34 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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सवाल- मैं हैदराबाद से हूं। मेरा एक 12 साल का बेटा है। उसके स्कूल से कई बार ये फीडबैक आया है कि आपका बेटा बहुत अलग-थलग और अकेला रहता है। उसके कोई दोस्त नहीं हैं। वह क्लास में ग्रुप एक्टिविटीज में भी बहुत ज्यादा पार्टिसिपेट नहीं करता है। लंच आवर्स में अक्सर अकेले टिफिन करता है।
हमने भी ये चीज नोट की है कि वह कभी भी अपने बर्थडे सेलिब्रेशन में दोस्तों को बुलाने की बात नहीं करता है। हालांकि हम उसके दोस्तों को बुलाते हैं, लेकिन वह उनके साथ बहुत अटैच्ड नहीं रहता है। मोहल्ले में भी उसकी बहुत ज्यादा दोस्ती भी नहीं हैं।
वैसे वह हर चीज में बहुत अच्छा है, समझदार है, शालीन है और पढ़ने में भी तेज है। लेकिन उसका इस उम्र में बहुत ज्यादा अलग-थलग व अकेले रहना हमें थोड़ा अलार्मिंग लगता है। ये सामान्य है या चिंता की बात है। कृपया हमें गाइड करिए।
एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर
जवाब- मैं आपकी चिंता को पूरी तरह समझ सकती हूं, लेकिन इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। आपका बेटा इंट्रोवर्ट हो सकता है, जो कि पर्सनैलिटी का एक हिस्सा है। इस उम्र में बच्चे अक्सर दोस्तों के साथ समय बिताना, ग्रुप एक्टिविटीज में भाग लेना और सोशल इंटरैक्शन से सीखना पसंद करते हैं।
हालांकि सभी बच्चे एक जैसे नहीं होते हैं। कुछ बच्चे एक्स्ट्रोवर्ट होते हैं, जो आसानी से दोस्त बना लेते हैं, जबकि कुछ इंट्रोवर्ट होते हैं, जो अकेले रहकर खुश रहते हैं। इंट्रोवर्ट बच्चे अक्सर किताबें पढ़ना, अकेले खेलना या परिवार के साथ समय बिताना पसंद करते हैं। यह बहुत सामान्य है।
आपके बेटे की बात करें तो उसका स्कूल में अकेले रहना, ग्रुप एक्टिविटीज में हिस्सा न लेना, लंच अकेले करना या बर्थडे पर दोस्तों से दूरी बनाना, इंट्रोवर्ट होने के संकेत हो सकते हैं। लेकिन अगर अलगाव लगातार बढ़ता जाए, बच्चा उदास, चिड़चिड़ा या स्कूल जाने से कतराने लगे तो यह सोशल आइसोलेशन का रूप ले सकता है।
ये तब होता है, जब बच्चा दोस्त न होने से दुखी तो होता है, लेकिन नए दोस्त बनाने की कोशिश नहीं करता है। यह स्थिति चिंता का कारण बन सकती है क्योंकि इस उम्र में सोशल स्किल्स का विकास न होना आगे चलकर उसके रिश्तों, आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है।
25-40% बच्चे इंट्रोवर्ट होते हैं
अगर आपका बेटा अकेले रहकर खुश है तो इसमें घबराने की बात नहीं है। कई बच्चे ऐसे होते हैं, जो ग्रुप्स में असहज महसूस करते हैं, लेकिन परिवार या 1-2 करीबी दोस्तों के साथ खुश रहते हैं। साइकोलॉजिकल रिसर्च बताती हैं कि करीब 25-40% बच्चे इंट्रोवर्ट होते हैं। वे अकेले समय बिताकर रिचार्ज होते हैं, जबकि एक्स्ट्रोवर्ट सोशल इंटरैक्शन से। आपका बेटा पढ़ाई में अच्छा है, शालीन है और घर में खुश रहता है तो यह उसकी इंट्रोवर्ट पर्सनैलिटी का हिस्सा हो सकता है। आइए बच्चे के इंट्रोवर्ट होने के पीछे के कारण को समझते हैं।

बच्चे के व्यवहार में बदलाव को करें नोटिस
इंट्रोवर्ट पर्सनैलिटी होना कोई खराब बात नहीं है। यह सिर्फ एक स्वभाव है। लेकिन अगर यह बच्चे की खुशी, आत्मविश्वास या स्कूल परफॉर्मेंस को प्रभावित करने लगे तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। लंबे समय तक अनदेखा करने पर यह स्थिति डिप्रेशन या सोशल फोबिया का रूप ले सकती है। ऐसे में जरूरी है कि आप समय रहते बच्चे में दिखने वाले कुछ संकेतों को आइडेंटिफाई करें।

इंट्रोवर्ट पर्सनैलिटी वाले बच्चे की मदद कैसे करें
इसका जवाब है, उसे बदलने की कोशिश न करें, बल्कि उसे समझें और स्वीकार करें। बच्चे को उसके कंफर्ट जोन से धीरे-धीरे बाहर लाने की कोशिश करें, न कि दबाव डालकर। उसे छोटे-छोटे सोशल एक्सपीरियंस दें। जैसे ग्रुप एक्टिविटी में शामिल करना, किसी भरोसेमंद दोस्त के साथ खेलने देना या फैमिली गैदरिंग में भाग लेने के लिए प्रेरित करना। सबसे जरूरी है कि वह यह महसूस करे कि आप उसकी भावनाओं को समझते हैं और बिना जज किए उसका साथ दे रहे हैं। बच्चे को सोशल बनाने के लिए नीचे दिए कुछ आसान टिप्स को फॉलो कर सकते हैं।

इसके अलावा कुछ और बातों का ध्यान रखें।
पेरेंट्स अपने व्यवहार पर ध्यान दें
अक्सर बच्चों का अकेलापन घर के माहौल से शुरू होता है। अगर माता-पिता हमेशा व्यस्त रहते हैं या इमोशनली कम अटैच्ड होते हैं तो बच्चा खुद को अलग-थलग महसूस करने लगता है। याद रखें सोशल आइसोलेशन से मेंटल हेल्थ इश्यू बढ़ सकते हैं, लेकिन शुरुआती हस्तक्षेप से स्थिति सुधर सकती है। अपने बच्चे से बातचीत करें, उसे सुनें और साथ समय बिताएं। सही गाइडेंस से वह धीरे-धीरे खुलने लगेगा।
दोस्त बनाने में मदद करें
इंट्रोवर्ट बच्चों के लिए दोस्त बनाना आसान नहीं होता है। पेरेंट्स इसमें बच्चे की मदद कर सकते हैं। छोटे ग्रुप में सामाजिक अवसर देने की कोशिश करें, जैसे बर्थडे पार्टी या घर पर खेल-खेल में दोस्तों को बुलाना। इससे बच्चा धीरे-धीरे दूसरों के साथ संवाद करना सीखता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
साथ ही बच्चे की सफलताओं और छोटे प्रयासों की सराहना करें। जब बच्चा नए दोस्त बनाने या किसी एक्टिविटी में हिस्सा लेने का प्रयास करता है तो उसे प्रोत्साहित करें। यह उसका आत्मविश्वास बढ़ाता है और उसे सोशल इंटरैक्शन में मदद करता है।
स्क्रीन टाइम का संतुलन बनाएं
मोबाइल, टीवी या गेम्स में जरूरत से ज्यादा समय बिताना बच्चे को और अलग-थलग कर सकता है। इसलिए डिजिटल टाइम लिमिट तय करें और उसे रोजाना कुछ समय आउटडोर एक्टिविटीज या खेलों में शामिल करें। यह न केवल मूड बेहतर करेगा बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाएगा।
जरूरत हो तो प्रोफेशनल मदद लें
अगर बच्चा लंबे समय से उदास, चुप या सोशली कम एक्टिव लग रहा है तो झिझकें नहीं। चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट या काउंसलर से सलाह लें। शुरुआती हस्तक्षेप बच्चे के भीतर की भावनाओं को बाहर लाने में मदद करता है और उसे फिर से लोगों से जुड़ने का आत्मविश्वास देता है।
इंट्रोवर्ट बच्चे की पेरेंटिंग में न करें ये गलतियां
इंट्रोवर्ट बच्चों की परवरिश में ज्यादा धैर्य की जरूरत होती है। अक्सर पेरेंट्स अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो बच्चे को और ज्यादा अंदर की ओर धकेल देती हैं। ऐसे में कुछ गलतियों से जरूर बचना चाहिए।

अंत में यही कहूंगी कि हर बच्चा अलग होता है और उसका अपना अनोखा स्वभाव, रुचियां और विकास की गति होती है। कोई बच्चा जल्दी खुलता है तो कोई धीरे-धीरे अपने आसपास के लोगों और माहौल के साथ सहज होता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने बच्चों को उनकी पर्सनैलिटी और क्षमताओं के अनुसार समझें, उन्हें उनके तरीके से सीखने और बढ़ने दें। धैर्यपूर्वक उनका मार्गदर्शन करें, छोटी-छोटी सफलताओं की तारीफ करें और हमेशा उन्हें प्रोत्साहित करें। इससे बच्चा धीरे-धीरे सोशली भी एक्टिव होने लगेगा। यही सही परवरिश का असली मंत्र है।
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