दो दिन रहेगी मार्गशीर्ष अमावस्या:  19 नवंबर की दोपहर में करें पितरों के लिए धूप-ध्यान, 20 तारीख की सुबह करें दान-पुण्य
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दो दिन रहेगी मार्गशीर्ष अमावस्या: 19 नवंबर की दोपहर में करें पितरों के लिए धूप-ध्यान, 20 तारीख की सुबह करें दान-पुण्य

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9 घंटे पहले

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बुधवार, 19 नवंबर और गुरुवार, 20 नवंबर को मार्गशीर्ष अमावस्या है, इसे अगहन अमावस्या भी कहते हैं। इस बार तिथियों की घट-बढ़ की वजह से ये तिथि दो दिन है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा था कि मार्गशीर्ष मास उनका ही स्वरूप है। इस वजह से ये महीना श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए बहुत खास है। इस महीने में रोज श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है, भक्त मथुरा, वृंदावन, गोकुल गोवर्धन पर्वत, बरसाना की यात्रा करते हैं, यमुना नदी में स्नान करते हैं। मार्गशीर्ष अमावस्या पर कृष्ण पूजा के साथ ही पितरों के लिए धूप-ध्यान भी करना चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, अमावस्या तिथि 19 नवंबर की सुबह 09:43 बजे शुरू होगी और 20 नवंबर की दोपहर 12:16 बजे खत्म होगी। पितृ कर्म जैसे श्राद्ध और तर्पण 19 नवंबर की दोपहर में करें और 20 नवंबर पर नदी स्नान और दान-पुण्य कर सकते हैं।

ऐसे सकते हैं पितरों के लिए धूप-ध्यान

  • पितरों के लिए धूप-ध्यान दोपहर में करीब 12 बजे करना चाहिए। इस समय को कुतुप काल कहते हैं। इस काल के स्वामी पितर देव माने गए हैं। सुबह-शाम देवी-देवताओं की पूजा और दोपहर में पितरों से जुड़े धर्म-कर्म करना चहिए।
  • दोपहर में घर में किसी शांत और पवित्र स्थान आसन बिछाएं। आसन पर बैठें और पितरों का ध्यान करते हुए धूप-दीप जलाएं। दीपक में तिल का तेल डालना चाहिए।
  • पितरों का ध्यान करते हुए धूप-ध्यान करने का संकल्प लें। जैसे- मैं आज अमावस्या के अवसर पर अपने पितरों का स्मरण और धूप–ध्यान कर रहा हूं।
  • संकल्प के बाद गाय के गोबर से बने कंडे (उपले) जलाएं और जब कंडों से धुआं निकलना बंद हो जाए, तब अंगारों पर गुड़-घी अर्पित करें। इस दौरान पितरों के मंत्र ऊँ पितृदेवेभ्यो नम: का जप करते रहना चाहिए। हथेली में जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों को चढ़ाएं।
  • धूप-ध्यान के अंत में पितरों से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें। इसके बाद घर के आसपास गाय, कुत्ते को भी रोटी खिलाएं। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।

अगहन अमावस्या पर करें ये शुभ काम

  • इस तिथि पर नदी स्नान और दान-पुण्य करने की परंपरा है। इस तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। अगर नदी स्नान करना संभव न हो तो घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। ऐसा करने से भी घर पर ही तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिल सकता है।
  • स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को अनाज, धन, जूते-चप्पल, कपड़े दान करना चाहिए।
  • किसी गौशाला में धन दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं।
  • किसी तालाब में मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं।

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