15 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
- कॉपी लिंक

हाल ही में प्रयागराज के कैंट थाना क्षेत्र के निवासी अधिवक्ता विष्णु नारायण पांडेय और उनके एक साथी ऑनलाइन होटल बुकिंग स्कैम का शिकार हो गए। खुद को होटल एजेंट बताने वाले एक साइबर ठग ने वॉट्सएप पर एक लिंक भेजकर उनका भरोसा जीता, लगातार बातचीत की और फिर ओटीपी लेकर उनके क्रेडिट कार्ड से चार बार में कुल 1.70 लाख रुपए उड़ा दिए।
साइबर ठग अक्सर कभी फर्जी वेबसाइट, कभी फोन कॉल तो कभी क्लोन किए गए बुकिंग लिंक से लोगों को निशाना बनाते हैं। आजकल बहुत से लोग अपनी सुविधा के लिए यात्रा से पहले ऑनलाइन होटल बुक करते हैं। ऐसे में इस तरह के स्कैम से बचने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बेहद जरूरी है।
तो चलिए, आज साइबर लिटरेसी कॉलम में हम होटल बुकिंग स्कैम के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- साइबर ठग होटल बुकिंग के नाम पर लोगों को कैसे फंसाते हैं?
- अगर किसी के साथ फ्रॉड हो जाए तो तुरंत क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस
सवाल- होटल बुकिंग स्कैम क्या है और ठग इसे कैसे अंजाम देते हैं?
जवाब- ये एक तरह की ऑनलाइन ठगी है, जिसमें साइबर अपराधी खुद को होटल एजेंट, ट्रैवल एग्जीक्यूटिव या बुकिंग सपोर्ट टीम बताकर लोगों को नकली लिंक, फर्जी वेबसाइट या फर्जी कस्टमर केयर नंबर के जरिए धोखा देते हैं। वे पहले बातचीत करके भरोसा जीतते हैं, फिर पीड़ित से एडवांस पेमेंट ले लेते हैं। पैसा जाते ही वे संपर्क बंद कर देते हैं और बुकिंग फर्जी निकलती है। नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए-

आइए, इन पॉइंट्स को थोड़ा विस्तार से समझते हैं।
फर्जी या क्लोन वेबसाइट
स्कैमर्स किसी होटल या बुकिंग एग्रीगेटर (जैसे Booking.com, MakeMyTrip) की कॉपी करके फर्जी वेबसाइट बना लेते हैं। वे असली वेबसाइट का लोगो, तस्वीरें और डिजाइन चुरा लेते हैं। URL में मामूली सा हेरफेर होता है, जिसे लोग पकड़ नहीं पाते हैं और जाल में फंस जाते हैं।
फर्जी कस्टमर केयर नंबर
साइबर अपराधी गूगल मैप्स या गूगल सर्च पर किसी असली होटल के नाम से अपना फर्जी फोन नंबर लिस्ट कर देते हैं। जब कोई ग्राहक उस होटल को कॉल करता है तो वह स्कैमर से बात करता है, जो बुकिंग में मदद के बहाने क्रेडिट कार्ड की जानकारी या एडवांस पेमेंट मांग लेता है।
फिशिंग ईमेल्स और SMS
स्कैमर्स आपके पसंदीदा होटल पर 70% छूट या आपकी बुकिंग कन्फर्मेशन पेंडिंग है, जैसे आकर्षक या डराने वाले ईमेल और SMS भेजते हैं। इनमें एक लिंक होता है, जो उनकी फर्जी वेबसाइट पर ले जाता है और आपसे भुगतान या निजी जानकारी मांगता है।
सोशल मीडिया के फर्जी विज्ञापन
साइबर ठग फेसबुक या इंस्टाग्राम पर शानदार होटलों की तस्वीरें दिखाकर अविश्वसनीय रूप से सस्ते डील्स का विज्ञापन करते हैं। ये विज्ञापन आपको एक फर्जी बुकिंग पेज पर ले जाते हैं।
सवाल- लोग हाेटल बुकिंग स्कैम के झांसे में कैसे फंस जाते हैं?
जवाब- यह स्कैम बहुत रणनीतिक तरीके से तैयार होता है, इसलिए आम लोग आसानी से धोखा खा जाते हैं। उनके झांसे में फंसने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसेकि-
जल्दबाजी और अर्जेंसी
स्कैमर्स ‘सिर्फ 2 कमरे बचे हैं’ या ‘ऑफर अगले 10 मिनट में खत्म हो रहा है’ जैसी टैक्टिक्स का इस्तेमाल करते हैं। इससे लोग घबराकर बिना सोचे-समझे और जांच-पड़ताल किए पेमेंट कर देते हैं।
सस्ते ऑफर का लालच
जब किसी को 5-स्टार होटल 2-स्टार की कीमत पर मिलता दिखता है तो लालच में आकर वह अन्य खतरों को नजरअंदाज कर देता है। ऐसे ऑफर्स हमेशा स्कैम होते हैं।
गूगल पर दिए नंबर पर भरोसा
अक्सर लोग मानते हैं कि गूगल सर्च या गूगल मैप्स पर दिखने वाला पहला नंबर या पहली वेबसाइट हमेशा सही होती है। वे इस बात से अनजान होते हैं कि स्कैमर्स SEO (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन) ट्रिक्स का इस्तेमाल करके अपनी फर्जी लिस्टिंग को टॉप पर ला सकते हैं।
तकनीकी जागरूकता की कमी
आम लोगों को यह नहीं पता होता कि ‘http’ और ‘https’ में क्या अंतर है या वेबसाइट के URL की स्पेलिंग कैसे चेक की जाती है। वे सुरक्षित पैडलॉक (गूगल के साइड आइकन) पर ध्यान नहीं देते हैं।

सवाल- होटल बुकिंग वेबसाइट असली है या फेक, इसकी पहचान कैसे करें?
जवाब- किसी भी लिंक पर क्लिक करने या पेमेंट करने से पहले कुछ बेसिक चीजों की जांच करनी चाहिए। जैसेकि-
HTTPS
हमेशा सुनिश्चित करें कि वेबसाइट का URL http:// से नहीं, बल्कि https:// से शुरू हो। ‘S’ का मतलब ‘सिक्योर’ होता है। इसके साथ ब्राउजर में एक पैडलॉक का निशान भी दिखता है।
स्पेलिंग
URL की स्पेलिंग को ध्यान से पढ़ें। स्कैमर्स अक्सर असली नाम में मामूली बदलाव करते हैं, जैसे ‘MakeMyTrip’ की जगह ‘MakMyTrip’ या ‘Goibibo’ की जगह ‘Goibibo.co’ लिख देते हैं।
डोमेन नेम
कभी-कभी लिंक लंबा हो सकता है, जैसे www.makemytrip.offers.com। इसमें असली वेबसाइट offers.com है, न कि makemytrip। असली वेबसाइट का नाम हमेशा .com या .in से ठीक पहले आता है (जैसे www.makemytrip.com)।
लिंक पर होवर करें
अगर आप कंप्यूटर पर हैं तो लिंक पर क्लिक किए बिना माउस को उसके ऊपर ले जाएं। आपके ब्राउजर के निचले कोने में वह असली URL दिखेगा, जहां वह लिंक आपको ले जाएगा।
संपर्क डिटेल देखें
असली वेबसाइट पर ‘कॉन्टैक्ट अस’ या ‘अबाउट अस’ पेज जरूर होता है, जिसमें असली पता, काम करने वाला फोन नंबर और आधिकारिक ईमेल आईडी दी होती है।
रिव्यू और सोशल प्रूफ
होटल का नाम गूगल पर अलग से सर्च करें और देखें कि अन्य बुकिंग साइटों पर उसके रिव्यू क्या हैं।
सवाल- क्या गूगल पर दिखने वाला फोन नंबर हमेशा असली होता है?
जवाब- साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर राहुल मिश्रा बताते हैं कि नहीं, गूगल मैप्स पर फोन नंबर को बदलना बेहद आसान है। कई होटल मालिकों ने शिकायत की है कि उनके असली नंबर को स्कैमर्स ने गलत नंबर से बदल दिया, जिससे ग्राहकों के कॉल सीधे ठगों तक पहुंच जाते हैं।
कई बार स्कैमर्स दावा करते हैं कि हम आधिकारिक बुकिंग टीम हैं। फोन पर बात करते हुए वे प्रोफेशनल अंदाज में व्यवहार करते हैं, जिससे संदेह नहीं होता है। इसका सेफ तरीका ये है कि होटल की ऑफिशियल वेबसाइट या उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर दिया गया नंबर ही इस्तेमाल करें।
सवाल- होटल बुकिंग स्कैम से कैसे बचें?
जवाब- इसके लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- अगर स्कैम का शिकार हो जाएं तो तुरंत क्या करना चाहिए?
जवाब- ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं, तुरंत कुछ कदम उठाएं। जैसेकि-
- अगर आपने अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड की जानकारी दी है तो तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर को फोन करके कार्ड ब्लॉक करवाएं या अस्थायी रूप से बंद करवाएं।
- अगर नेटबैंकिंग पासवर्ड, UPI पिन या कोई अन्य लॉगिन डिटेल साझा की है तो उसे फौरन बदल दें।
- फर्जी वेबसाइट का URL, स्कैमर का फोन नंबर, पेमेंट ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन आईडी और आपके बीच हुई कोई भी बातचीत (चैट या ईमेल) को संभाल कर रखें।
- अपने बैंक या UPI एप को तुरंत फ्रॉड ट्रांजैक्शन की सूचना दें।
- फ्रॉड के 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट करें। इससे पैसा रिकवर होने की संभावना बढ़ जाती है।
सवाल- होटल स्कैम की शिकायत कहां कर सकते हैं?
जवाब- साइबर क्राइम पोर्टल की वेबसाइट https://www.cybercrime.gov.in या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर किसी भी ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय पुलिस स्टेशन में एफआईआर भी दर्ज करा सकते हैं।
……………………
साइबर लिटरेसी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए
साइबर लिटरेसी- RTO के नाम से आ रहा फेक चालान: ठगों से सावधान, जानें कैसे होता है ये स्कैम, चालान भरते हुए बरतें 10 सावधानियां

इस स्कैम में ठग लोगों के वॉट्सएप पर ‘RTO e-Challan.apk’ नाम की एक नकली फाइल भेजते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल पर क्लिक करता है, उसके फोन में मालवेयर इंस्टॉल हो जाता है। इसके जरिए वे बैंकिंग डिटेल्स तक पहुंच बना लेते हैं। पूरी खबर पढ़िए…








