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- Column By Pt. Vijayshankar Mehta Be Aware Of Your Body, Mind And Soul In Every Journey
24 मिनट पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
हम तीन बातों से बने हैं- शरीर, मन और आत्मा। शरीर पर टिककर शांति नहीं मिलती, मन उपद्रवों का केंद्र है, सुकून आत्मा पर मिलता है। श्रीराम की स्तुति करते हुए नारदजी ने कहा था- भूसुर ससि नव बृंद बलाहक। असरन सरन दीन जन गाहक।। ब्राह्मणरूपी खेती के लिए आप नए मेघसमूह हैं तथा शरणहीनों को शरण देने वाले और दीनजनों को अपने आश्रय में ग्रहण करने वाले हैं।
तीन बातें नारद जी ने कही हैं। पहली शरीर के लिए, दूसरी मन के लिए, तीसरी आत्मा के लिए। पिछले दिनों मैं तीन देशों की यात्रा पर था। नेपाल में शरीर की अनुभूति हुई और एक अजीब-सा अशांत वातावरण। ऑस्ट्रेलिया जाने पर पता लगा बिलकुल मन जैसा है।
80% लोग जुआ खेल रहे हैं और ऐसा आचरण कर रहे हैं, जो उचित नहीं। न्यूजीलैंड पहुंचकर पता लगा, आत्मा जैसी शांति है। सब कुछ सुस्त-सा है, लेकिन असीम शुद्धि बनी हुई है। आत्मा का लक्षण भी शुद्ध होना है। तो हमें भी अपनी हर यात्रा में शरीर, मन और आत्मा का भान बनाए रखना चाहिए।








