वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे का निधन:  अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हुए थे; अग्रवाल ने लिखा- जीवन का सबसे अंधकारमय दिन – Bihar News
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वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे का निधन: अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हुए थे; अग्रवाल ने लिखा- जीवन का सबसे अंधकारमय दिन – Bihar News

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अनिल अग्रवाल (दाएं) ने बेटे के साथ ये तस्वीर फेसबुक पर शेयर की है।

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन हो गया है। उनकी उम्र केवल 49 साल थी। अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी कि अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हुए थे। उन्हें इलाज के लिए माउंट साइनाई अस्पताल में भर्

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अनिल अग्रवाल ने बुधवार रात करीब 10 बजे X पर पोस्ट कर बेटे के निधन की जानकारी दी। एक भावुक पोस्ट में बेटे के निधन को जीवन का सबसे अंधकारमय दिन बताया। उन्होंने लिखा कि वे अपने बेटे से किए हुए वादे को निभाते हुए अपनी कमाई का 75% समाज को लौटाएंगे।

पढ़िए बेटे अग्निवेश के लिए अनिल अग्रवाल का पूरा पोस्ट

अनिल अग्रवाल ने बेटे के साथ तस्वीरें शेयर की हैं…

अनिल अग्रवाल के साथ अग्निवेश अग्रवाल (फाइल फोटो)

अनिल अग्रवाल के साथ अग्निवेश अग्रवाल (फाइल फोटो)

अग्निवेश अग्रवाल एक पार्टी में शामिल हुए थे। (फाइल फोटो)

अग्निवेश अग्रवाल एक पार्टी में शामिल हुए थे। (फाइल फोटो)

पारिवारिक पार्टी में अनिल अग्रवाल और अग्निवेश अग्रवाल (फाइल फोटो)

पारिवारिक पार्टी में अनिल अग्रवाल और अग्निवेश अग्रवाल (फाइल फोटो)

अनिल अग्रवाल ने बताया कि उनके बेटे अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। अजमेर के मेयो कॉलेज से उसने पढ़ाई की और एक सफल पेशेवर करियर बनाया। फुजैराह गोल्ड की स्थापना में अग्निवेश ने अहम भूमिका निभाई और हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन भी रहे। अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे को एक खिलाड़ी, संगीतकार और लीडर बताया, जो अपनी गर्मजोशी, विनम्रता और दयालुता के लिए जाने जाते थे।

हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के 2019 तक चेयरमैन रहे थे

कॉमर्स में ग्रेजुएट अग्निवेश जिंक उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के 2019 तक चेयरमैन रहे। उन्होंने भारत में पारंपरिक खनन पद्धतियों को बदलने की चुनौती स्वीकार करते हुए नई तकनीक का इस्तेमाल किया और इंटरनेशनल लेवल पर बेंचमार्किंग स्थापित किया।

उन्होंने हिंदुस्तान जिंक को विश्व की टॉप कंपनियों में स्थापित किया। वह 1995 से 2013 तक मद्रास एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड के डायरेक्टर, 2009 से स्टरलाइट एनर्जी लिमिटेड के गैर-कार्यकारी निदेशक, तेंगपानी टी कंपनी लिमिटेड, ट्विन स्टार इंटरनेशनल लिमिटेड, स्टरलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, स्टरलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर होल्डिंग्सा प्राइवेट लिमिटेड, स्टरलाइट आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड, प्राइमेक्स हेल्थकेयर एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रहे हैं।

साथ ही वे फुजैराह गोल्ड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रहे हैं, जिसकी स्थापना 2009 में हुई थी और तब से वे अलुवर्क्स लिमिटेड के बोर्ड में हैं। साथ ही वर्तमान में वेदांता से जुड़ी पावर कंपनी

अब पिता अनिल अग्रवाल के बारे में पढ़ें…

पटना में हुआ था अनिल अग्रवाल का जन्म

मेटल किंग के नाम से मशहूर अनिल अग्रवाल के परिवार की जड़ें राजस्थान में रही हैं। उनके पिता कारोबार के सिलसिले में बिहार चले गए थे। इससे पहले परिवार कुछ समय तक राजस्थान में रहा था। अनिल अग्रवाल का जन्म पटना में हुआ, पर उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जयपुर के चौमूं और सीकर में की।

अनिल अग्रवाल के परिवार की 7 जनवरी 2026 को संपत्ति 3.3 बिलियन डॉलर है, जो कि भारतीय रुपए में ₹29,654 करोड़ होता है। दुनियाभर के अमीरों की लिस्ट में वे 1250वें नंबर पर हैं। सोर्स- www.forbes.com

अनिल अग्रवाल के परिवार की 7 जनवरी 2026 को संपत्ति 3.3 बिलियन डॉलर है, जो कि भारतीय रुपए में ₹29,654 करोड़ होता है। दुनियाभर के अमीरों की लिस्ट में वे 1250वें नंबर पर हैं। सोर्स- www.forbes.com

पटना से लंदन : हर कदम पर मुश्किलें, सबको अवसर बनाया

छोटा सूटकेस और आंखों में सपने अनिल अग्रवाल का जन्म 1954 में पटना के मारवाड़ी परिवार में हुआ। सरकारी स्कूल में पढ़े। पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल एल्यूमीनियम कंडक्टर के छोटे कारोबारी थे। पिता के बिजनेस में हाथ बंटाया। 19 की उम्र में बेहतर भविष्य की तलाश में मुंबई पहुंचे।

वहां 9 बिजनेस किए, सभी फेल रहे। फिर वेदांता की स्थापना की। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, ‘मैंने सोचा नहीं था कि साधारण आदमी होते हुए राष्ट्र निर्माण से योगदान दूंगा।’

वेदांता, जिंक, लेड, एल्युमिनियम और सिल्वर बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। इसके फाउंडर अनिल अग्रवाल इंडिया के मेटल मैन के नाम से जाने जाते हैं।

जानिए वेदांता के एंपायर बनने की कहानी…

अनिल अग्रवाल चार भाई-बहन थे। पिता की आमदनी बहुत ज्यादा नहीं थी। वे पटना में ही एक छोटी सी एल्युमिनियम कंडक्टर की दुकान चलाते थे।

अनिल की शुरुआती पढ़ाई पटना में ही हुई। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें पटना से बाहर जाना था, लेकिन उन्होंने तय किया कि वे पिता के बिजनेस में हाथ बटाएंगे। इसके बाद वे पिता के साथ काम करने लगे।

हालांकि कुछ सालों बाद अनिल का मन फिर से बाहर जाने का करने लगा। 19 साल की उम्र में वे पटना से मुंबई आ गए। साथ में था एक टिफिन बॉक्स और बिस्तर। अनिल ने पिता को बिजनेस करते देखा था, इसलिए उन्हें नौकरी की दुनिया पसंद नहीं आई।

अनिल अग्रवाल पिता के साथ बैठे हैं। एक सोशल मीडिया पोस्ट में अनिल ने लिखा था कि इतनी व्यस्तता के बावजूद हर दिन वे पिता से बात करते थे।

अनिल अग्रवाल पिता के साथ बैठे हैं। एक सोशल मीडिया पोस्ट में अनिल ने लिखा था कि इतनी व्यस्तता के बावजूद हर दिन वे पिता से बात करते थे।

छोटे-छोटे धंधे में हाथ आजमाया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली

मुंबई आने के बाद कुछ सालों तक अनिल अलग-अलग धंधे में हाथ आजमाते रहे। कुछ समय तक कबाड़ी का भी बिजनेस किया।

कैंब्रिज में एक बार बोलते हुए उन्होंने बताया था कि मेरे शुरुआती 30 साल संघर्ष में बीते। सालों तक डिप्रेशन में रहा।

उसके बाद मुंबई में एक घर लिया। फिर पत्नी और बेटे को भी बुला लिया। कैंब्रिज में स्पीच के दौरान अनिल ने पत्नी की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्होंने उस छोटे से मकान को घर बना दिया।

एक बार सोशल मीडिया पर अनिल ने बताया था ‘मैंने बहुत उम्मीदों से पहली कंपनी खरीदी, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। दस साल बहुत मुश्किल हालातों में गुजरे।

इसके बाद 1976 में शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी खरीदी। तब मेरे पास वर्कर्स को सैलरी देने और रॉ मटेरियल खरीदने के लिए पैसे नहीं थे।

दिन-दिन भर मैं पेमेंट क्लियर कराने के लिए बैंकों के चक्कर काटता था। इसके बाद मैंने अलग-अलग फील्ड में 9 बिजनेस शुरू किए। हर बिजनेस में असफलता मिली, लेकिन मैंने हार नहीं मानी।’

इसके बाद 1976 में अनिल ने एक नई कंपनी शुरू की और नाम रखा वेदांता रिसोर्सेज। शुरुआत में ही इस बिजनेस में उन्हें फायदा होने लगा। इस प्रॉफिट का उन्होंने दूसरी कंपनियों को अधिग्रहित करने में इस्तेमाल किया।

1993 में उन्होंने औरंगाबाद में एल्युमिनियम शीट्स और फॉइल्स बनाने का प्लांट लगाया। इसके साथ ही यह भारत की पहली कॉपर रिफाइनरी प्राइवेट कंपनी बन गई।

पत्नी किरन के साथ अनिल अग्रवाल। अनिल अपनी कामयाबी के लिए पत्नी को क्रेडिट देते हैं।

पत्नी किरन के साथ अनिल अग्रवाल। अनिल अपनी कामयाबी के लिए पत्नी को क्रेडिट देते हैं।

सरकार के एक फैसले ने अनिल अग्रवाल को भारत का ‘मेटल किंग’ बना दिया

2001 में भारत सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी का ऑफर दिया। तब वेदांता रिसोर्सेज ने भारत एल्युमिनियम कंपनी में 51% शेयर खरीद लिया। यह सौदा 551.50 करोड़ रुपए में हुआ।

अगले ही साल वेदांता ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में 65% हिस्सेदारी खरीद ली। इस तरह वेदांता रिसोर्सेज दो पब्लिक सेक्टर कंपनियों में आधे से ज्यादा शेयर की हिस्सेदार बन गई। कहा जाता है कि जब इन दोनों कंपनियों में वेदांता ने हिस्सेदारी खरीदी तब इनकी हालत अच्छी नहीं थी।

दोनों ही माइनिंग कंपनियां थीं। वेदांता का भी इसी सेक्टर में बिजनेस था। ऐसे में, अनिल अग्रवाल के इस फैसले से वेदांता को खूब फायदा हुआ। यहीं से मेटल प्रोडक्शन सेक्टर में अनिल अग्रवाल स्थापित हो गए। उन्हें भारत का ‘मेटल मैन’ कहा जाने लगा।

पहली भारतीय फर्म जो लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई

2001 में वेदांता की सिस्टर कंपनी स्टरलाइड इंडस्ट्रीज, ब्रोकर हर्षद मेहता के साथ शेयर प्राइज के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में फंस गई। इसमें BPL और विडियोकॉन जैसी कंपनियां भी शामिल थीं।

शेयर बाजार में नियम-कानूनों को देखने वाली संस्था सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी SEBI ने तब स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को कैपिटल मार्केट में बैन कर दिया।

2003 में अनिल अग्रवाल लंदन चले गए। यहां कंपनी को नए नाम वेदांता रिसोर्सेज नाम से खड़ा किया। इसी साल उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज को लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया।

यह पहली बार था जब कोई भारतीय कंपनी लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई थी। इसके बाद दूसरी और भी भारतीय कंपनियां लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुईं। अनिल अग्रवाल को ऑफरिंग से करीब 7 हजार करोड़ रुपए का फायदा भी हुआ।



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