नवरात्रि में शक्तिपीठों के दर्शन और पूजन करने की परंपरा:  जहां-जहां गिरे देवी सती के अंग, वहां-वहां प्रकट हुए हैं शक्तिपीठ, जानिए पूरी कथा
जीवन शैली/फैशन लाइफस्टाइल

नवरात्रि में शक्तिपीठों के दर्शन और पूजन करने की परंपरा: जहां-जहां गिरे देवी सती के अंग, वहां-वहां प्रकट हुए हैं शक्तिपीठ, जानिए पूरी कथा

Spread the love


13 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

मां दुर्गा की आराधना का उत्सव नवरात्रि चल रहा है। इस साल शारदीय नवरात्रि 9 नहीं, 10 दिनों की है, क्योंकि इस बार आश्विन शुक्ल चतुर्थी तिथि दो दिन है। देवी पूजा के इस उत्सव में शक्तिपीठों के दर्शन, पूजन करने की परंपरा है।

देवी सती को समर्पित हैं शक्तिपीठ

  • विवाह और यज्ञ: माता सती का विवाह भगवान शिव से हुआ था। उनके पिता, प्रजापति दक्ष, शिव को पसंद नहीं करते थे। उन्होंने एक बड़े यज्ञ का आयोजन किया और सभी देवी-देवताओं को बुलाया, लेकिन शिव और सती को आमंत्रित नहीं किया।
  • सती का यज्ञ में जाना: नारद जी से यज्ञ के बारे में पता चलने पर सती वहां जाने के लिए तैयार हो गईं। शिव के मना करने पर भी वे बिना बुलाए ही अपने पिता के घर चली गईं।
  • शिव का अपमान और सती का योग अग्नि से देह त्यागना: यज्ञ स्थल पर पहुंचने पर सती ने देखा कि उनके पति शिव को छोड़कर सभी को बुलाया गया है। जब उन्होंने अपने पिता से इसका कारण पूछा, तो दक्ष ने शिव का अपमान किया। शिव का अपमान सहन न कर पाने पर सती ने उसी यज्ञ की हवन कुंड में योग अग्नि से अपनी देह त्याग दी।
  • शिव का क्रोध: सती की मृत्यु का समाचार सुनकर शिव बहुत क्रोधित हुए और उनका तीसरा नेत्र खुल गया। उनके गण वीरभद्र ने दक्ष का सिर काट दिया, लेकिन बाद में शिव जी ने दक्ष को फिर से जीवनदान दे दिया था।
  • शक्तिपीठों का निर्माण: सती के वियोग में शिव देवी सती का जला हुआ शरीर लेकर पूरे ब्रह्मांड में घूमने लगे। शिव जी देवी सती के मोह में फंसे हुए थे। भगवान विष्णु ने सोचा कि जब तक देवी सती की देह शिव जी के साथ रहेगी, इनका दुख कम नहीं होगा। शिव जी को सती के मोह से दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 टुकड़ों में काट दिया। ये टुकड़े जहां-जहां गिरे, वहां-वहां 51 शक्तिपीठों की स्थापना हुई। इसके बाद भगवान शिव ध्यान में बैठ गए। बाद में जब देवी ने पार्वती के रूप में दूसरा जन्म लिया, तब भगवान का ध्यान भंग होने के बाद शिव-पार्वती का विवाह हुआ।

जानिए 51 शक्तिपीठों के बारे में…

देवी पुराण में 51 शक्तिपीठों का जिक्र है। शक्तिपीठांक के अनुसार 42 शक्तिपीठ भारत में हैं। 3 बांग्लादेश में, 1 पाकिस्तान में, 2 नेपाल में, 1 श्रीलंका में और 1 तिब्बत में है। इस प्रकार 50 शक्तिपीठ हो गए और शेष 1 शक्तिपीठ पंचसागर कहां स्थित है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

1. कश्मीर : जम्मू-कश्मीर के अमरनाथ में माता सती का गला (कंठ) गिरा था, लेकिन अमरनाथ को प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल नहीं किया गया है। इसके बजाय, कश्मीर के शक्तिपीठ के रूप में महामाया शक्तिपीठ को मान्यता दी गई है। महामाया शक्तिपीठ का सही स्थान कश्मीर के वैष्णो देवी मंदिर के पास माना जाता है, जहां माता सती का गला गिरा था। यहां माता का कंठ गिरा था।

2. कात्यायनी : कात्यायनी शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में, वृंदावन के भूतेश्वर मंदिर के पास स्थित है। यहां देवी का केशपाश गिरा था।

3. विशालाक्षी : विशालाक्षी शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश के वाराणसी में प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट के पास स्थित है। दाहिने कान के मणि गिरे थे।

4. प्रयाग : प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) में एक शक्तिपीठ स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वह स्थान है जहां माता के हाथ की उंगलियां गिरी थीं।

5. ज्वालामुखी : हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक प्रमुख शक्तिपीठ स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां सती का जिह्वा गिरी थी।

6. जालंधर : पंजाब के जालंधर में शक्तिपीठ स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वह स्थान है जहाँ माता सती का बायां स्तन गिरा था।

7. देवीकूप पीठ : हरियाणा के कुरुक्षेत्र के निकट द्वैपायन सरोवर के पास एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ स्थित है। इस पीठ को श्रीदेवीकूप भद्रकाली पीठ के नाम से जाना जाता है। यहां माता का दहिना चरण गिरा था।

8. पटनेश्वरी : बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटनेश्वरी देवी मंदिर को एक शक्तिपीठ माना जाता है। यह वह स्थान है जहां माता सती की दाहिनी जांघ गिरी थी। इसी कारण पटना का नाम भी ‘पटनेश्वरी’ देवी के नाम पर पड़ा, जिसका अर्थ है देवी का शहर।

9. मानस शक्तिपीठ: मानस शक्तिपीठ तिब्बत में मानसरोवर झील के तट पर स्थित है। माता की दाहिनी हथेली गिरी थी।

10. करवीर : महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर को प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, यह वह स्थान है, जहां माता सती की दाईं आंख गिरी थी। यहां महालक्ष्मी का निवास माना जाता है।

11. जनस्थान : महाराष्ट्र के नासिक में स्थित पंचवटी को एक शक्तिपीठ माना जाता है। यहां माता की ठोड़ी गिरी थी।

12. अम्बाजी : गुजरात के बनासकांठा जिले में प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर को शक्तिपीठ माना जाता है। यहां माता का दिल गिरा था। कुछ ग्रंथों में जूनागढ़ के गिरनार पर्वत के शक्तिपीठ होने और उदर गिरने की मान्यता है।

13. मणिवेदिका : राजस्थान के पुष्कर में स्थित गायत्री मंदिर को एक शक्तिपीठ माना जाता है। यहां कलाइयां गिरी थीं।

14. विराट का अंबिका : राजस्थान के जयपुर के पास स्थित विराटग्राम (वर्तमान में बैराठ) में एक शक्तिपीठ स्थित है। यहां सती के दाएं पैर की उंगलियां गिरी थीं।

15. गोदावरी तट : आंध्र प्रदेश के कब्बूरा गांव में गोदावरी नदी के तट पर शक्तिपीठ स्थित है। यहां माता का बायां कपोल गिरा था।

16. शुचि शक्तिपीठ : तमिलनाडु के कन्याकुमारी में स्थित त्रिसागर संगम स्थल पर एक शक्तिपीठ है। यहां सती के दांत गिरे थे।

17. श्री शैल : श्री शैल शक्तिपीठ आंध्र प्रदेश के कुर्नूल जिले के पास स्थित है। माता की ग्रीवा गिरी थी।

18. कांची : तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित कामाक्षी अम्मन मंदिर को एक प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। यहां माता का कंकाल गिरा था।

19. कन्यकाश्रम कन्याकुमारी : तमिलनाडु के कन्याकुमारी के तीन सागरों हिन्द महासागर, अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी के संगम पर। यहां माता का पीठ का भाग गिरा था। इस संबंध कुछ मतभेद भी हैं। कुछ लोग मानते हैं कि यहां देवी के दांत गिरे थे।

20. किरीट : यह शक्तिपीठ हावड़ा बाहरवां रेलवे लाइन पर हावड़ा के पास हुगली नदी के तट लालबाग कोट पर स्थित है। यहां किरीट यानी शिरोभूषण या मुकुट गिरा था।

21. अट्टहास : पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में लाबपुर में है। यहां देवी के होंठ का नीचे वाला हिस्सा गिरा था।

22. नन्दीपुर : नन्दीपुर शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में सैंथिया नामक स्थान पर स्थित है। यहां कंठहार गिरा था।

23. नलहटी : नलहटी शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में नलहटी शहर में स्थित है। यहां देवी की उदरनली गिरी थी।

24. बहुला : पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्दवान जिले में केतुग्राम के पास स्थित है, जो कटवा जंक्शन से कुछ दूरी पर है। यहां माता का वाम बाहु गिरा था।

25. त्रिस्तोता : जलपाइगुड़ी के शालवाड़ी गांव में तीस्ता नदी पर। यहां माता का वामपाद गिरा था।

26 . विभाष : विभाष शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में स्थित है, जिसे बोलचाल की भाषा में मिदनापुर भी कहते हैं। यहां वाम टखना गिरा था।

27. युगाद्या : ये शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्दवान जिले में क्षीरग्राम नामक स्थान पर स्थित है। यहां सती के दाहिने चरण का अंगूठा गिरा था।

28. कालीघाट : कालीघाट शक्तिपीठ कोलकाता, पश्चिम बंगाल में स्थित है और यह काली मंदिर के नाम से बेहद प्रसिद्ध है। यहां दाएं पांव का अंगूठा छोड़ 4 अन्य अंगुलियां गिरी थीं।

29. वक्रेश्वर : वक्रेश्वर शक्तिपीठ पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पापहर नदी के किनारे स्थित है। यहां मन गिरा था।

30. कामाख्या : कामाख्या शक्तिपीठ असम के गुवाहाटी में नीलाचल पर्वत (जिसे कामगिरि पर्वत भी कहते हैं) पर स्थित है। यहां योनिदेश गिरा था।

31. जयन्ती : जयन्ती शक्तिपीठ मेघालय में जयन्तिया पहाड़ियों पर स्थित है। वाम जंघा गिरी थी।

32. त्रिपुरसुन्दरी : त्रिपुरसुन्दरी शक्तिपीठ त्रिपुरा के गोमती जिले में उदयपुर के पास राधाकिशोरपुर गांव में स्थित है। जहां माता का दांया पैर गिरा था।

33. विरजाक्षेत्र : विरजाक्षेत्र शक्तिपीठ ओडिशा के जाजपुर शहर में स्थित है। जाजपुर को पुराने समय में विरजाक्षेत्र के नाम से जाना जाता था। यहां माता की नाभि गिरी थी।

34. वैद्यनाथ : वैद्यनाथ शक्तिपीठ झारखंड के देवघर में स्थित है, यहां माता का हृदय गिरा था। मान्यता है कि यहीं सती का दाह-संस्कार भी हुआ था।

35. हरसिद्धि : हरसिद्धि शक्तिपीठ मध्य प्रदेश के उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। माता की कोहनियां गिरी थीं।

36. शोण : मध्य प्रदेश के अमरकंटक का नर्मदा मंदिर। यहां माता का दक्षिण नितंब गिरा था। एक मान्यता ये भी है कि बिहार के सासाराम का ताराचंडी मन्दिर ही शोण तटस्था शक्तिपीठ है।

37. लंका : श्रीलंका में। यह वह स्थान है जहां माता सती के नूपुर (पायल) गिरे थे। ये ठीक-ठीक ज्ञात नहीं है कि श्रीलंका में ये किस स्थान पर गिरे थे, लेकिन कई मान्यताएं इसे त्रिंकोमाली के पास होने का संकेत देती हैं।

38. गण्डकी : गण्डकी शक्तिपीठ नेपाल में गण्डकी नदी के तट पर स्थित है, जिसे पवित्र मुक्तिनाथ धाम के पास माना जाता है। सती के कपोल यानी गाल गिरे थे।

39. गुह्येश्वरी : गुह्येश्वरी शक्तिपीठ नेपाल की राजधानी काठमांडू में प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर के पास स्थित है। यहां देवी के दोनों घुटने गिरे थे।

40. हिंगलाज : हिंगलाज शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगोल नदी के किनारे एक गुफा में स्थित है। माता का ब्रह्मरन्ध्र यानी सिर का ऊपरी हिस्सा गिरा था।

41. सुगंध : सुगंधा शक्तिपीठ बांग्लादेश के खुलना जिले में सुगंधा नदी के तट पर स्थित है। यहां माता का नासिका गिरी थी।

42. करतोयाघाट : करतोयाघाट शक्तिपीठ बांग्लादेश के बोगरा जिले में, भवानीपुर गांव के पास करतोया नदी के तट पर स्थित है। माता का बाएं पैर की पायल गिरी थी।

43. चट्टल : चट्टल शक्तिपीठ बांग्लादेश के चटगांव में स्थित है। यहां दाहिनी भुजा गिरी थी।

44. यशोर : यशोरेश्वरी शक्तिपीठ बांग्लादेश के जैसोर जिले में स्थित है। यहां बायीं हथेली गिरी थी।

45. श्री पर्वत : कुछ विद्वानों का मानना है कि इस पीठ का मूल स्थल लद्दाख है, कुछ का मानना है कि यह असम के सिलहट में है। यहां माता सती के दाहिने पैर की पायल गिरी थी।

46. पंच सागर : इस शक्तिपीठ का कोई निश्चित स्थान ज्ञात नहीं है। यहां देवी के नीचे वाले दांत गिरे थे।

47. भैरव पर्वत : दो मान्यताएं हैं। पहली मान्यता- कुछ ग्रंथों के अनुसार, यह शक्तिपीठ गुजरात के जूनागढ़ में स्थित गिरनार पर्वत के निकट है। दूसरी मान्यता- अन्य मान्यताओं के अनुसार, ये मध्य प्रदेश के उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यहां देवी का ऊपरी होंठ गिरा था।

48. मिथिला : एक मान्यता के अनुसार, यह नेपाल के जनकपुर में स्थित है, जहां माता सीता का जन्म हुआ था। अन्य मान्यताओं के अनुसार, यह बिहार के समस्तीपुर और सहरसा जिलों में स्थित है। यहां देवी का बायां नैत्र गिरा था।

49. रत्नावली : यह एक ऐसा शक्तिपीठ है, जिसका कोई निश्चित या सर्वमान्य स्थान ज्ञात नहीं है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह तमिलनाडु के चेन्नई के आसपास स्थित है। हालांकि, कुछ अन्य ग्रंथों में इसका उल्लेख महाराष्ट्र या बंगाल में रत्नाकर नदी के तट पर भी मिलता है। यहां देवी का कंधा गिरा था।

50. कालमाधव : इस शक्तिपीठ के बारे कोई निश्चित स्थान ज्ञात नहीं है। इस शक्तिपीठ पर देवी का बायां नितंब गिरा था।

51.रामगिरि : इस शक्तिपीठ के स्थान की कई मान्यताएं हैं। कुछ मान्यताओं मध्य प्रदेश का मैहर ये शक्तिपीठ माना जाता है। हालांकि, कुछ अन्य मान्यताएं इसे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित चित्रकूट से भी जोड़ती हैं। यहां देवी का स्तन गिरा था।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *