पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  शास्त्रों की बात से भ्रम हो तो उसके संदर्भ को समझें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: शास्त्रों की बात से भ्रम हो तो उसके संदर्भ को समझें

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3 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

कभी-कभी शास्त्रों में ऐसी बात आ जाती है कि लोग भ्रम में पड़ जाते हैं। ऐसे में उसके आगे-पीछे की पंक्तियों को पढ़कर संदर्भ ठीक से समझना चाहिए। रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने लिखा है- ‘उपरोहित्य कर्म अति मंदा। बेद पुरान सुमृति कर निंदा’ यानी पुरोहिती कर्म बहुत ही नीचा है।

वेद, पुराण और स्मृति इसकी निंदा करते हैं। आज जो लोग पुरोहिती का काम करते हैं उनके लिए तो ये चिंता का विषय है। ये बात श्रीराम से गुरु वशिष्ठ ने कही थी। लेकिन उन्होंने इसके बाद ये भी कहा- पुरोहित कर्म बुरा नहीं है।

वे कहते हैं मैंने हृदय में विचार किया, जिसके लिए योग, यज्ञ, व्रत और दान किए जाते हैं। उसे मैं इसी कर्म से पाऊंगा। इसके समान कोई दूसरा धर्म भी नहीं है, ब्रह्मा जी ने मुझे प्रेरित किया और राम मैंने आपको पा लिया। पुरोहित कर्म से ईश्वर को पा सकते हैं। ईश्वर को हम जो भी नाम दें। पर परमात्मा जीवन में उतर आए तो इससे बड़ी क्या उपलब्धि होगी।

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