फिजिकल हेल्थ- ये 7 संकेत हो सकते हैं रूमेटॉइड आर्थराइटिस:  न करें इग्नोर, लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी, डॉक्टर से जानें जरूरी बातें
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फिजिकल हेल्थ- ये 7 संकेत हो सकते हैं रूमेटॉइड आर्थराइटिस: न करें इग्नोर, लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी, डॉक्टर से जानें जरूरी बातें

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4 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें हमारा इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही जोडों पर हमला करने लगता है, जिससे जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न होती है। समय पर इलाज न होने पर यह आंख, हार्ट, लंग्स समेत शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है। यह समस्या ज्यादातर महिलाओं और बुजुर्गों में होती है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, साल 2019 में दुनियाभर में लगभग 1.8 करोड़ लोग रूमेटॉइड आर्थराइटिस से पीड़ित थे। इनमें करीब 70% महिलाएं थीं और 55% मरीजों की उम्र 55 वर्ष से ज्यादा थी।

जर्नल ऑफ द एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (JAPI) में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, रूमेटॉइड आर्थराइटिस भारत में लगभग 0.75% आबादी यानी करीब 50 से 70 लाख लोगों को प्रभावित करती है।

यह आंकड़ा बताता है कि यह बीमारी देश के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। हालांकि शुरुआती इलाज, लाइफस्टाइल में बदलाव और सही देखभाल के साथ रूमेटॉइड आर्थराइटिस को मैनेज किया जा सकता है।

तो चलिए आज फिजिकल हेल्थ कॉलम में हम रूमेटॉइड आर्थराइटिस के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • रूमेटॉइड आर्थराइटिस का खतरा किन लोगों को ज्यादा होता है?
  • इसे कैसे मैनेज किया जा सकता है?

इन लोगों को रूमेटाॅइड आर्थराइटिस का रिस्क ज्यादा

रूमेटॉइड आर्थराइटिस किसी भी उम्र में हो सकता है। लेकिन कुछ लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है। जैसेकि-

  • पुरुषों की तुलना में महिलाओं में रूमेटॉइड आर्थराइटिस का खतरा लगभग 2–3 गुना ज्यादा होता है। इसका एक प्रमुख कारण हाॅर्मोनल बदलाव है।
  • आमतौर पर यह 40–60 वर्ष की उम्र में अधिक दिखाई देता है। हालांकि किसी भी उम्र में हो सकता है।
  • जिनकी फैमिली में पहले से किसी को रूमेटॉइड आर्थराइटिस है, उन्हें भी इसका रिस्क ज्यादा रहता है।
  • स्मोकिंग करने वाले, मोटापे से ग्रस्त लोग और प्रदूषण के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों में यह खतरा बढ़ जाता है।

रूमेटॉइड आर्थराइटिस के लक्षण

इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और अक्सर शरीर के दोनों तरफ के एक जैसे जोड़ों में दिखाई देते हैं। जैसे दोनों हाथों की उंगलियां या दोनों घुटने। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

रूमेटॉइड आर्थराइटिस के चार स्टेज

ऑर्थोपेडिक डाॅ. मिहिर थानवी बताते हैं कि रूमेटॉइड आर्थराइटिस धीरे-धीरे चार स्टेज में बढ़ती है।

शुरुआती स्टेज: इस स्टेज में जोड़ों के आसपास सूजन होती है। लेकिन हड्डी पर कोई असर नहीं पड़ता है।

सेकेंड स्टेज: इसमें कार्टिलेज को नुकसान पहुंचने लगता है, जिससे जोड़ों की फ्लैक्सिबिलिटी कम हो जाती है।

थर्ड स्टेज: हड्डियों पर असर शुरू होता है, जिसके कारण दर्द और अकड़न काफी बढ़ जाती है।

अंतिम स्टेज: इस स्टेज में सूजन तो कम हो जाती है। लेकिन जोड़ों की गतिशीलता लगभग खत्म हो जाती है।

रूमेटाॅइड आर्थराइटिस का इलाज

इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। इसके ट्रीटमेंट का मुख्य उद्देश्य लक्षणों को कम करना, सूजन को कंट्रोल करना और जोड़ों को नुकसान से बचाना होता है।

सही समय पर और उचित ट्रीटमेंट से मरीज की लाइफ को काफी हद तक बेहतर बनाया जा सकता है। जोड़ों की फ्लैक्सिबिलिटी बनाए रखने और मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए स्ट्रेचिंग और हल्की एक्सरसाइज की सलाह दी जाती है।

इसके साथ ही लाइफस्टाइल में बदलाव, जैसे बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, स्मोकिंग से परहेज और वजन को कंट्रोल रखना भी लक्षणों को कम करने में मददगार होता है। गंभीर मामलों में जब दवाओं और सामान्य उपायों से पर्याप्त लाभ नहीं मिलता तो सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है।

रूमेटाॅइड आर्थराइटिस काे कैसे मैनेज करें

इसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है। लेकिन सही उपायों से लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। नियमित देखभाल, समय पर ट्रीटमेंट और लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव व्यक्ति को बेहतर जीवन जीने में मदद करते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए-

रूमेटाॅइड आर्थराइटिस से जुड़े कुछ कॉमन सवाल-जवाब

सवाल- रूमेटाॅइड आर्थराइटिस की जांच कैसे की जाती है?

जवाब- रूमेटॉइड आर्थराइटिस की पुष्टि और उसकी गंभीरता समझने के लिए डॉक्टर कई जांचें कराते हैं। इनमें सबसे पहले फिजिकल एग्जामिनेशन (शरीर और जोड़ों की जांच) शामिल है। इसके बाद ब्लड टेस्ट (जैसे RA फैक्टर और एंटी-CCP) और इमेजिंग टेस्ट जैसे एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और MRI की मदद से जोड़ों की सूजन, डैमेज और बीमारी की स्थिति का पता लगाया जाता है।

सवाल- क्या करें कि रूमेटॉइड आर्थराइटिस न हो या इस बीमारी की संभावना को कम किया जा सके?

जवाब- इंफ्लेमेशन और स्ट्रेस रूमेटॉइड आर्थराइटिस के दो मुख्य कारण हैं। अगर हम शुरू से ही अपनी लाइफस्टाइल ठीक रखें तो एक उम्र के बाद इस बीमारी के होने की आशंका कम से कम होती है। अगर आपकी उम्र 30 साल है तो अभी से ही अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव शुरू कर दें। किसी भी तरह के टॉक्सिक सप्लीमेंट न लें। खाने-पीने का बहुत ध्यान रखें। प्लांट बेस्ड डाइट लें। खाने में फाइबर ज्यादा शामिल करें।

वहीं अगर आपको इमोशनल स्ट्रेस है, आप खुश नहीं हैं तो ये चीजें कहीं-न-कहीं बीमारी के रूप में सामने आती हैं। इसलिए हमेशा अपने स्ट्रेस को कंट्रोल रखें। इसके लिए मेडिटेशन और योग करें।

सवाल- रूमेटॉइड आर्थराइटिस के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने जरूरी हैं?

जवाब- इसके लिए रोजाना हल्की एक्सरसाइज, वजन कंट्रोल रखना, स्मोकिंग और शराब से पूरी तरह बचना, तनाव कम करना, जोड़ों को सुरक्षित रखना और पर्याप्त नींद लेना जैसे छोटे-छोटे बदलाव जरूरी हैं।

सवाल- रूमेटॉइड आर्थराइटिस में डाइट में क्या बदलाव करना चाहिए?

जवाब- रूमेटॉइड आर्थराइटिस में डाइट की भी अहम भूमिका होती है क्योंकि यह सूजन कम करने और जोड़ों की हेल्थ बनाए रखने में मदद करती है। इसलिए खानपान में कुछ बातों का जरूर ध्यान रखें।

क्या खाएं

  • सैल्मन और टूना मछली, अलसी के बीज, अखरोट जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें।
  • विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर हरी पत्तेदार सब्जियां और रंग-बिरंगे फल।
  • एनर्जी और न्यूट्रिशन के लिए साबुत अनाज और दालें।
  • कैल्शियम और विटामिन D के लिए लो-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स।
  • नेचुरल एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों वाले हल्दी और अदरक।

क्या न खाएं

  • ऑयली और तली-भुनी चीजें।
  • ज्यादा मीठे और प्रोसेस्ड फूड।
  • रेड मीट और हाई फैट डेयरी प्रोडक्ट्स।
  • ज्यादा नमक और चीनी।

सवाल- रूमेटॉइड आर्थराइटिस का समय पर इलाज न होने से किस तरह की समस्याएं हो सकती हैं?

जवाब- इससे हड्डियों और जोड़ों में स्थायी विकृति, ऑस्टियोपोरोसिस, हार्ट डिजीज, लंग्स डिजीज, आंख और मुंह सूखना, कार्पल टनल सिंड्रोम और लिंफोमा (कैंसर) का खतरा बढ़ जाता है।

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