नई दिल्ली3 मिनट पहले
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दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की वकालत की। कोर्ट ने कहा कि पर्सनल लॉ बाल विवाह की परमिशन देता है, जबकि पॉक्सो एक्ट, BNS में यही अपराध है। इन कानूनों के बीच बार-बार होने वाले टकराव को देखते हुए इसकी कानूनी रूप से स्पष्ट व्याख्या जरूरी है।
जस्टिस अरुण मोंगा ने पूछा कि अक्सर हम इस दुविधा में आ जाते हैं कि क्या समाज को लंबे समय से चले आ रहे पर्सनल लॉ का पालन करने के लिए अपराधी बनाया जाना चाहिए।
जस्टिस मोंगा ने कहा कि क्या अब UCC की तरफ बढ़ने का समय नहीं आ गया है। जिसमें एक ऐसा ढांचा बनाया जाए, ताकि पर्सनल लॉ जैसे कानून राष्ट्रीय कानूनों पर हावी न हों।
दिल्ली हाईकोर्ट की यह टिप्प्णी नाबालिग लड़की से शादी करने के आरोपी हामिद रजा की जमानत याचिका से जुड़े केस की सुनवाई के दौरान सामने आई।
हामिद पर IPC की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप है कि उसने नाबालिग लड़की से शादी की। रजा के खिलाफ FIR लड़की के सौतेले पिता ने की थी।
हालांकि कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में, नाबालिग रजा की गिरफ्तारी से पहले उसके साथ रह रही थी। उसके पिता ने अपना अपराध छिपाने के लिए FIR की थी। हामिद रजा को रेगुलर जमानत दे दी।
उत्तराखंड UCC लागू करने वाला देश का पहला राज्य
उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। 27 जनवरी 2025 में CM पुष्कर सिंह धामी ने इसका ऐलान किया था। UCC लागू होने के बाद से उत्तराखंड में हलाला, बहुविवाह, तीन तलाक पर पूरी तरह रोक लग गई है।
उत्तराखंड, गोवा के बाद पहला राज्य है, जहां UCC लागू हुआ। भले ही गोवा में पहले से ही UCC लागू है, लेकिन वहां इसे पुर्तगाली सिविल कोड के तहत लागू किया गया था। उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना है।








