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- Avdheshanand Giri Maharaj Life Lesson. If We Forget Our Nature, Then Sorrow Comes In Life, Happiness Is Not Outside, It Is Within.
10 घंटे पहले
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हम जब अपने मूल स्वभाव को भूल जाते हैं, तब दुख जीवन में प्रवेश करते हैं। स्वयं से दूर होना ही दुख का कारण है। आनंद का स्रोत बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर, हमारे स्वभाव में ही है। जब हम अपने अस्तित्व और निजता को पहचानते हैं, तभी सच्चा सुख मिलता है। अतः आवश्यक है कि हम अपने स्वभाव में लौटें और वैदिक विचारों को अपनाएं।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए जीवन में खोया हुआ आनंद कैसे आ सकता है?
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