प्रेरक कथा: गुस्से की वजह से टूट जाते हैं रिश्ते:  संत की सीख – झगड़े की जड़ गुस्सा है, अगर कोई एक व्यक्ति शांत रहे, तो झगड़ा बढ़ता नहीं है
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प्रेरक कथा: गुस्से की वजह से टूट जाते हैं रिश्ते: संत की सीख – झगड़े की जड़ गुस्सा है, अगर कोई एक व्यक्ति शांत रहे, तो झगड़ा बढ़ता नहीं है

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15 घंटे पहले

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गुस्सा एक ऐसी बुरी आदत है, जो पल भर में रिश्तों को तोड़ देती है। ये बात एक लोक कथा से समझ सकते हैं। पुराने समय में एक संत भिक्षा मांगते हुए एक सेठ के घर पहुंचे। सेठ धार्मिक स्वभाव का था। उसने आदर से संत को एक चावल दान में दे दिया। दान देने के बाद सेठ ने विनम्रता से कहा कि गुरुदेव, मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं।

संत बोले कि ठीक है, पूछो क्या पूछना चाहते हो?

सेठ ने कहा कि गुरुजी, लोग लड़ाई-झगड़ा क्यों करते हैं?

संत ने अचानक कठोर आवाज में कहा कि मैं यहां भिक्षा लेने आया हूं, तुम्हारे बेकार सवालों का जवाब देने नहीं।

संत के मुंह से ऐसा सुनते ही सेठ का चेहरा लाल हो गया। उसे बहुत बुरा लगा। वह सोचने लगा कि मैंने इन्हें दान दिया और ये मुझसे ऐसे बात कर रहे हैं।

सेठ का गुस्सा बढ़ गया और उसने संत को खूब खरी-खोटी सुना दी। आवाज ऊंची हो गई, शब्द कठोर हो गए।

कुछ देर बाद जब सेठ का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ, तब संत मुस्कुराए और बोले कि तुमने अभी पूछा था कि लोग झगड़ा क्यों करते हैं। जैसे ही मैंने तुम्हें कुछ बुरा कहा, तुम्हें गुस्सा आ गया। तुम मुझ पर चिल्लाने लगे। अगर मैं भी तुम्हारी तरह गुस्सा करता, तो बात यहीं से झगड़े में बदल जाती।

सेठ चुप हो गया। उसे अपनी गलती समझ में आने लगी।

संत ने समझाया कि झगड़े की जड़ गुस्सा है। अगर दो पक्षों में से कोई एक भी शांत रहे, तो झगड़ा बढ़ता नहीं है। गुस्से में हम सही-गलत नहीं सोच पाते। छोटी बात बड़ी बन जाती है।

सेठ ने संत से माफी मांगी और संकल्प लिया कि वह आगे से अपने गुस्से पर काबू रखेगा।

किस्से की सीख

इस छोटी सी घटना ने सेठ को जीवन की बड़ी सीख दी- गुस्से में नहीं, धैर्य में ताकत होती है। हमें भी गुस्से को काबू करना चाहिए और हर स्थिति धैर्य बनाए रखना चाहिए। गुस्सा काबू करना चाहते हैं, तो ये बातें आपके काम आ सकती हैं…

  • रुक कर सोचें

जब भी गुस्सा आए, तुरंत जवाब न दें। कुछ बोलने से पहले सोच-विचार जरूर करें। थोड़ा रुकने से दिमाग शांत होता है और गलत शब्द मुंह से नहीं निकलते।

  • गहरी सांसें लें

4-5 बार लंबी गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। इससे दिल की धड़कन सामान्य होती है और मन शांत हो जाता है।

  • जगह बदल लें

अगर माहौल ज्यादा ही गरम हो रहा है, तो कुछ देर के लिए वहां से हट जाएं। थोड़ी सी दूरी कई बार बड़ी लड़ाई को रोक देती है।

  • अपनी बात शांत तरीके से रखें

चिल्लाने से बात नहीं बनती। अपनी बात स्पष्टता के साथ और आराम से कहें। दूसरों को उत्तेजित करने वाले शब्दों से बचें।

  • हर बात दिल पर न लें

कई बार लोग गुस्से में कुछ भी बोल देते हैं। हर बात को अपने ऊपर लेना सही नहीं है। सामने वाला भी किसी तनाव में हो सकता है, उसकी परेशानी समझें और धैर्य से बात करें।

  • अपनी नींद और सेहत का ध्यान रखें

कम नींद, ज्यादा तनाव और थकान भी गुस्से की वजह बनते हैं। सही खान-पान और पूरी नींद से स्वभाव शांत रहता है।

  • माफी मांगना सीखें

अगर आपसे गलती हो जाए तो सॉरी बोलने में देर न करें। इससे रिश्ता बच जाता है और मन हल्का हो जाता है।

  • धैर्य को आदत बनाएं

हर दिन खुद से वादा करें कि छोटी-छोटी बातों पर परेशान नहीं होंगे। धीरे-धीरे यह आपकी आदत बन जाएगी।

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