मंगलवार को फाल्गुन अमावस्या:  मंगलवार और अमावस्या के योग में नदी स्नान, दान-पुण्य के साथ ही पितरों के लिए धूप-ध्यान करने की परंपरा
जीवन शैली/फैशन लाइफस्टाइल

मंगलवार को फाल्गुन अमावस्या: मंगलवार और अमावस्या के योग में नदी स्नान, दान-पुण्य के साथ ही पितरों के लिए धूप-ध्यान करने की परंपरा

Spread the love


  • Hindi News
  • Jeevan mantra
  • Dharm
  • Falgun Amavasya On Tuesday, 17th February, River Snan Daan Pitron Puja On Falgun Amawasya, Significance Of Falgun Amawasya

13 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

मंगलवार, 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या है। अमावस्या तिथि के स्वामी पितर देव माने जाते हैं। इस दिन विशेष रूप से नदी स्नान, दान-पुण्य के साथ ही धूप-ध्यान और तर्पण करने की परंपरा है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इस बार अमावस्या मंगलवार को है। मंगलवार की अमावस्या का नाम भोमवती है। इस दिन में गंगा, यमुना, शिप्रा, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है। जो लोग किसी तीर्थ स्थान पर नहीं जा पा रहे हैं, उन्हें घर पर भी पानी में गंगाजल या किसी अन्य नदी का जल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं और भगवान विष्णु के साथ तुलसी माता की पूजा करें।

पीपल पूजा को चढ़ाएं काले तिल और जल

फाल्गुन अमावस्या पर पीपल की पूजा करने का विशेष महत्व है। पीपल में भगवान विष्णु का वास माना गया है। इसलिए पीपल की पूजा करते समय ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप किया जाता है। इस अमावस्या पर एक लोटे में पानी लें। इसमें गंगाजल, कच्चा दूध और काले तिल मिलाएं। यह जल पीपल को अर्पित करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और घर के पितर देव भी तृप्त होते हैं।

तुलसी और शालिग्राम पूजा

अमावस्या तिथि पर तुलसी के साथ भगवान शालिग्राम का अभिषेक करने की भी परंपरा है। दूध और जल से शालिग्राम का अभिषेक करें। पूजन सामग्री अर्पित करें। तुलसी माता को चुनरी चढ़ाएं। पूजा में तुलसी और शालिग्राम को हल्दी, चंदन, कुमकुम, चावल, फूल चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं, भोग लगाएं और आरती करें।

ऐसे करें पितरों के लिए तर्पण

अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए तर्पण जरूर करना चाहिए। इसके लिए एक लोटे में जल भरें। जल में काले तिल और फूल डालें। इसके बाद पितरों का स्मरण करें और हथेली में जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों को अर्पित करें। इसे तर्पण करना कहते हैं। इसके अलावा गाय के गोबर से बना कंडा जलाकर उसमें गुड़ और घी डालकर धूप दें। पितरों का ध्यान करते हुए ऊँ पितृदेवेभ्यो नम: मंत्र का जप करें। ऐसा करने से कुटुम्ब के पितर देवता तृप्त होते हैं। पितरों के आशीर्वाद से परिवार की अशांति दूर होती है।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *