सेहत का विज्ञान: जानिए मानसून का 4-स्टेप गट शील्ड प्लान:  बारिश में बढ़ता इंफेक्शन का खतरा, गट हेल्थ को ऐसे रखें ख्याल
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सेहत का विज्ञान: जानिए मानसून का 4-स्टेप गट शील्ड प्लान: बारिश में बढ़ता इंफेक्शन का खतरा, गट हेल्थ को ऐसे रखें ख्याल

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7 घंटे पहलेलेखक: रेणु रखेजा

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जैसे ही बारिश की पहली बूंदें पड़ती हैं, गर्मी से राहत तो मिलती है, लेकिन पेट की परेशानी शुरू हो जाती है। डायरिया, गैस, सूजन और अचानक खानपान से एलर्जी की शिकायतें मानसून में सबसे ज्यादा होती हैं। इसका कारण है हमारे शरीर के अंदर मौजूद ट्रिलियन्स गट माइक्रोबायोम का बिगड़ना। ये बैक्टीरिया और फंगस हमारे पाचन, इम्यूनिटी और मूड को कंट्रोल करते हैं। बारिश में नमी, गंदा पानी और तली-भुनी चीजें इनका संतुलन बिगाड़ देती हैं। नतीजा होता है डिसबायोसिस, यानी शरीर के अंदर अच्छे और बुरे बैक्टीरिया के बीच का संतुलन टूट जाना। अगर आप चाहते हैं कि आपका पेट बारिश में भी स्वस्थ और शांत बना रहे, तो इन 4 आसान उपायों को अपनाइए…

मानसून में क्यों पड़ता है गट हेल्थ पर असर?

पानी से आने वाले बैक्टीरिया– बरसात में गटर ओवरफ्लो हो जाते हैं, जिससे E. coli और Vibrio जैसे हानिकारक बैक्टीरिया पीने के पानी, सलाद और चटनी तक पहुंच जाते हैं।

नमी पसंद करने वाले फंगस– किचन में ह्यूमिडिटी और मसालों पर फफूंद इसे बढ़ावा देते हैं, जिससे पेट की अंदरूनी सतह में सूजन आ सकती है।

विटामिन डी की कमी– बादलों की मोटी परत के कारण धूप नहीं मिलती, जिससे हमारी रोग प्रतिरोधक प्रणाली कमजोर पड़ती है और अच्छे बैक्टीरिया को सपोर्ट नहीं मिल पाता।

आरामदायक लेकिन फाइबर रहित खाना– पकौड़े, इंस्टेंट नूडल्स और ज्यादा चीनी वाली चाय जैसे मानसून स्नैक्स में फाइबर की कमी होती है, जिससे bifidobacteria जैसे अच्छे बैक्टीरिया को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता।

इन आसान तरीकों को अपनाएं…

1. पानी शुद्ध रहेगा तो बीमारी दूर रहेगी

बारिश में सबसे ज्यादा संक्रमण पानी से फैलता है। सिर्फ आरओ पर भरोसा न करें। पानी को दो मिनट उबालें, ठंडा करें और ढककर रखें। बोतलें, फिल्टर रोज साफ करें। कल का बचा पानी आज के पानी में न मिलाएं। पानी शुद्ध रहेगा तो बीमारियों की आधी लड़ाई जीती जाएगी।

2. पेट को दें फर्मेंट खाना

दुकान का दही छोड़िए और घर का ताजा दही खाइए। हर दिन खाने में थोड़ा कंजी, अचार वाला आंवला या डोसा-इडली बैटर शामिल करें। साथ में खाइए चिया सीड्स, दलिया या ओट्स जैसे फाइबर फूड्स। ये अच्छे बैक्टीरिया को ताकत देते हैं और डायरिया में पानी सोखने में मदद करते हैं।

3. अपनी थाली को कलरफुल बनाएं

आधी प्लेट मौसम की सब्जियों से भरिए। लौकी, तुरई, टिंडा फाइबर से भरपूर हैं। चुकंदर, शिमला मिर्च जैसे रंगीन फूड्स में पॉलीफेनॉल्स होते हैं, जो अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं। सब्जियां काटते समय खिड़की के पास बैठें, 10 मिनट की धूप से विटामिन डी मिलेगा, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करेगा।

4. स्ट्रीट फूड सोच-समझकर खाएं

रोज के तड़के में सरसों के दाने, कढ़ी पत्ता, अजवाइन, अदरक, हल्दी और काली मिर्च का इस्तेमाल करें। ये पेट में फंगस और नुकसानदायक बैक्टीरिया को रोकते हैं। चार्ट में उबले चने और ताजा फल शामिल करें। पानी-पूरी का पानी या कच्चा प्याज खाने से बचें।

रेणु रखेजा जानी-मानी न्यूट्रिशनिस्ट एवं हेल्थ कोच हैं।

@consciouslivingtips

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