फाल्गुन मास आज से शुरू:  13 मार्च को होलिका दहन के साथ खत्म होगा हिन्दी पंचांग का 12वां महीना, जानिए फाल्गुन से जुड़ी परंपराएं
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फाल्गुन मास आज से शुरू: 13 मार्च को होलिका दहन के साथ खत्म होगा हिन्दी पंचांग का 12वां महीना, जानिए फाल्गुन से जुड़ी परंपराएं

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34 मिनट पहले

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आज (13 फरवरी) से हिन्दी पंचांग का 12वां महीना फाल्गुन शुरू हो गया है, ये महीना 13 मार्च को होलिका दहन के साथ खत्म होगा। इस महीने में वसंत ऋतु रहेगी। फाल्गुन भगवान शिव और श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए बहुत खास है। इस महीने में महाशिवरात्रि (26 फरवरी) मनाई जाएगी। मथुरा, वृंदावन, बरसाना में श्रीकृष्ण के मंदिरों में होली खेलने लाखों कृष्ण भक्त पहुंचते हैं। जानिए फाल्गुन मास से जुड़ी खास परंपराएं…

भगवान शिव, विष्णु और कृष्ण भक्ति का महीना है फाल्गुन

फाल्गुन मास में महाशिवरात्रि मनाई जाती है, ये शिव जी से जुड़ा सबसे बड़ा पर्व है। शिव जी के साथ ही इस महीने में भगवान विष्णु के लिए भी विशेष पूजा-पाठ किए जाते हैं। माना जाता है कि द्वापर युग में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण ने गोपियों संग फूलों की होली खेली थी, इसी वजह से मथुरा, वृंदावन, बरसाना क्षेत्र में फाल्गुन महीने में कई दिनों तक भक्त होली खेलते हैं।

फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाते हैं। ये रात्रि का पर्व है। शिवपुराण में लिखा है कि जो भक्त महाशिवरात्रि पर शिव जी का अभिषेक करता है, उसकी सभी परेशानियां दूर होती हैं और शिव कृपा से उसे सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक इस तिथि पर भगवान शिव लिंग रूप में ब्रह्मा-विष्णु के सामने प्रकट हुए थे। कुछ अन्य मान्यताओं के मुताबिक इस तिथि भगवान और देवी पार्वती का विवाह हुआ था।

पूजा-पाठ के साथ ही करें दान-पुण्य भी

माना जाता है कि फाल्गुन मास में की गई पूजा-पाठ, दान पुण्य और नदी स्नान विशेष पुण्यदायी होते हैं। इस महीने में ये धर्म-कर्म करते हुए श्रीकृष्ण के मंत्रों का जप करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, ऐसी मान्यता है। श्रीकृष्ण के मंदिरों में दर्शन-पूजन नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर बालगोपाल की पूजा करें और कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।

फाल्गुन मास से गर्मी की शुरुआत होने लगती है। इन दिनों में सूती वस्त्रों का और छाते का दान करें। आप चाहें तो किसी सार्वजनिक जगह पर पानी का प्याऊ लगा सकते हैं। प्याऊ लगाना संभव न हो तो किसी प्याऊ में मटके का दान कर सकते हैं। इन दिनों में प्यासे लोगों को पानी पिलाने से अक्षय पुण्य मिलता है।

पूजा-पाठ के साथ ही जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, जूते-चप्पल, खाना भी दान करें। किसी मंदिर में पूजन सामग्री जैसे कुमकुम, गुलाल, अबीर, हार-फूल, घी, तेल, सिंदूर आदि चीजें दान करें। देवी मां के लिए लाल चुनरी, लाल चूड़ियां और आभूषण दान करें। भगवान शिव के लिए जनेऊ दान करें। गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं।

भगवान की कथाएं पढ़ें-सुनें, ध्यान करें

फाल्गुन मास में भगवान की कथाएं पढ़ने-सुनने की परंपरा है। इन दिनों में अपने समय के अनुसार शिवपुराण, विष्णुपुराण, श्रीमद् भागवत कथा के अध्यायों का पाठ करना चाहिए। ग्रंथों का पाठ करें और इनकी सीख को जीवन में उतारने का संकल्प लें। ऐसा करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

फाल्गुन मास में नियमित रूप से ध्यान करना चाहिए। रोज सुबह किसी शांत जगह पर बैठकर ध्यान करेंगे तो नकारात्मक विचार खत्म होंगे, सकारात्मकता बढ़ेगी। फाल्गुन मास में न तो ज्यादा गर्मी रहती है और न ही ठंड रहती है, इस महीने मौसम बहुत सुहाना रहता है, ऐसे मौसम में ध्यान करने से एकाग्रता बनी रहती है, मन इधर-उधर भटकता नहीं है, ध्यान करने का पूरा लाभ मिलता है।

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