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आज (20 जनवरी) माघी गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है। देवी पूजा का ये उत्सव 27 जनवरी तक चलेगा। गुप्त नवरात्रि में देवी सती की दस महाविद्याओं की प्रसन्नता पाने के लिए तंत्र-मंत्र से जुड़े साधक साधनाएं करते हैं। ये साधनाएं किसी विशेषज्ञ साधक की देखरेख में ही की जाती हैं। आम लोगों को गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और व्रत-उपवास करना चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, नवरात्रि में देवी मां के नौ स्वरूपों की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। व्रत और उपवास करने से शरीर को स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं, क्योंकि इन दिनों में किए गए व्रत से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर में ऊर्जा का संतुलन बना रहता है। नवरात्रि में देवी के इन स्वरूपों की पूजा करनी चाहिए- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री। साल में चार बार आती है नवरात्रि एक साल में कुल चार बार नवरात्रि आती हैं। चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि को सामान्य यानी प्रकट नवरात्रि कहा जाता है। जबकि, आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रियों को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि में देवी की दस महाविद्याओं के लिए विशेष साधना की जाती है, जो तंत्र-मंत्र से जुड़ी हैं। इसलिए गुप्त नवरात्रि तंत्र-मंत्र से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऋतुओं का संधिकाल और नवरात्रि का संबंध नवरात्रि विशेष रूप से ऋतुओं के संधिकाल में आती है। संधिकाल वह समय है, जब एक ऋतु समाप्त हो रही होती है और दूसरी ऋतु प्रारंभ हो रही होती है। उदाहरण के लिए, माघ मास में शीत ऋतु समाप्त होकर बसंत ऋतु शुरू होती है। इस समय व्रत-उपवास और साधना करने से न केवल धार्मिक लाभ मिलता है, बल्कि शरीर और मन भी स्वस्थ रहते हैं। नवरात्रि के दौरान व्रत और उपवास करने से शरीर के पाचन तंत्र को आराम मिलता है। आयुर्वेद में इसे लंघन विधि के रूप में माना गया है, जिसमें शरीर अपनी आंतरिक ऊर्जा से भोजन पचाता है और अपचनीय पदार्थों को बाहर निकालता है। इस प्रक्रिया से पाचन तंत्र मजबूत होता है और कई रोग दूर होते हैं। इसलिए नवरात्रि के व्रत-उपवास से धर्म के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते हैं। ऐसे कर सकते हैं देवी पूजा
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