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- Virag Gupta’s Column Threats To National Security From Drones Are Constantly Increasing
5 घंटे पहले
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विराग गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के वकील, अनमास्किंग वीआईपी पुस्तक के लेखक
दिसम्बर 1995 में पुरलिया में आसमान से हथियारों की खेप आने पर हड़कंप मच गया था। 30 साल बाद अब पाकिस्तान से सीमावर्ती राज्यों में ड्रोन से हथियारों और ड्रग्स आपूर्ति के मामले इतने बढ़ गए हैं कि मीडिया में रिपोर्टिंग ही नहीं होती। अंतरिक्ष से निर्बाध सैटेलाइट इंटरनेट, क्रिप्टो करंसी की आपराधिकता और ड्रोन की विस्फोटक फुलझड़ियों से युद्ध और आतंक की नए तरीके से वापसी हो सकती है। इसलिए ड्रोन के नियमन से जुड़े 4 पहलुओं को समझना जरूरी है।
1. रजिस्ट्रेशन : 2021 में बनाए गए शिथिल नियमों के बाद भारत में ड्रोन क्रांति शुरू हुई है। 250 ग्राम से कम वजन वाले नैनो ड्रोन को रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के बगैर शौकिया तौर पर कोई भी उड़ा सकता है। ड्रोन को 100 रु. की फीस से रजिस्टर्ड कराया जा सकता है। इसके बावजूद मॉडल रिमोट पायलट एयरक्रॉफ्ट सिस्टम वाले 25 किलो से कम के ड्रोन- जिनका रिसर्च आदि में इस्तेमाल होता है- उनके रजिस्ट्रेशन की भी जरूरत नहीं है। गैर-रजिस्टर्ड ड्रोन को कोई भी उड़ा सकता है। बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए सिर्फ 5 दिन की ट्रेनिंग के बाद पुलिस जांच के बगैर ड्रोन पायलट का लाइसेंस मिल सकता है।
सीडीएस अनिल चौहान के अनुसार पानी की बोतल जैसे छोटे ड्रोन से भी बड़े स्तर पर तबाही मचाई जा सकती है। छोटे ड्रोन इतनी तेजी से उड़ते हैं कि प्रतिक्रिया देने के लिए सिर्फ 90 सेकंड का समय मिलता है। भारत में सभी तरह के ड्रोन के रजिस्ट्रेशन को जरूरी करने के साथ उड़ान के नियमन के लिए पुलिस को अधिकार मिलने चाहिए।
2. जुर्माना : नागरिकों की सुरक्षा के लिए लिफ्ट के रजिस्ट्रेशन और मेंटेनेंस के लिए कड़े नियम और जुर्माने के प्रावधान हैं। लेकिन देश की सुरक्षा से जुड़े ड्रोन के कारोबार को खुली छूट मिली है। ग्रेटर नोएडा में लगभग 80 हजार लिफ्ट में से सिर्फ 7702 ने 15 हजार रु. की फीस देकर रजिस्ट्रेशन कराया है। बकाया लिफ्ट के रजिस्ट्रेशन के लिए जिला प्रशासन ने 10 हजार रु. का जुर्माना देने का अभियान शुरू किया है। 2024 में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए 8 करोड़ से ज्यादा चालान किए गए।
ड्रोन नियमों के उल्लंघन के लिए अधिकतम 1 लाख रु. के जुर्माने का ही प्रावधान हैं। आपराधिक कार्रवाई के लिए ड्रोन नियमों में कोई प्रावधान नहीं है। पिछले चार सालों में सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान से आए 391 ड्रोन को जब्त किया है। ड्रोन से जुड़े नियमों को नागरिक उड्डयन मंत्रालय लागू करता है। वाहनों के रजिस्ट्रेशन और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े नियमों को पुलिस लागू करती है। उसी तर्ज पर ड्रोन से जुड़े मामलों में कार्रवाई के लिए राज्यों की पुलिस को स्पष्ट अधिकार मिलने चाहिए।
3. पाकिस्तान : सीमावर्ती राज्यों में पाकिस्तान ड्रोन के जरिए ड्रग्स और हथियार की नियमित आपूर्ति कर रहा है। ड्रोन नियमों के अनुसार भारत में अधिकांश इलाके ग्रीन जोन में आते हैं, जहां 400 फीट से कम ऊंचाई पर ड्रोन को लोग मनमाफिक तरीके से उड़ा सकते हैं। लेकिन ऐसे ड्रोन से लोगों की प्राइवेसी और सुरक्षा के खतरों से निपटने के लिए कोई प्रावधान नहीं हैं। यलो जोन में ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ती है।
वहीं देश में 9969 रेड जोन हैं, जिनमें ड्रोन उड़ाना प्रतिबंधित है। पिछले दो सालों से सरकार के अनेक दावों के बावजूद पाकिस्तानी सीमा पर एंटी ड्रोन सिस्टम नहीं लगा। रूस पर यूक्रेन के हमले से साफ है कि एक लाख रु. से कम के ड्रोन से अरबों रुपयों के युद्धक विमानों को नष्ट किया जा सकता है। तस्करी, ड्रग्स और आतंकी हमलों के मद्देनजर सीमावर्ती राज्यों में सभी तरह के ड्रोन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की जरूरत अब आन पहुंची है।
4. स्टार्टअप : भारत में लगभग 550 स्टार्टअप ड्रोन क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जिन्हें नियमों और टैक्स में छूट मिलती है। ड्रोन स्टार्टअप को सब्सिडी देने के लिए पीएलआई के तहत आवंटन को 18 गुना बढ़ाकर 3 हजार करोड़ रु. करने की योजना है। भारत की ड्रोन इंडस्ट्री से जुड़ी तकनीक और कलपुर्जों की आपूर्ति में चीन का वर्चस्व है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार चीनी उपकरणों से देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को खतरा है।
नमो ड्रोन दीदी जैसी कल्याणकारी योजनाओं, आपदा प्रबंधन आदि के लिए सरकार को ड्रोन का इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन ड्रोन से जुड़े बढ़ते खतरों को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से स्टार्टअप और विदेशी कम्पनियों के लिए सख्त नियम बनने चाहिए। ड्रोन से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा के बजाय निजी स्टार्टअप के आर्थिक लाभ को वरीयता देने के दीर्घकालिक नुकसान हो सकते हैं।
- ड्रोन से जुड़े खतरों को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से स्टार्टअप और विदेशी कम्पनियों के लिए सख्त नियम बनने चाहिए। इसमें निजी स्टार्टअप के आर्थिक लाभ को वरीयता देने के दीर्घकालिक नुकसान हो सकते हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)








