देश की पहली आतंकवाद-विरोधी नीति जारी:  केंद्र ने प्रहार नाम दिया; इसमें कहा- आतंकवादी इंटरनेट के जरिए भर्तियां और जिहाद का महिमामंडन करते हैं
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देश की पहली आतंकवाद-विरोधी नीति जारी: केंद्र ने प्रहार नाम दिया; इसमें कहा- आतंकवादी इंटरनेट के जरिए भर्तियां और जिहाद का महिमामंडन करते हैं

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नई दिल्ली4 घंटे पहले

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जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन की फाइल फुटेज। - Dainik Bhaskar

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन की फाइल फुटेज।

गृह मंत्रालय ने सोमवार को भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति जारी की। इसका नाम है प्रहार- PRAHAAR। आठ पेज की इस नीति में आतंकी हमलों को रोकने पर खास जोर दिया गया है। साथ ही खतरे के मुताबिक तेज और संतुलित कार्रवाई की बात कही गई है।

केंद्र ने पहले पेज पर इंट्रोडक्शन और PRAHAAR का फुल फॉर्म बताया है। इंट्रोडक्शन में लिखा है- कुछ पड़ोसी देशों ने आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के एक औजार के रूप में इस्तेमाल किया है। फिर भी भारत आतंकवाद को किसी खास धर्म, जाति, देश या सभ्यता से जोड़कर नहीं देखता।

नीति में कहा गया है कि आतंकी इंटरनेट का इस्तेमाल आपस में संपर्क, संगठन में भर्ती और जिहाद के महिमामंडन के लिए करते हैं। सरकार ने नीति में भारत की जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई है। इसमें कहा गया है कि आतंकवाद को किसी भी धार्मिक, जातीय या वैचारिक आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता।

सरकार ने प्रहार में कहा है कि भारत हर तरह के आतंकवाद की हमेशा कड़ी निंदा करता रहा है। नीति में आतंकवाद को रोकने और उससे निपटने के लिए एक व्यवस्थित और खुफिया जानकारी पर आधारित स्ट्रक्चर बताया गया है। सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

नीति में लिखा- विदेश से भारत में हिंसा फैलाने की साजिशें रची गईं

नीति में कहा गया है कि विदेशों की जमीन से काम करते हुए आतंकियों ने भारत में हिंसा फैलाने की साजिशें रची हैं। उनके संचालक (हैंडलर) ड्रोन समेत नई तकनीकों का इस्तेमाल कर पंजाब और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और हमलों को अंजाम देने में मदद करते हैं।

इसमें यह भी कहा गया है कि आतंकी संगठन अब तेजी से संगठित आपराधिक गिरोहों की मदद ले रहे हैं, ताकि लॉजिस्टिक सपोर्ट और भर्ती के जरिए भारत में आतंकी हमले कर सकें। प्रचार, आपसी संपर्क, फंडिंग और हमलों को दिशा देने के लिए ये आतंकी समूह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं।

आतंकवाद-विरोधी नीति में और क्या लिखा, 10 पॉइंट्स में पढ़िए

  • नीति में सरकार के साथ पूरे समाज की भागीदारी वाला तरीका अपनाने की बात कही गई है। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कट्टरपंथ जैसे हालात को खत्म करने पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।
  • इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति का मुख्य मकसद भारतीय नागरिकों और देश के हितों की रक्षा के लिए आतंकी हमलों को रोकना है। इसके अलावा खतरे के मुताबिक तेज और संतुलित जवाब देना है।
  • नीति में कहा गया है कि आतंक के खिलाफ सरकार के अलग-अलग विभागों की ताकत को मिलाकर काम करना है। खतरों से निपटने के लिए मानवाधिकार और कानून आधारित प्रक्रियाएं अपनानी हैं।
  • कट्टरपंथ समेत आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कारणों को कम करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ प्रयासों में तालमेल बैठाना भी आतंकवाद-विरोधी नीति का हिस्सा है।
  • नीति में कहा गया है कि भारत सक्रिय और खुफिया जानकारी पर आधारित रणनीति अपनाता है। इसमें मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) की अहम भूमिका है।
  • इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के तहत काम करने वाली जॉइंट टास्क फोर्स ऑन इंटेलिजेंस (JTFI) का भी जिक्र है, जो देशभर में रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त कार्रवाई के लिए काम करते हैं।
  • प्रहार में सरकार ने कहा है कि भारत को पानी, जमीन और हवा—तीनों मोर्चों पर आतंकी खतरे का सामना है। सीमा सुरक्षा बल आधुनिक तकनीक और उपकरणों से लैस हैं।
  • बिजली, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए क्षमता बढ़ाई गई है।
  • नीति में अल-कायदा और ISIS जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों के खतरे का भी जिक्र है। इसमें एन्क्रिप्शन, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट जैसी तकनीकों को भी चुनौती बताया गया है।
  • इसमें कहा गया है कि CBRNED (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु, विस्फोटक और डिजिटल) सामग्री तक पहुंच रोकना अभी भी बड़ी चुनौती है।

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