रुचिर शर्मा का कॉलम:  ट्रम्प के टैरिफ-धमाके के बाद अब सेंट्रल बैंक पर नजर
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रुचिर शर्मा का कॉलम: ट्रम्प के टैरिफ-धमाके के बाद अब सेंट्रल बैंक पर नजर

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5 घंटे पहले

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रुचिर शर्मा ग्लोबल इन्वेस्टर व बेस्टसेलिंग राइटर - Dainik Bhaskar

रुचिर शर्मा ग्लोबल इन्वेस्टर व बेस्टसेलिंग राइटर

ट्रम्प ने टैरिफ की अपनी धमकियों को हकीकत में बदलकर जो धमाका किया है, उसके बाद दुनिया में “स्टैगफ्लेशन’ (उच्च मुद्रास्फीति और घटती विकास दर) की आशंकाएं बढ़ गई हैं। फेडरल रिजर्व (अमेरिकी सेंट्रल बैंक या “फेड’) के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने स्पष्ट किया है कि फेड इस पर प्रतिक्रिया देने की जल्दी में नहीं है। हालांकि बाजार पहले ही इस साल चार दरों में कटौती का अनुमान लगा रहा है, जो यह बताता है कि जल्द ही सेंट्रल बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के बजाय ग्रोथ को प्रोत्साहित करने का रास्ता चुनेगा।

लेकिन इससे फेड की मुद्रास्फीति-विरोधी साख और कमजोर होगी। लगातार पांच वर्षों से अमेरिकी केंद्रीय बैंक अपने 2 प्रतिशत के मुद्रास्फीति लक्ष्य को पूरा करने में विफल रहा है। अपने स्वयं के अनुमानों के अनुसार, वह इस वर्ष और अगले वर्ष भी नाकाम रहने वाला है। लेकिन अब तक इसकी कीमत केवल जो बाइडेन ने चुकाई है।

जहां तक फेड के गवर्नरों की बात है, वे तो मुद्रास्फीति-लक्ष्य को चूकने के बहाने पेश करते रहते हैं। पहले उन्होंने कोविड लॉकडाउन के कारण आपूर्ति में व्यवधान की दलील पेश की, फिर महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर सरकारी खर्चों और अब टैरिफ का हवाला दे रहे हैं। अधिकांश अर्थशास्त्री भी सेंट्रल बैंक के इन बहानों को स्वीकार करते हैं।

पिछले 15 वर्षों के “ईज़ी मनी’ वाले दौर- जब वास्तविक दरें पहली बार नकारात्मक हो गई थीं- की तुलना में लगभग 1.8 प्रतिशत की वास्तविक फेड फंड दर अपेक्षाकृत अधिक दिखती है। हालांकि 2009 से पहले के मानदंडों की तुलना में दर बहुत अधिक नहीं है और पर्याप्त प्रतिबंधात्मक नहीं रही है।

पिछले पांच वर्षों की लगातार उच्च मुद्रास्फीति ने पिछले बीस वर्षों की कम मुद्रास्फीति को मिटा दिया है। अब, सीपीआई और पीएसई दोनों ही उस स्तर से काफी अधिक हैं, जो तब होता यदि फेड अपने 2 प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त करता रहता।

पिछली पीएसई रिपोर्ट फेड लक्ष्य से लगभग एक अंक ऊपर आई थी। फिर भी गवर्नर इस बात पर विचार कर रहे हैं कि दरों में कटौती कब की जाए, इस विश्वास के साथ कि इस वर्ष टैरिफ से मुद्रास्फीति दर में वृद्धि अस्थायी हो सकती है।

नौकरियों पर एक नवीनतम रिपोर्ट से पता चला है कि बेरोजगारी कम और स्थिर बनी हुई है। औसत आय की तुलना में अमेरिकी घरों की कीमतें ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर हैं, जिससे घर के मालिकाना हक का सपना तेजी से दूर होता जा रहा है। वित्तीय बाजारों में हाल ही में हुई बिकवाली के बावजूद, ऐतिहासिक मानकों के अनुसार संपत्ति की कीमतों के लिए मूल्यांकन उच्च बना हुआ है, जिसका लाभ मुख्य रूप से बहुत अमीर लोगों को मिलता है।

फेड ने पिछले सितंबर में अपने पूर्वाग्रह की फिर से पुष्टि की। श्रम बाजार में कमजोरी के मामूली संकेतों पर प्रतिक्रिया करते हुए उसने अपनी मुख्य दर में 50 आधार अंकों की कटौती कर दी, जो बाजार की अपेक्षा से दोगुनी थी।

शेयर की कीमतों में उछाल आया और मुद्रास्फीति फिर से बढ़ गई। इस बार भी बाजार मानकर चल रहा है कि फेड ट्रम्प के टैरिफ के समान ही अधिक दरों में कटौती के साथ प्रतिक्रिया देगा। फेड को ट्रम्प के दबाव के आगे न झुककर अपनी स्वतंत्रता की पुष्टि करनी चाहिए, जो कि अनुमानित रूप से अब दरों में कटौती चाहते हैं। क्योंकि अमेरिकी लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान हैं।

सर्वेक्षणों से पता चलता है कि मुद्रास्फीति अब उनकी सबसे बड़ी चिंता है और फेड पर भरोसा तेजी से घट रहा है। पॉवेल ने खुद इस जोखिम को स्वीकार किया कि बढ़ती मुद्रास्फीति की आशंकाएं अब मजबूत हो जाएंगी। कई वर्षों तक अपने लक्ष्य से चूकने के बाद, फेड के लिए टैरिफ से मुद्रास्फीति के नतीजों को क्षणिक मानकर खारिज करना और एक बार फिर अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने पर लौटना एक गलती होगी।

बेरोजगारी स्थिर बनी हुई है। महंगाई बढ़ रही है। घरों की कीमतें ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर हैं, जिससे अपने घर का सपना अमेरिकियों से तेजी से दूर होता जा रहा है। ऐसे में सेंट्रल बैंक को ट्रम्प के दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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