नई दिल्ली10 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें सीजेआई हैं।
रोहिंग्या मामले में CJI सूर्यकांत की टिप्पणी के सपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट और देशभर की हाईकोर्ट के 44 जज समर्थन में आए हैं। 9 दिसंबर को सभी जजों के साइन वाला लेटर जारी किया गया।
इसमें लिखा गया-
हम रिटायर जज रोहिंग्या प्रवासियों के मामले में सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी के खिलाफ चलाए जा रहे गलत अभियान पर कड़ी आपत्ति जताते हैं। आलोचना हो सकती है, लेकिन यह अभियान न्यायपालिका की छवि खराब करने की कोशिश है।

44 जजों का ये रिएक्शन 5 दिसंबर को रिटायर जजों, वकीलों और कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स के सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ जारी लेटर के विरोध में आया है।
इसमें कहा गया था- रोहिंग्या पर की गई टिप्पणी अमानवीय और संविधानिक मूल्यों के खिलाफ है। रोहिंग्या को दुनिया के सबसे उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों में बताया गया है। साथ ही रोहिंग्या लोगों को अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षा का अधिकार बताया गया।
दरअसल, 2 दिसंबर को CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा था कि अगर कोई गैर-कानूनी तरीके से भारत में घुस आता है, तो क्या उसे ‘रेड कार्पेट वेलकम’ देना चाहिए, जबकि देश के अपने नागरिक ही गरीबी से जूझ रहे हैं?

देश में रोहिंग्या की स्थिति पर 44 जजों के बताए फैक्ट
- रोहिंग्या भारतीय कानून के तहत शरणार्थी नहीं माने जाते।ज्यादातर रोहिंग्या अवैध तरीके से आए हैं और सिर्फ दावा करने से उन्हें शरणार्थी का दर्जा नहीं मिल जाता।
- भारत 1951 के UN Refugee Convention का सदस्य नहीं है।हमारे दायित्व संविधान और भारतीय कानून तय करते हैं, कोई अंतरराष्ट्रीय संधि नहीं।
- बड़ी चिंता यह है कि अवैध रूप से आए लोगों को आधार, राशन कार्ड जैसे दस्तावेज कैसे मिले।यह गड़बड़ी हमारे सिस्टम को नुकसान पहुंचाती है और मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
- इसलिए कोर्ट की निगरानी में एक SIT बनना जरूरी हो सकता हैताकि जांच हो सके कि ऐसे दस्तावेज किसने जारी किए, कौन-कौन शामिल था, और कहीं कोई अवैध नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा।
- म्यांमार में भी रोहिंग्या की नागरिकता को लेकर विवाद है।इसलिए भारत में भी अदालत को कानूनी तथ्यों के आधार पर ही फैसला करना चाहिए।
जज बोले- न्यायपालिका का रुख बिलकुल सही
- अदालत ने देश की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए साथ ही मानव गरिमा की रक्षा करते हुए संतुलित रुख अपनाया है। इसे अमानवीय कहना मुख्य न्यायाधीश और अदालत दोनों के साथ अन्याय है। अगर हर कानूनी सवाल पर अदालत को पक्षपाती कहा जाएगा, तो न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाएगी।
- हम सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश पर पूरा विश्वास जताते हैं। हम उन लोगों की निंदा करते हैं जो अदालत की बातों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं। हम इस बात का समर्थन करते हैं कि अवैध तरीके से भारतीय दस्तावेज पाने वालों की जांच SIT करे।
- भारत का संविधान मानवता और सतर्कता दोनों की मांग करता है। कोर्ट ने दोनों का पालन किया है और उसे समर्थन मिलना चाहिए, न कि बदनाम किया जाना चाहिए।
44 जजों का जारी लेटर यहां पढ़ें…



5 दिसंबर: लेटर में जजों ने कहा- CJI गरीबों के कस्टोडिन
पूर्व जजों, वकीलों और कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को लेटर लिखकर आपत्ति जताते हुए कहा था- CJI सिर्फ एक कानूनी अधिकारी ही नहीं हैं बल्कि गरीबों के अधिकारों के कस्टोडियन और आखिरी फैसला सुनाने वाले भी हैं, जिनकी बातों का देश की सोच में वजन होता है और उनका असर दूर तक होता है। पूरी खबर पढ़ें…
2 दिसंबर: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हमारे ही नागरिक गरीबी से जूझ रहे
सुप्रीम कोर्ट ने भारत में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के कानूनी दर्जे पर कड़े सवाल उठाते हुए पूछा था कि अगर किसी के पास भारत में रहने की कानूनी अनुमति ही नहीं है और वह घुसपैठिया है, तो हम उसे सभी सुविधाएं कैसे दे सकते हैं? भारत गरीबों का देश है… पहले अपने नागरिकों की देखभाल जरूरी है। पूरी खबर पढ़ें…
16 मई: कुछ याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि 43 रोहिंग्या को अंडमान सागर में छोड़ दिया गया। कोर्ट ने कहा कि देश कठिन समय से गुजर रहा है और ऐसे “कल्पनिक दावे” नहीं करने चाहिए।
8 मई: कोर्ट ने कहा था कि अगर रोहिंग्या भारतीय कानून के तहत विदेशी पाए जाते हैं, तो उन्हें वापस भेजना ही होगा। अदालत ने यह भी कहा था कि संयुक्त राष्ट्र (UNHCR) का पहचान पत्र भारतीय कानूनों में बहुत मददगार नहीं है।


………………………..
रोहिंग्या मुस्लिमों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
ओवैसी बोले- भारतीय मुस्लिम नागरिक नहीं बंधक हैं: हमें पाकिस्तानी, रोहिंग्या कहा जाता; रिजिजू ने कहा था- अल्पसंख्यकों को ज्यादा सुविधाएं मिलतीं

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने जुलाई 2025 में कहा था कि भारत के अल्पसंख्यक अब दूसरे दर्जे के नागरिक भी नहीं हैं। हम बंधक हैं। अगवा कर बांग्लादेश में फेंक दिया जाना क्या संरक्षण है। उनका जवाब केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू की X पोस्ट पर आया था, जिसमें लिखा था- भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों से ज्यादा सुविधाएं और सुरक्षा मिलती है। पूरी खबर पढ़ें…








