अदालत में गवाही देने आइए, दिन भर वक्त दीजिए, धमकियां झेलिये और बदले में पाइए सिर्फ पांच रुपये। 50 साल पहले बनी उत्तर प्रदेश परिवादी और साक्षी दंड न्यायालय व्यय भुगतान नियमावली आज भी जस की तस है। 2.63 लाख आपराधिक मामलों के बोझ तले दबी न्याय व्यवस्था में गवाह ही सबसे अहम कड़ी हैं, लेकिन उसकी कीमत आज भी चाय समोसे से कम है। सरकारी गवाह तो विभाग से टीए डीए लेते हैं, लेकिन सामान्य गवाहों ने इस तरफ ध्यान देना ही छोड़ दिया है। पांच से आठ रुपये के लिए कौन समय बर्बाद करे। बता दें कि किसी ना किसी मामले में रोज 30-35 गवाह कचहरी आते हैं।
अदालत में गवाही देने के लिए भत्ता वही है जब आज के 50 साल पहले उत्तर प्रदेश परिवादी एवं साक्षी दंड न्यायालय व्यय भुगतान नियमावली 1976 बनी। उत्तर प्रदेश में गवाही देने आने वाले आम लोगों को सरकार की ओर से मिलने वाला भत्ता आज भी 1976 के नियमों पर चल रहा है। इन वर्षों में महंगाई करीब 15 गुना बढ़ी है, लेकिन गवाहों को आज भी अच्छी चाय से भी कम पैसे में दिन गुजारना पड़ता है।
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नियमों के मुताबिक सामान्य गवाह को अदालत आने-जाने के लिए सेकंड क्लास ट्रेन किराया और केवल 5 या आठ रुपये प्रतिदिन खाना भत्ता दिया जाता है। वहीं, विशेष गवाह को फर्स्ट क्लास किराया दिया जाता है। अधिवक्ता मिलिंद श्रीवास्तव ने कहा कि पूरी कानूनी प्रक्रिया जिस गवाह की बदौलत पूरी होती है उसे आज के समय में पांच से दस रुपये मिलना न केवल चिंता का विषय है बल्कि शासन को इस दिशा में सुधार की जरूरत है।