गुुणवंत शाह4 घंटे पहले
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इंसान की भ्रांतियों का कोई अंत नहीं होता। कई बार लगता है कि पूरी मानवजाति मानो भ्रमों के सहारे ही अपना जीवन काट देती है। हमारे सामने दो तरह की भ्रांतियां रहती हैं। पहली, वसंत की हरी-भरी भ्रांति और दूसरी, पतझड़ की सूखी भ्रांति। हीरे की चमकीली भ्रांति और कोयले की काली भ्रांति, दोनों ही कार्बन की सच्चाई को चुपचाप छिपाए रखती है। हमारे स्कूलों-कॉलेजों में पढ़ाई का भ्रम हमेशा सुरक्षित बना रहता है। चुनाव के दिनों में लोकतंत्र का भ्रम माइक्रोफोन की गड़गड़ाहट के साथ गूंजता रहता है। मंडप में पहली बार हाथ मिलते ही ‘दिल मिल गए’ का भ्रम बैंडबाजे के साथ पूरे मोहल्ले में घूमने लगता है।
कहा जाता है कि इंग्लैंड और अमेरिका के कुछ स्कूलों में टार्जन की किताबें नहीं पढ़ाई जातीं, क्योंकि उनमें लिखा है कि टार्जन और उसकी मित्र जेन अविवाहित होने के बावजूद साथ रहते थे। जिनकी पोशाक में जेब हो, ऐसे जोड़े अधिक प्रचलित होने के पीछे का रहस्य यही है कि नग्न लोगों की आबादी के बीच इन पोशाक वाले जोड़ों की महिलाएं अपने लिपस्टिक की ट्यूब को जेब में रख सकती थीं। किसी ने एक बार गांधीजी से शिकायत की कि लोग प्रार्थना स्थल में जूते पहनकर आते हैं तो महात्मा मुस्कराकर बोले, उनके मोजे फटे हुए होंगे, इसलिए वे जूते नहीं उतारते होंगे।
मनोरंजन के लिए बनाई गई इस दुनिया में जीवित रहने का सबसे सटीक उपाय यह है कि मनुष्य अपने भ्रमों को सुरक्षित रखे। भ्रम का निवारण ही मृत्यु का दूसरा नाम है। श्रीकृष्ण को लीला पुरुषोत्तम कहा जाता है और राम को मर्यादा पुरुषोत्तम। संसार को रंगभूमि या क्रीड़ाभूमि मानकर जीने की प्रवृत्ति को लीला-वृत्ति कहा जा सकता है। विष्णु जब केवल लीला के लिए अवतार लेते हैं तो उन्हें लीलावतार कहा जाता है। यदि लीला का आनंद लेना हो तो बाहरी बातों को थोड़ा अनदेखा करते हुए भीतर की मस्ती को जतन से संभालकर रखना पड़ता है। नेपोलियन ने जोसेफीन को एक पत्र में लिखा, मैं तीन दिनों में घर लौट रहा हूं, तुम स्नान मत करना। उसने ऐसा इसलिए लिखा, क्योंकि उसे जोसेफीन के शरीर की स्वाभाविक गंध बहुत प्रिय लगती थी। विक्टर ह्यूगो ने जब अपना प्रसिद्ध उपन्यास ‘ला मिजरेबल’ लिखा तो किताब की बिक्री जानने के लिए उन्होंने प्रकाशक को एक पोस्ट कार्ड में केवल प्रश्नवाचक चिह्न (?) बनाया और भेज दिया। उधर किताब की प्रतियां धड़ाधड़ बिक रही थीं, इसलिए प्रकाशक ने उस प्रश्नवाचक वाले पोस्टकार्ड का उत्तर विस्मयादिबोधन चिह्न (!) बनाकर भेज दिया।
समय का भ्रम बना रहे, इसलिए घड़ी का आविष्कार हुआ। सुख का भ्रम बना रहे, इसलिए मदिरालय बने। प्रेम का भ्रम बना रहे, इसलिए विवाह की व्यवस्था बनाई गई। समृद्धि का भ्रम बना रहे, इसलिए सिक्कों का चलन हुआ। सुरक्षा का भ्रम बना रहे, इसलिए सेना का गठन हुआ। खतरे के संबंध में हमारा भ्रम बना रहे, इसलिए बीमा की खोज हुई। सुंदरता का भ्रम बनाए रखने के लिए लिपस्टिक का प्रचलन बढ़ा।
खिड़कियों को सुंदर दिखाने के लिए उन पर पर्दे लगाए जाते हैं। मनुष्य का बुढ़ापा सफेद बालों से शोभित होता है, पर कुछ लोग खिजाब लगाकर उन्हें काला कर लेते हैं, ताकि युवावस्था का भ्रम बना रहे। आम के असली सौंदर्य को सहन न कर पाने पर ही उससे मुरब्बा बनाया जाता है, इतना मीठा और गाढ़ा कि उसके सामने आम फीका लगने लगे। फोटो खिंचवाते समय सभी चाहते हैं कि दाग-धब्बे तस्वीर में न दिखें। कई बार तो केवल फोटो के आदान-प्रदान से ही विवाह तय हो जाते हैं। इस मामले में एक्स-रे कहीं अधिक ईमानदार साबित होता है- वह फेफड़ों पर पड़े छोटे से छोटे दाग तक दिखा देता है। शायद यही कारण है कि अपनी फोटो सभी को अच्छी लगती है, लेकिन अपना एक्स-रे कभी पसंद नहीं आता। अमुक व्यक्ति हमारा खास दोस्त है, यह भ्रम कितना सुखद है। जिस पर हमने उपकार किए हों, वह कभी हमारा बुरा नहीं चाहेगा, यह भ्रम कितना शांतिदायक है। पर जब कोई भ्रम टूटता है तो इंसान भीतर से रोने लगता है। इसीलिए सहगल ने कहा, जब दिल ही टूट गया, हम जी के क्या करेंगे। बेहतर यही है कि मनुष्य अपनी शॉक-प्रूफ, वेदर-प्रूफ, मैग्नेट-प्रूफ, वॉटर-प्रूफ और भावना-प्रूफ भ्रांतियों को महंगे चीनी के बर्तनों की तरह बड़े जतन से संभालकर रखे।
बात पते की… मनुष्य एक ऐसा रेफ्रिजरेटर है जिसमें, भ्रांतियां लंबे समय तक बासी नहीं होतीं। मनुष्य का हृदय सच-मुच डीप-फ्रीज जैसा है, जिसमें जमा हुई भावनाओं के आइस-क्यूब सदैव सुरक्षित रहते हैं।
दो घड़ियों का भ्रम! माल्टा के मंदिरों में दो घड़ियां रखने की परंपरा है। एक घड़ी सही समय बताती है और दूसरी गलत। सही समय बताने वाली घड़ी लोगों के लिए है, ताकि वे अपने काम समय पर कर सकें। गलत समय बताने वाली घड़ी शैतान के लिए है, ताकि उसे यह न पता चले कि प्रार्थना का सही समय कौन-सा है।








