करोड़ रुपए तक की शिकायतें यहां दर्ज होती हैं।

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग: 2 करोड़ रुपए से अधिक की शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।

अगर किसी मामले में राष्ट्रीय आयोग में भी सही न्याय नहीं मिलता है तो इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में शिकायत की जा सकती है।

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