फिजिकल हेल्थ- अचानक सर्दी-गर्मी से ट्रिगर हो सकता है माइग्रेन:  ठंड के मौसम में बढ़ता रिस्क, डॉक्टर से जानें हर जरूरी सवाल का जवाब
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फिजिकल हेल्थ- अचानक सर्दी-गर्मी से ट्रिगर हो सकता है माइग्रेन: ठंड के मौसम में बढ़ता रिस्क, डॉक्टर से जानें हर जरूरी सवाल का जवाब

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8 घंटे पहले

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मौसम का अचानक बदलना, कभी ठंडी हवा, कभी तेज धूप, कई लोगों के लिए सिरदर्द की वजह बन सकता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, टेम्प्रेचर बदलने से माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।

इस स्टडी के मुताबिक, माइग्रेन से सिरदर्द के 16.5% मामलों में अचानक ठंड और 9.6% मामलों में अचानक गर्मी वजह बनी। टेम्प्रेचर-सेंसिटिव पेशेंट्स में यह असर बढ़कर 29% तक पहुंच गया।

माइग्रेन आम सिरदर्द से अलग एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें सिर के एक हिस्से में तेज दर्द होता है। यह कई घंटों तक बना रह सकता है। कई बार यह दर्द इतना बढ़ जाता है कि इसके कारण रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है।

इसलिए फिजिकल हेल्थ में आज माइग्रेन की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • मौसम बदलने पर यह क्यों ट्रिगर होता है?
  • कौन-सी हेल्थ कंडीशंस इसे बढ़ाती हैं?
  • कौन से फूड्स इसे ट्रिगर करते हैं?
  • कौन-से घरेलू तरीके तुरंत राहत दे सकते हैं?

सवाल- माइग्रेन आखिर होता क्या है?

जवाब- माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इसमें एपिसोड में तेज सिरदर्द होता है।

  • यह आमतौर पर सिर के एक हिस्से में महसूस होता है और 4 से 72 घंटे तक रह सकता है।
  • माइग्रेन में ब्रेन की नर्व एक्टिविटी असामान्य हो जाती है, जिससे दर्द पैदा करने वाले केमिकल्स रिलीज होते हैं।
  • इसमें रोशनी, आवाज और गंध से संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
  • कई लोगों को उल्टी, मतली या ब्लर विजन की समस्या भी होती है।

सवाल- माइग्रेन क्यों होता है?

जवाब- ब्रेन की नर्व सेल्स अचानक ज्यादा एक्टिव होने पर और ब्रेन में मौजूद केमिकल्स का संतुलन बिगड़ने पर ऐसा होता है।

  • इससे ब्रेन की ब्लड वेसल्स सिकुड़ने और फिर फैलने लगती हैं, जिससे तीखा दर्द महसूस होता है।
  • माइग्रेन के पीछे जेनेटिक कारण भी होते हैं। अगर परिवार में किसी को माइग्रेन रहा है, तो जोखिम बढ़ जाता है।
  • इसके ट्रिगर्स में तनाव, हॉर्मोनल बदलाव, नींद की कमी, तेज रोशनी, तेज गंध, अनियमित भोजन और कुछ फूड्स शामिल हैं।
  • बहुत ज्यादा स्क्रीन देखने, मौसम बदलने और डिहाइड्रेशन में भी माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।

सवाल- अचानक मौसम बदलने से माइग्रेन क्यों ट्रिगर होता है?

जवाब- अचानक मौसम बदलने पर हवा का दबाव, टेम्प्रेचर और ह्यूमिडिटी तेजी से बदलते हैं। ये बदलाव दिमाग में मौजूद बारोरिसेप्टर्स को प्रभावित करते हैं।

  • इससे ब्रेन की ब्लड वेसल्स सिकुड़ने-फैलने लगती हैं और नर्व सिग्नलिंग अस्थिर हो जाती है, जो माइग्रेन ट्रिगर कर सकती है।
  • ठंडी हवा, तेज धूप, ह्यूमिडिटी बढ़ने या कम होने से ब्रेन के सभी संवेदनशील हिस्सों पर प्रभाव पड़ते हैं।
  • इसके अलावा मौसम बदलने पर नींद का पैटर्न, हाइड्रेशन और रूटीन भी बिगड़ जाते हैं, जिससे माइग्रेन का जोखिम और बढ़ जाता है।
  • इसलिए मौसम में बदलाव माइग्रेन वालों के लिए बड़ा ट्रिगर बन जाता है।

सवाल- क्या कुछ खाने-पीने से भी माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है?

जवाब- हां, कुछ खास फूड्स माइग्रेन ट्रिगर कर सकते हैं। अगर किसी को माइग्रेन है और वह शराब, चाय या कॉफी पीता है तो माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है। सभी ट्रिगरिंग फूड्स ग्राफिक में देखिए।

सवाल- माइग्रेन और सामान्य सिरदर्द में क्या फर्क है?

जवाब- सामान्य सिरदर्द आमतौर पर हल्का या मध्यम दर्द होता है, जो तनाव, थकान या डिहाइड्रेशन से होता है और आराम करने या पानी पीने से ठीक हो जाता है।

  • वहीं माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है, जिसमें धड़कन जैसा तेज दर्द सिर के एक तरफ महसूस होता है।
  • इसके साथ मतली, उल्टी हो सकती है। रोशनी और आवाज से संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
  • माइग्रेन कई घंटों से लेकर कई दिनों तक रह सकता है और दिमाग की रक्त नलिकाओं व नर्व सिग्नलिंग में बदलाव इसकी मुख्य वजह मानी जाती है। यही इसे सामान्य सिरदर्द से अलग बनाता है।

सवाल- क्या साधारण सिरदर्द माइग्रेन में बदल सकता है?

जवाब- साधारण सिरदर्द सीधे माइग्रेन में नहीं बदलता, क्योंकि दोनों की वजह अलग होती हैं।

सामान्य सिरदर्द ज्यादातर तनाव, नींद की कमी या डिहाइड्रेशन से होता है और आमतौर पर जल्दी ठीक हो जाता है। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है, जिसमें दिमाग की नसों और केमिकल सिग्नलिंग में गड़बड़ी दर्द को ट्रिगर करती है। लेकिन बार-बार होने वाला तनाव, अनियमित लाइफस्टाइल, स्क्रीन टाइम, कैफीन या हार्मोनल बदलाव माइग्रेन की प्रवृत्ति वाले लोगों में अटैक शुरू कर सकते हैं। यानी सिरदर्द माइग्रेन में नहीं बदलता, लेकिन गलत लाइफस्टाइल माइग्रेन की संभावना बढ़ा सकती है।

सवाल- क्या भूखे या प्यासे रहने से भी माइग्रेन बढ़ सकता है?

जवाब- हां, भूखे या प्यासे रहने से माइग्रेन बढ़ सकता है, क्योंकि शरीर में शुगर लेवल और हाइड्रेशन का सीधा असर दिमाग की नसों पर पड़ता है। लंबे समय तक भूखे रहने से ब्लड शुगर अचानक गिरती है, जिससे ब्रेन को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती और माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है। इसी तरह, पानी कम पीने से डिहाइड्रेशन होता है, जिससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है और सिर में तेज धड़कन जैसा दर्द शुरू हो सकता है। माइग्रेन वाले लोगों के लिए छोटे-छोटे भोजन समय पर लेना और दिनभर पर्याप्त पानी पीना बहुत जरूरी है ताकि अचानक ट्रिगर न हों।

सवाल- कौन-सी हेल्थ कंडीशंस माइग्रेन बढ़ा सकती हैं?

जवाब- कुछ हेल्थ कंडीशंस माइग्रेन को आसानी से बढ़ा सकती हैं क्योंकि इनका सीधा असर दिमाग की नसों, हार्मोन और ब्लड फ्लो पर पड़ता है। जैसे, साइनस इंफेक्शन में सिर में प्रेशर बढ़ता है, जिससे माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है। थायरॉइड असंतुलन से हार्मोन अचानक बदलते हैं और दर्द की संवेदनशीलता बढ़ती है। हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) में दिमाग की रक्त वाहिकाएँ तनाव में रहती हैं, जिससे माइग्रेन तेज हो सकता है। एनीमिया में ऑक्सीजन कम मिलती है तो सिरदर्द बढ़ जाता है। नींद संबंधी विकार, डिप्रेशन और एंग्जायटी भी माइग्रेन को और ज्यादा गंभीर बना सकते हैं।

सवाल- कौन से फूड्स या ड्रिंक्स माइग्रेन को ट्रिगर करते हैं?

जवाब- कुछ खास फूड्स और ड्रिंक्स दिमाग की नसों को संवेदनशील बनाकर माइग्रेन ट्रिगर कर सकते हैं।

कैफीन वाली चीजें जैसे कॉफी, एनर्जी ड्रिंक ज्यादा या अचानक बंद करने पर सिरदर्द बढ़ा देती हैं। चॉकलेट, चीज़, प्रोसेस्ड मीट और पैकेट वाले स्नैक्स में मौजूद टाइरामाइन और नाइट्रेट्स नसों को संकुचित कर माइग्रेन शुरू कर सकते हैं। बहुत मीठा, आर्टिफिशियल स्वीटनर और ज्यादा नमक वाला खाना भी ट्रिगर बनता है। अल्कोहल, खासकर रेड वाइन, ब्लड फ्लो बदलती है और तेज सिरदर्द करा सकती है। लंबे समय खाली पेट रहना या बहुत मसालेदार खाना भी माइग्रेन बढ़ा देता है।

सवाल- माइग्रेन से तुरंत राहत के लिए क्या घरेलू तरीके हैं?

जवाब- माइग्रेन से तुरंत राहत के लिए कुछ घरेलू तरीके काफी मदद कर सकते हैं। माथे और गर्दन पर ठंडी सिकाई करने से सूजन और नसों का प्रेशर कम होता है। शांत, अंधेरे कमरे में 15–20 मिनट लेटने से दिमाग को आराम मिलता है। हल्का पानी पीना या इलेक्ट्रोलाइट्स लेना फायदेमंद है, क्योंकि डिहाइड्रेशन माइग्रेन बढ़ाता है। पुदीने या लैवेंडर का एसेंशियल ऑयल कनपटियों पर लगाने से नसें रिलैक्स होती हैं। अदरक की चाय मतली और दर्द दोनों कम करती है। गहरी सांसें लेकर ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से तनाव कम होता है और दर्द धीरे-धीरे शांत पड़ता है।

सवाल- क्या माइग्रेन पूरी तरह ठीक हो सकता है?

जवाब- माइग्रेन पूरी तरह ठीक होना सभी लोगों में संभव नहीं होता, क्योंकि यह एक क्रॉनिक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है। लेकिन सही लाइफस्टाइल, ट्रिगर्स की पहचान और समय पर इलाज से इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। कई लोगों में दवाइयों, तनाव कम करने, अच्छी नींद, हाइड्रेशन और नियमित खानपान से अटैक बहुत कम हो जाते हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर प्रिवेंटिव मेडिसिन देते हैं, जो माइग्रेन होने की आवृत्ति को काफी घटा देती है। यानी माइग्रेन हमेशा खत्म नहीं होता, लेकिन सही देखभाल से सामान्य जीवन जीना बिल्कुल संभव है और अटैक बहुत हल्के पड़ जाते हैं।

सवाल- क्या माइग्रेन लाइफस्टाइल मैनेजमेंट से कंट्रोल हो सकता है?

जवाब- हां, माइग्रेन को लाइफस्टाइल मैनेजमेंट से काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। माइग्रेन में दिमाग के नर्व सिग्नल और ब्लड फ्लो संवेदनशील हो जाते हैं। इसलिए रोजाना एक जैसी दिनचर्या जैसे पर्याप्त नींद, समय पर खाना, हाई शुगर व लंबा गैप न रखना, अटैक कम करता है। पानी की कमी, स्ट्रेस और ज्यादा स्क्रीन टाइम माइग्रेन बढ़ाते हैं, इसलिए इन्हें कंट्रोल करना जरूरी है। हल्की एक्सरसाइज, मेडिटेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी नर्वस सिस्टम को शांत रखती हैं। कैफीन, प्रोसेस्ड फूड और तेज रोशनी जैसे ट्रिगर्स पहचानकर उनसे बचने से अटैक की फ्रीक्वेंसी काफी घट जाती है।

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