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- New Year 2026, Life Management Tips From Ramayana, Lord Shriram And Sita Story, Vanvas Story, An Opportunity To Change Your Thinking, Decisions, And Direction
4 घंटे पहले
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कल (1 जनवरी) 2026 का पहला दिन है। नया साल सोच, निर्णय और दिशा बदलने का अवसर लेकर आता है। नए साल में हम हर स्थिति के लिए सकारात्मक सोच के साथ रखें और मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार रहें, तभी जीवन में सुख-शांति प्राप्त कर पाएंगे। रामायण में भगवान राम का वनवास स्वीकार करना, एक ऐसी घटना है, जिसने हमें संदेश दिया है कि मुश्किल निर्णय लेते समय भी हमें धैर्य और सकारात्मकता जैसे गुण नहीं छोड़ने चाहिए।
अयोध्या में राम का राज्याभिषेक तय हो चुका था। पूरी अयोध्या में उत्सव मनाया जा रहा था। राम स्वयं भी राज्य की जिम्मेदारियों को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। राज्याभिषेक से ठीक पहले वाली रात मंथरा ने कैकयी की बुद्धि फेर दी और कैकेयी ने अपने दो वरदान मांग लिए- पहला राम को 14 वर्षों का वनवास और भरत को राज्य।
राजा दशरथ ने राम ये बात बताई तो राम बिल्कुल भी असहज, अशांत नहीं हुए। राम जी ने धैर्य बनाए रखा, जबकि ये बात राम के साथ ही पूरे परिवार और राज्य के लिए एक बड़ा झटका थी। राजा दशरथ शोक में डूब गए। लक्ष्मण क्रोधित हो गए और सीता भी राम के साथ वन जाने का आग्रह करने लगीं। उस समय राम के पास कई विकल्प थे, जैसे वे इस बात का विरोध कर सकते थे, राज्य स्वीकार कर सकते थे या स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ सकते थे। राम के पास सारे विकल्प खुले थे, लेकिन उन्होंने पिता के वचनों को पूरा करने का विकल्प चुना।
यही बात राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाती है। राम ने बिना किसी शिकायत के पिता की आज्ञा को सर्वोपरि रखा। उन्होंने न केवल वनवास स्वीकार किया, बल्कि परिवार और प्रजा को भी धैर्य-संयम रखने का संदेश दिया।
वनवास का जीवन आसान नहीं था। जंगल, कठिन परिस्थितियां, अनिश्चित भविष्य, फिर भी राम ने हर चुनौती को सकारात्मकता के साथ अवसर माना। वनवास के दौरान राम का चरित्र और नेतृत्व निखरा। ऋषियों की रक्षा, वनवासियों से मुलाकात और अंततः रावण जैसे अहंकारी राजा का वध करके राम अयोध्या लौट आए।
नया साल भी हमारे जीवन में नए अवसर लेकर आता है। कई बार हमें ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं जो तत्काल सुख नहीं देते, लेकिन भविष्य में हमारे लिए लाभदायक सिद्ध होते हैं। राम का वनवास हमें सीख देता है कि जीवन प्रबंधन केवल लक्ष्य पाने का नाम नहीं है, बल्कि निस्वार्थ भाव से सही काम करने के साथ कठिन रास्तों पर चलने की क्षमता विकसित करना है।
नए साल में अपनाएं रामायण के ये सूत्र
शॉर्टकट नहीं, सही रास्ता चुनें
राम चाहते तो सत्ता स्वीकार कर सकते थे, लेकिन उन्होंने धर्म का रास्ता चुना। नए साल में लक्ष्य तय करते समय ये सोचें कि सफलता कैसे मिल रही है। सफलता के लिए शॉर्टकट नहीं सही रास्ता चुनने का संकल्प लें।
- संयम बनाए रखें
राम ने गुस्से, दुख और अन्याय के बाद भी संयम नहीं छोड़ा। जीवन में अपनी भावनाओं को समझना और नियंत्रित करना जरूरी है, तभी मुश्किल हालात में भी हम संयमित रह पाते हैं।
- जिम्मेदारियों से भागें नहीं
वनवास राम की पसंद नहीं था, लेकिन उन्होंने इस जिम्मेदारी को बोझ नहीं बनने दिया और इसे सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार किया। नए साल में कठिन परिस्थितियों, जिम्मेदारियों से बचने के बजाय उन्हें स्वीकार करना सीखें।
- संकट को अवसर में बदलें
वनवास से राम का व्यक्तित्व और अधिक निखरा। हमें ध्यान रखना चाहिए कि असफलता, रिजेक्शन और बदलाव हमारे लिए खुद को निखारने का अवसर होते हैं।
- सही लोगों को साथ रखें
वनवास के दिनों में सीता और लक्ष्मण का साथ राम की शक्ति बना। जीवन में सही लोगों को चुनना और उनके साथ तालमेल बनाना बहुत जरूरी है।
- लॉन्ग-टर्म विजन रखें
राम जानते थे कि 14 साल का त्याग अच्छे भविष्य की नींव रखेगा, इसी सकारात्मक सोच के साथ उन्होंने वनवास स्वीकार किया। नए साल में हमें भी त्वरित परिणामों पर नहीं, लॉन्ग-टर्म विकास पर ध्यान देना चाहिए।








