पितृ पक्ष 21 सितंबर तक:  दोपहर 12 बजे करना चाहिए पितरों के लिए धूप-ध्यान और श्राद्ध कर्म, जानिए पितृ पक्ष से जुड़ी मान्यताएं
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पितृ पक्ष 21 सितंबर तक: दोपहर 12 बजे करना चाहिए पितरों के लिए धूप-ध्यान और श्राद्ध कर्म, जानिए पितृ पक्ष से जुड़ी मान्यताएं

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2 घंटे पहले

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आज (7 सितंबर) भाद्रपद पूर्णिमा है और आज उन लोगों के लिए श्राद्ध कर्म किए जाएंगे, जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि पर हुई थी। कल यानी 8 सितंबर को पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि है, पितृ पक्ष 21 सितंबर तक चलेगा। इन दिनों में परिवार के मृत सदस्यों को याद किया जाता है और उनकी आत्म शांति के लिए धूप-ध्यान किए जाते हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दिनों में पितर देवता हमारे घर पधारते हैं और जो लोग उनके लिए धूप-ध्यान करते हैं, उन्हें वे आशीर्वाद देते हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पितृ पक्ष में परिवार के जाने-अनजाने सभी पूर्वजों के लिए धूप-ध्यान करना चाहिए। श्राद्ध कर्म से तृप्त होकर पितर देवता अपने धाम पितृ लोक लौटते हैं। पितर देव तृप्त होते हैं तो अपने वंशजों पर कृपा बरसाते हैं, इनकी कृपा से हमारी सभी समस्याएं खत्म होती हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

पितरों के लिए धूप-ध्यान दोपहर में करीब 12 बजे करना चाहिए, इस समय को कुतुप काल कहते हैं। ये समय पितरों के नाम पर धर्म-कर्म करने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। सुबह और शाम के समय में देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए।

जो लोग अपने पितरों के लिए धूप-ध्यान नहीं करते हैं, उनके पितर अतृप्त रहते हैं और दुखी होते हैं। दुखी पितर अपने वंशजों को शाप देते हैं। पितरों के शाप से बचने के लिए पितरों को याद करते हुए उनके नाम से धूप-ध्यान, पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य करना चाहिए।

पितरों की मृत्यु तिथि मालूम न हो तो क्या करें?

अगर घर-परिवार के पूर्वजों की मृत्यु तिथि मालूम न हो तो हमें पितृ पक्ष की सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या तिथि (21 सितंबर) पर जाने-अनजाने सभी पितरों के लिए धूप-ध्यान, पिंडदान और तर्पण आदि धर्म-कर्म करना चाहिए। इस तिथि उन मृत लोगों के लिए भी श्राद्ध कर सकते हैं, जिनकी मृत्यु तिथि पर हम किसी वजह से उनके लिए श्राद्ध कर्म करना भूल गए हैं।

पितृ पक्ष में कर सकते हैं ये शुभ काम

  • पितरों के नाम पर पितृ पक्ष में नदियों में स्नान करने की भी परंपरा है। स्नान के बाद नदी किनारे पर ही दान-पुण्य करें। नदी किनारे पितरों के लिए पिंडदान भी कर सकते हैं।
  • अगर नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें, इसके बाद धूप-ध्यान करें। हथेली में जल लेकर तर्पण करें। घर के आसपास जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं, अनाज, कपड़े, जरूरी चीजें दान करें।
  • पितृ पक्ष में पितरों के निमित्त गरुड़ पुराण और श्रीमद् भागवद महापुराण का पाठ कर सकते हैं। आप चाहें तो किसी संत के प्रवचन सुन सकते हैं।
  • किसी तालाब में मछिलयों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं।
  • पितृ पक्ष के दिनों में घर में साफ-सफाई और शांति बनाए रखनी चाहिए। मान्यता है कि जिन घरों में गंदगी रहती है, लड़ाई-झगड़े होते हैं, वहां पितरों को तृप्ति नहीं मिलती है।
  • इन दिनों में गुस्सा नहीं करना चाहिए। नशा और मांसाहार भी न करें। सभी तरह के अधार्मिक कामों से दूर रहना चाहिए। दूसरों के लिए बुरे विचार न रखें। कुत्ते, गाय और कौएं को परेशान न करें, इनके लिए भोजन और पानी की व्यवस्था जरूर करें।
  • पितरों के लिए धूप-ध्यान और दान-पुण्य कर रहे हैं तो खाने में लहसुन-प्याज का उपयोग करने से बचें। पितरों के धूप-ध्यान के लिए जो भोजन बनता है, वह सात्विक होना चाहिए।
  • पितरों के लिए तर्पण करते समय जल में गंगाजल, दूध, पानी, जौ, चावल भी मिलना चाहिए। पिंडदान के लिए पिंड बनाते समय चावल के साथ दूध और तिल का भी उपयोग करें।
  • पितृ पक्ष में रोज सुबह जल्दी उठना चाहिए। श्राद्ध करने के बाद पितरों से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा जरूर मांगें।
  • रोज शाम को पितरों का ध्यान करते हुए घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाना चाहिए।

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