लेह में आज भी कर्फ्यू:  गृह मंत्रालय बोला– बांगचुक ने लोगों को भड़काया; लद्दाख को पूर्ण राज्य की मांग पर हिंसा में 4 की मौत
टिपण्णी

लेह में आज भी कर्फ्यू: गृह मंत्रालय बोला– बांगचुक ने लोगों को भड़काया; लद्दाख को पूर्ण राज्य की मांग पर हिंसा में 4 की मौत

Spread the love


लेह8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
प्रदर्शनकारियों ने CRPF की गाड़ी में आग लगा दी और लेह में बीजेपी का ऑफिस फूंक दिया। - Dainik Bhaskar

प्रदर्शनकारियों ने CRPF की गाड़ी में आग लगा दी और लेह में बीजेपी का ऑफिस फूंक दिया।

लेह हिंसा पर गृह मंत्रालय ने बुधवार रात बयान में कहा, ‘सोनम वांगचुक ने अपने भड़काऊ बयानों से भीड़ को उकसाया, हिंसा के बीच अपना उपवास तो तोड़ा, लेकिन हालात काबू के प्रयास की जगह एम्बुलेंस से अपने गांव चले गए।’

मंत्रालय ने कहा कि वांगचुक जिन मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर थे, उन पर हाईलेवल कमेटी की चर्चा जारी है। कई नेताओं ने वांगचुक से हड़ताल खत्म करने का कहा था, लेकिन उन्होंने हड़ताल जारी रखी थी।

दरअसल, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को 15 दिन से भूख हड़ताल पर सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में छात्रों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने उनकी पिछले मांगें पूरी न करने के विरोध में बुधवार को बंद बुलाया था। इसी दौरान हिंसा हुई। छात्रों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की थी। भाजपा ऑफिस और CRPF की गाड़ी में आग लगाई।

इसके बाद प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाबलों से झड़प हुई। इसमें 4 लोगों की मौत हुई, 70 से ज्यादा लोग घायल हुए। 30 के करीब सुरक्षाकर्मी भी घायल हैं। प्रशासन ने लेह में बिना अनुमति रैली-प्रदर्शन पर बैन लगाया। जो आज भी लागू है।

गृह मंत्रालय के जारी प्रेस नोट की 6 मुख्य बातें…

  • 10 सितम्बर 2025 को सोनम वांगचुक ने अनशन शुरू किया। उनकी मांग थी कि लद्दाख को राज्य का दर्जा मिले और 6वीं अनुसूची में शामिल किया जाए। सरकार की पहले से ही अपेक्स बॉडी लेह और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस से इस पर लगातार बातचीत जारी है।
  • इस बातचीत से बड़े फैसले लिए गए- 1. अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 45% से बढ़ाकर 84% किया गया। 2. परिषदों में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया गया। 3. भोटी और पर्गी भाषाओं को आधिकारिक भाषा बनाया गया। 4.1800 नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई। लेकिन कुछ लोग इस प्रगति से खुश नहीं हुए और बातचीत को बिगाड़ने की कोशिश करने लगे।
  • HPC की अगली बैठक 6 अक्टूबर को होगी। इसके अलावा 25 और 26 सितम्बर को भी नेताओं के साथ बैठकें होंगी। जिन मुद्दों को लेकर वांगचुक अनशन कर रहे थे, वे पहले से ही HPC में चर्चा का हिस्सा हैं। कई नेताओं ने उनसे अनशन खत्म करने को कहा, लेकिन उन्होंने अरब स्प्रिंग और नेपाल Gen Z आंदोलन जैसे उदाहरण देकर लोगों को भड़काना जारी रखा।
  • 24 सितंबर सुबह 11. 30 बजे, भीड़ अनशन स्थल से निकलकर एक राजनीतिक दल के दफ्तर और लेह के सरकारी CEC दफ्तर पर टूट पड़ी। उन्होंने दफ्तरों और वाहनों को आग लगा दी, पुलिस पर हमला किया और 30 से ज्यादा पुलिस/CRPF जवान घायल हुए। हालात बिगड़ने पर पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिसमें कुछ लोगों की मौत हो गई।
  • 24 सितंबर दोपहर 4 बजे तक हालात काबू में आए। सरकार का कहना है कि यह हिंसा सोनम वांगचुक के भड़काऊ भाषणों से हुई। हिंसा के बीच ही उन्होंने अनशन तोड़ा और बिना स्थिति संभालने की कोशिश किए गांव लौट गए।
  • सरकार ने लद्दाख की जनता को संवैधानिक सुरक्षा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही लोगों से अपील है कि वे पुराने या भड़काऊ वीडियो मीडिया या सोशल मीडिया पर न फैलाएं।

हिंसक प्रदर्शन की 4 तस्वीरें…

सोनम वांगचुक के समर्थन में सैकड़ों स्थानीय लोग प्रदर्शन में शामिल हुए।

सोनम वांगचुक के समर्थन में सैकड़ों स्थानीय लोग प्रदर्शन में शामिल हुए।

पुलिस छात्रों के प्रदर्शन रोकने आई तो प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की।

पुलिस छात्रों के प्रदर्शन रोकने आई तो प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की।

पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों ने लेह में बीजेपी ऑफिस में आग लगाई।

पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों ने लेह में बीजेपी ऑफिस में आग लगाई।

प्रदर्शन कर रहे युवा बेकाबू हो गए और CRPF की गाड़ी भी फूंकी।

प्रदर्शन कर रहे युवा बेकाबू हो गए और CRPF की गाड़ी भी फूंकी।

अब जानिए हिंसा कैसे भड़की…2 पॉइंट में

  • सोशल मीडिया से भीड़ जुटाई: आंदोलनकारियों ने 23 सितंबर की रात 24 सितंबर को लद्दाख बंद बुलाने का आह्वान किया था। भीड़ जुटाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया। लोगों से लेह हिल काउंसिल पहुंचने की अपील की। इसका असर दिखा और बड़ी तादाद में लोग पहुंचे।
  • पुलिस-प्रदर्शनकारियों की झड़प: लेह हिल काउंसिल के सामने आंदोलनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड्स लगा रखे थे। जब आंदोलन कारी आगे बढ़े तो पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी, लेकिन भीड़ ने पुलिस की गाड़ी जलाई और तोड़फोड़ की।

लेह हिंसा पर किसने क्या कहा…

अमित मालवीय, भाजपा IT सेल प्रमुख

अमित मालवीय ने अपने X अकाउंट पर तस्वीर पोस्ट की, चश्मा पहने शख्स का नाम फुंतसोग स्टैंजिन त्सेपग बताया।

अमित मालवीय ने अपने X अकाउंट पर तस्वीर पोस्ट की, चश्मा पहने शख्स का नाम फुंतसोग स्टैंजिन त्सेपग बताया।

मालवीय ने लिखा- लद्दाख में दंगा कर रहा यह व्यक्ति फुंतसोग स्टैंजिन त्सेपग हैं, जो अपर लेह वार्ड से कांग्रेस पार्टी का पार्षद है। इसे साफ तौर पर भीड़ को उकसाते और उस हिंसा में हिस्सा लेते देखा जा सकता है, जिसमें बीजेपी कार्यालय और हिल काउंसिल को निशाना बनाया गया। क्या यही वह तरह की अशांति है, जिसके बारे में राहुल गांधी सपने देखते रहे हैं?

कविंदर गुप्ता, लेह उपराज्यपाल

लेह में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में साजिश की गंध आ रही है। कुछ लोग जानबूझकर लोगों को भड़का रहे हैं और इसकी तुलना बांग्लादेश और नेपाल में हुए विरोध प्रदर्शनों से की जा रही है। विरोध में लद्दाख के बाहर के लोग शामिल हैं या नहीं, इसकी जांच की जाएगी।

शेख बशीर अहमद, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता

यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारा मानना है कि 5 अगस्त 2019 के फैसले को लेह या जम्मू-कश्मीर के लोगों ने स्वीकार नहीं किया। दुख की बात है कि लोग सिर्फ अब ही विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि तब से मांग कर रहे हैं जब उनका क्षेत्र यूनियन टेरिटरी बना था।

एम ए बेबी, सीपीआई(एम) महासचिव

बीजेपी ने एक बार फिर लेह और त्रिपुरा की जनता से विश्वासघात किया है। जनता का गुस्सा सड़कों पर दिख रहा है, हालांकि पार्टी कार्यालयों पर हमला समाधान नहीं है। प्रशासन की निर्दयी दमनकारी कार्रवाई के कारण 4 लोगों की जान गई।

6 अक्टूबर को सरकार के साथ बैठक

इन मांगों को लेकर सरकार के साथ बैठक दिल्ली में 6 अक्टूबर को होगी। साल 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A हटाते समय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए थे। सरकार ने उस समय ही राज्य के हालात सामान्य होने पर पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का भरोसा दिया था।

आर्टिकल 370 हटने के बाद लद्दाख में विरोध शुरू

केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाकर पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बना। लेह और कारगिल को मिलाकर लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश बना था।

इसके बाद लेह और कारगिल के लोग खुद को राजनीतिक तौर पर बेदखल महसूस करने लगे। उन्होंने केंद्र के खिलाफ आवाज उठाई। बीते दो साल में लोगों ने कई बार विरोध-प्रदर्शन कर पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा मांगते रहे हैं, जिससे उनकी जमीन, नौकरियां और अलग पहचान बनी रही, जो आर्टिकल 370 के तहत उन्हें मिलता था।

अगस्त 2024 में गृह मंत्री ने लद्दाख में 5 नए जिले बनाने का ऐलान किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 अगस्त 2024 को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 5 नए जिले बनाने की घोषणा की थी। नए जिलों का नाम जांस्कर, द्रास, शाम, नुब्रा और चांगथांग होगा। नए जिलों की घोषणा से पहले लद्दाख में केवल दो जिले थे, लेह और कारगिल। अब इनकी संख्या बढ़कर 7 हो जाएगी।

………………………..

यह खबर भी पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट बोला-पहलगाम जैसे हमलों को अनदेखा नहीं कर सकते: जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य बनाने का मामला

सुप्रीम कोर्ट में अगस्त महीने में जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा दोबारा बहाल करने के मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की थी। कहा था कि जम्मू-कश्मीर की जमीनी हकीकत और पहलगाम जैसी आतंकी घटनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *