रसरंग में चिंतन:  मानव से दानव बनाने वाली आदतों से किस तरह बचें?
अअनुबंधित

रसरंग में चिंतन: मानव से दानव बनाने वाली आदतों से किस तरह बचें?

Spread the love


गुणवंत शाह5 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

कभी सोचा आपने कि दुर्योधन आखिर कौन था? वह आसुरी सम्पत्तियों का बिगड़ा हुआ वारिस था। महाभारत जैसे महान महाकाव्य से यदि दुर्योधन को हटा दिया जाए, तो उसमें क्या बचेगा? व्यसन में डूबे हुए उसके अपने ही संबंधी। ध्यान देने वाली बात यह है कि मानव इतिहास में सबसे पहले शराबबंदी द्वारका में ही की गई थी। सदियों बाद पैगम्बर ने भी शराब पीने पर प्रतिबंध लगाया था।

व्यसन वास्तव में मानव और दानव के बीच फंसा हुआ एक रोग है। शराब पीकर वाहन चलाने वाले ड्राइवरों से आए दिन भयानक दुर्घटनाएं होती हैं। ऐसी खबरें हम अखबारों में अक्सर पढ़ते रहते हैं। सच यह है कि बिना नशे के जीवन का कोई काम नहीं रुकता। न तम्बाखू के बिना इंसान का कोई काम रुकता है, न सिगरेट फूंके बिना जीवन की गति थमती है। इसके बाद भी व्यसन की ओर इंसान का इतना अधिक आकर्षण क्यों है? आखिर इसका रहस्य क्या है? तम्बाखू-गुटखा खाने वाला इंसान बुढ़ापे में बुरी तरह बीमार पड़ता है। उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे बिस्तररूपी अपनी प्रेमिका के आगोश में वह मौत का इंतजार कर रहा हो। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो व्यसन केवल आदत नहीं है, बल्कि मस्तिष्क में बनने वाली रासायनिक लत है। यही कारण है कि लोग जानते हुए भी कि व्यसन हानिकारक है, उसे छोड़ नहीं पाते। कई देशों में तो इसे महामारी की श्रेणी में रखा जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि व्यसन से जुड़ी बीमारियों के कारण हर साल लाखों लोग असमय मौत के शिकार होते हैं।

व्यसन चाहे कैसा भी हो, लेकिन सच्चाई यह है कि वह इंसान को बीमारियों के माध्यम से दर्दनाक मौत की ओर ले जाता है। पंचशील यात्रा के दौरान न जाने कितने युवाओं ने व्यसन से जीवनभर दूर रहने की प्रतिज्ञा ली थी। इसी दौरान पूज्य रविशंकर महाराज व्यसन को लेकर एक मजाक सुनाया करते थे। किस्सा ऐसा था- परिवार में किसी की मृत्यु होने पर रोते-बिलखते स्वजनों से उनके दोस्त कहते, ‘भाई, थोड़ा पानी पी लो।’ फिर कहते, ‘थोड़ी चाय पी लो।’ अंत में कहते, ‘भाई, बीड़ी ही पी लो, तुम्हें अच्छा लगेगा।’ इन हालात में भी वह दुखी आदमी बीड़ी पीने से इंकार नहीं कर पाता। मानो बीड़ी उससे कह रही हो, ‘मैं तेरा साथ कभी नहीं छोडूंगी, चाहे तेरे प्रियजन ही साथ क्यों न छोड़ दे।’ महाराज जब इसे अपनी शैली में सुनाते तो गांव के लोग ठहाके लगाकर हंसने लगते।

👉इस मजाक में भी एक गंभीर सच्चाई छुपी है। व्यसन की जकड़ इतनी मजबूत होती है कि व्यक्ति अपने प्रियजनों की मौत जैसे बड़े आघात में भी उसे छोड़ने को तैयार नहीं होता। एक किस्सा और है। एक सुखी किसान के पास एक बाबा पहुंचे। उन्होंने कहा, भगवान की इच्छा है कि तुम्हें जितने धन की आवश्यकता है, वह सब मिल जाए। बस तुम रकम बताओ। इधर तुमने रकम बताई, उधर वह रकम हाजिर हो जाएगी। किसान सोच में पड़ गया। बाबा ने कहा, रकम तो तुम्हें मिल जाएगी, लेकिन मेरी कुछ शर्तें भी हैं जिन्हें मानना अनिवार्य होगा। शर्तें अजीब थीं- तुम्हें रोज शराब के दो पेग लेने होंगे। रोज 5 सिगरेट पीनी होंगी। रोजाना पान की 10 गिलौरियां खानी होंगी। रोज दो ग्राम तम्बाखू खानी होगी। किसान ने बाबा की सारी शर्तें ध्यान से सुनीं और उनका प्रस्ताव तुरंत ठुकरा दिया। वह समझदार था, उसे मालूम था कि उसे कैसे जीना है और स्वस्थ रहना है। किसान की तरह यदि हर व्यक्ति यह सोच ले कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है, तो व्यसन अपने आप कम हो जाएगा।

एक वरिष्ठ डॉक्टर ने मुझसे कहा- ‘सर, अब हमारे उच्च वर्गों में बेटियों के लिए वर तलाश करना मुश्किल हो गया है। लड़की के माता-पिता चाहते हैं कि लड़का शराब न पीता हो और मांसाहारी न हो। लेकिन अब ऐसे युवक नहीं मिलते, जो इन दोनों बुराइयों से बचे हों। अब आप ही बताएं, हम कहां जाएं?’, यह सामाजिक चिंता वास्तव में दिन-प्रति-दिन गहरी होती जा रही है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *